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ब्रिटेन के आम चुनाव में कानपुर की धमक, सांसद बने नवेंदु मिश्रा का शहर से गहरा जुड़ाव
Sat, 14 Dec 2019 03:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 14 Dec 2019 03:28 PM IST
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ब्रिटेन के सांसद बने कानपुर के नवेंदु मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
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ब्रिटेन के आम चुनाव में इस बार कानपुर की भी धमक देखने को मिली है। स्टॉकपोर्ट सीट से सांसद बने नवेंदु मिश्रा का कानपुर से गहरा जुड़ाव है। इनके पिता प्रभात रंजन मिश्रा मूलरूप से शहर के आर्यनगर मोहल्ले के रहने वाले हैं। नवेंदु मिश्रा ने यह चुनाव लेबर पार्टी के टिकट पर जीता है।
नवेंदु मिश्रा के चचेरे भाई डॉ. हिमांशु मिश्रा बताते हैं कि बाबा अयोध्या नाथ मिश्रा (वैद्य जी) के नाम पर आर्यनगर में उनका पुस्तैनी मकान है। उनके दो बेटे विधुशेखर मिश्रा और प्रभात रंजन मिश्रा यहीं कानपुर में ही पले पढ़े। बड़े बेटे विधुशेखर का चयन भारतीय रिजर्व बैंक में हुआ और वे यहां से प्रबंधक पद से रिटायर होने के बाद आर्यनगर में ही रह रहे हैं।
जबकि छोटे बेटे प्रभात ने मुंबई में वर्ष 2002 तक जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी में नौकरी की। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड में ब्रिटिश पेट्रोलियम में पैकेजिंग मैनेजर के पद पर ज्वाइन किया। तब से उनका परिवार वहीं रह रहा है। चाचा प्रभात रंजन मिश्रा की तीन संतानों में से नवेंदु सबसे बड़े हैं।
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ग्रेजुशन तक पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 2017 में भी चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। इस बार उन्हें सफलता मिली। नवेंदु के बाद बेटी मिताली और एक छोटा बेटा दिग्वेंदु भी परिवार में हैं। सभी ब्रिटेन में ही रह रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवराजपुर में चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु बताते हैं कि भाई की इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। नवेंदु से अक्सर बात होती रहती है और वे कानपुर के बारे में पूछते रहते हैं।
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नवेंदु मिश्रा के चचेरे भाई डॉ. हिमांशु मिश्रा बताते हैं कि बाबा अयोध्या नाथ मिश्रा (वैद्य जी) के नाम पर आर्यनगर में उनका पुस्तैनी मकान है। उनके दो बेटे विधुशेखर मिश्रा और प्रभात रंजन मिश्रा यहीं कानपुर में ही पले पढ़े। बड़े बेटे विधुशेखर का चयन भारतीय रिजर्व बैंक में हुआ और वे यहां से प्रबंधक पद से रिटायर होने के बाद आर्यनगर में ही रह रहे हैं।
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जबकि छोटे बेटे प्रभात ने मुंबई में वर्ष 2002 तक जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी में नौकरी की। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड में ब्रिटिश पेट्रोलियम में पैकेजिंग मैनेजर के पद पर ज्वाइन किया। तब से उनका परिवार वहीं रह रहा है। चाचा प्रभात रंजन मिश्रा की तीन संतानों में से नवेंदु सबसे बड़े हैं।
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ग्रेजुशन तक पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 2017 में भी चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। इस बार उन्हें सफलता मिली। नवेंदु के बाद बेटी मिताली और एक छोटा बेटा दिग्वेंदु भी परिवार में हैं। सभी ब्रिटेन में ही रह रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवराजपुर में चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु बताते हैं कि भाई की इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। नवेंदु से अक्सर बात होती रहती है और वे कानपुर के बारे में पूछते रहते हैं।