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अम्मी-अब्बू की लाडली रमशा को मिली ईदी, कानपुर की सेकेंड टॉपर और देश में पाई 273वीं रैंक
Wed, 05 Jun 2019 08:32 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 05 Jun 2019 08:32 PM IST
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अम्मू अब्बू के साथ लाडली रमशा
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर के बाकरगंज में रहने वाली रमशा हारुन को ईद पर शानदार रैंक की ईदी मिली। नीट 2019 में ऑल इंडिया 273 रैंक और शहर में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया है। रमशा अपने घर की लाडली हैं। रमशा को आगे बढ़ाने में सबसे ज्यादा अम्मी और अब्बू ने प्रेरित किया।
पिता मोहम्मद हारुन दुबई में एक कंपनी के मैनेजर हैं और मां रिजवाना अख्तर गृहिणी। छोटा भाई मो. एहतेशाम 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। रमशा मूल रूप से फतेहपुर की रहने वाली हैं। बताती हैं कि उन्हें हमेशा घरवालों ने आगे बढ़ने और पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
12वीं डीपीएस बर्रा से पिछले साल 97.4 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। उन्हें एमबीबीएस करने के बाद न्यूरोलॉजिस्ट बनना है। बीएचयू या केजीएमयू से पढ़ाई करना चाहती हैं। एम्स एमबीबीएस की परीक्षा भी दी है। कहती हैं कि पूरी उम्मीद है कि उनकी इसमें भी अच्छी रैंक आएगी।
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सीनियर ने दिखाई डॉक्टर बनने की राह
रमशा बताती हैं कि जब वह हाईस्कूल में थीं तब उनके एक सीनियर का चयन एमबीबीएस के लिए हुआ था। उन्हीं से मुझे भी डॉक्टर बनने का जज्बा मिला। मेरे मम्मी-पापा ने साथ दिया। कहती हैं कि वह रोज 5 से 6 घंटे पढ़ाई करती हैं।
लेखनी से मजबूत, कला का भी हुनर
रमशा को किसी भी मुद्दे पर आर्टिकल लिखना, कविताओं की रचना करना पसंद है। पेंटिंग और ड्राइंग का भी शौक है।
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पिता मोहम्मद हारुन दुबई में एक कंपनी के मैनेजर हैं और मां रिजवाना अख्तर गृहिणी। छोटा भाई मो. एहतेशाम 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। रमशा मूल रूप से फतेहपुर की रहने वाली हैं। बताती हैं कि उन्हें हमेशा घरवालों ने आगे बढ़ने और पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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12वीं डीपीएस बर्रा से पिछले साल 97.4 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। उन्हें एमबीबीएस करने के बाद न्यूरोलॉजिस्ट बनना है। बीएचयू या केजीएमयू से पढ़ाई करना चाहती हैं। एम्स एमबीबीएस की परीक्षा भी दी है। कहती हैं कि पूरी उम्मीद है कि उनकी इसमें भी अच्छी रैंक आएगी।
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सीनियर ने दिखाई डॉक्टर बनने की राह
रमशा बताती हैं कि जब वह हाईस्कूल में थीं तब उनके एक सीनियर का चयन एमबीबीएस के लिए हुआ था। उन्हीं से मुझे भी डॉक्टर बनने का जज्बा मिला। मेरे मम्मी-पापा ने साथ दिया। कहती हैं कि वह रोज 5 से 6 घंटे पढ़ाई करती हैं।
लेखनी से मजबूत, कला का भी हुनर
रमशा को किसी भी मुद्दे पर आर्टिकल लिखना, कविताओं की रचना करना पसंद है। पेंटिंग और ड्राइंग का भी शौक है।