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प्रकृति-प्रेम संग उमड़ा वासंतिक उमंग
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Mon, 15 Feb 2016 02:10 AM IST
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ऋतुराज वसंत के आगमन पर रविवार को मोतीझील प्रांगण में ‘वसंती उमंग-2016’ का आयोजन किया गया। संस्कार भारती, श्रीकृष्ण तुलसी परिवार, आरोग्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग शामिल हुए।
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प्रांगण में प्रकृति प्रेम की छटा बिखरी तो चारों ओर वसंत का उल्लास दिखा। मंच पर मां सरस्वती के रूप में 101 कन्याओं का वीणा वादन माहौल को भक्तिमय बनाता रहा।
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प्रांगण में गौ-सेवा, योग, वसंत प्रेम, पर्यावरण संरक्षण समेत 20 स्टाल लगाए गए थे। इनमें लोगों को वसंत का स्वागत करने, अपने जीवन में किसी न किसी कला को सीखने की अपील की गई थी।
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मुख्य अतिथि इंडियन इंस्टीट्यूट फिल्म एंड टेलीविजन पुणे के निदेशक गजेंद्र चौहान (महाभारत सीरियल के युधिष्ठिर) ने कहा कि हम जब तक भोगी नहीं थे, रोगी भी नहीं थे।
पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में हमने भारतीयता को नष्ट कर दिया। अभी भी जाग जाइए। संस्कार भारती के राष्ट्रीय संरक्षक बाबा योगेंद्र ने कहा कि वसंत पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देने आता है।
कार्यक्रम में श्रीराम दूत हनुमंत सेवा समिति विनायकपुर के 501 भक्तों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। अंध विद्यालय के बच्चों ने प्रकृति गीत प्रस्तुत किया। संस्कार भारती की कविता सिंह के निर्देशन में बच्चों ने समूह नृत्य प्रस्तुत किया। गायक प्रवीण सिंह ने गीत चलें प्रकृति की ओर... गाया।
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शास्त्रीय गायक इंदौर के अभय मानके ने वसंत पर गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद आनंदोत्सव कार्यक्रम में शहर के 101 कलासाधकों ने मां सरस्वती की वंदना की।
अतिथियों का स्वागत समाजसेवी चंद्र प्रकाश गंगवानी उर्फ लालू ने किया। आयोजक संस्था ने 10 हजार घरों में तुलसी का पौधा गमला समेत पहुंचाने का संकल्प लिया।
जेेएनयू मामले के दोषियों को मिले कड़ी सजा
कानपुर। युधिष्ठिर ने जिस तरह हस्तिनापुर का विकास कराया, उसी तरह मोदी कार्यकाल में देश आगे बढ़ रहा है। यह बात इंडियन इंस्ट्रीट्यूट फिल्म एंड टेलीविजन (एफटीआई) पुणे के निदेशक गजेंद्र चौहान ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कही।
वह रविवार को मोतीझील में श्रीकृष्ण तुलसी परिवार के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्होंने जेएनयू दिल्ली में हुई देश विरोधी नारेबाजी के सवाल पर कहा कि जिन लोगों ने यह कृत्य किया है, उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। ऐसे लोगों के पक्ष में बात और समर्थन करने वालों की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ छात्रों का गुस्सा शांत हो गया है। एफटीआई की पहली बैठक में छात्रों, कर्मचारियों और संस्थान के हित में कई फैसले लिए गए हैं। छात्र-छात्राओं का अंतिम वर्ष है और वे लोग फिल्म के निर्माण में जुटे हैं।