फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Navratri 2023, A unique tradition is performed in the Baradevi temple, the spears are hit when the vow is fulf

Navratri 2023: बारादेवी मंदिर में निभाई जाती है अनोखी परंपरा, मन्नत पूरी होने पर मुंह में लग जाते हैं सांग

Thu, 30 Mar 2023 01:11 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 30 Mar 2023 01:11 PM IST
सार

Kanpur Baradevi Mandir: कानपुर का बारादेवी मंदिर पत्थर बनीं 12 बहनों के नाम पर है। यहांदर्शन के बाद लाल चुनरी बांधने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। चैत्र नवरात्र में यहां भक्त दूर-दूर से जवारे लेकर पहुंचते हैं। 

विज्ञापन
Navratri 2023, A unique tradition is performed in the Baradevi temple, the spears are hit when the vow is fulf
शंकर लाल बाबा, सौरभ और कोमल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में नवरात्र की अष्टमी को शहर के देवी मंदिरों में जवारा अर्पित करने की परंपरा की शुरूआत हो जाती है। इसी क्रम में अष्टमी व नवमी को बारादेवी मंदिर में शहर के लगभग सभी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त जवारे लेकर पहुंचे। भोर आरती के बाद बारादेवी मंदिर में भक्तों की दर्जनों टोलियां सामूहिक रूप से जवारा लेकर पहुंचीं।

विज्ञापन

बर्रा, गुजैनी, जरौली, घाटमपुर व नौबस्ता से बड़ी संख्या में भक्तों बारादेवी मंदिर पहुंच रहे हैं। जो मां को जवारा अर्पित कर रहे हैं। इसी प्रकार आशा देवी, जंगली देवी, तपेश्वरी देवी व काली मठिया मंदिर में भक्तों की टोली भोर पहर से जवारे अर्पित किए गए।
विज्ञापन

मुरादे पूरी होने पर मुंह में लग जाते हैं सांग
बारादेवी मंदिर में एक अनूठी प्रथा भी है, जिस भक्तों के यहां पर मुराद पूरी होती है। वह अपने मुंह में लोहे की सांग लगाकर मां के दर्शनों को अष्टमी और नवमी को आता है। साथी मंदिर पहुंचकर वह गेहूं के रूप में घर में उगाए जवारे मां के चरणों में अर्पित करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

छह साल के सौरव भी नहीं पीछे
अष्टमी के दिन फजलगंज से छह वर्षीय सौरभ ने भी मुंह में सांग लगाकर मां के दरबार में अपनी मुराद के लिए अर्जी लगाई सौरव की मां अंजली देवी ने बताया शान का वजन 30 किलो है और यह छह फीट की है। वहीं, कोमल तिवारी ने पहली बार अपनी मन्नत पूरी होने पर 30 किलो वजन का सांग अपने मुंह में लगवाया।

किदवई नगर के रमेश सिंह ने बताया वह पिछले कई सालों से मां के दरबार में मुंह में सांग लगाकर जा रहे हैं। इस बार उन्होंने 220 किलो वजन का सांग अपने मुंह में लगाकर मां बारा देवी के दर्शनों के लिए घर से निकले हैं। उनका पूरा परिवार उनके साथ सांग को उठाने में मदद कर रहा है।

पूरे जत्थे को 45 साल से लगा रहे हैं सांग
बारादेवी मंदिर पहुंचे जवारा जुलूस में टोली के सदस्य रहे शंकर लाल बाबा ने बताया पिछले 45 सालों से वाह भक्तों के गालों में सांग लगाने का काम कर रहे हैं। अब तक उन्होंने 65000 से ऊपर लोगों के मुंह में सांग लगा चुके हैं। उन्होंने बताया किसी भी व्यक्ति के सांग लगाने से पहले 24 घंटे बाद लगातार पूजा करते हैं।

इस तरह हुआ नामकरण
मंदिर की देखरेख करने वाले राजू माली ने बताया कि पिता से हुई अनबन के कारण उनके गुस्से के प्रकोप से बचने के लिए एक साथ बारह बहनें घर से भागकर यहां मूर्ति के रुप में स्थापित हो गईं। सालों बाद यही बारह बहनें बारादेवी के नाम से प्रसिद्ध हुईं। कहा जाता है कि बारह बहनों के श्राप देने से पिता भी पत्थर रुप में हो गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed