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कानपुर मेंं रहस्यमयी बुखार: आज कुरसौली में रुकेंगे डीएम और सीएमओ, अब तक हो चुकी है 10 लोगों की मौत

Thu, 16 Sep 2021 03:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 16 Sep 2021 03:46 PM IST
सार

गांव में घुसते ही रास्ते के दाएं-बाएं बने घरों पर ताला लगा है। बच्चे, महिलाएं नजर नहीं आते। एक-दो घरों की दालान में बीमार व कराहते बुजुर्ग दिख जाते हैं। बरगदवाली गली के घरों के बच्चे अब नहीं हैं, परिजनों ने उन्हें ननिहाल या किसी रिश्तेदार के यहां भेज दिया है।

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Mysterious fever in Kanpur: DM and CMO will stay in Kursauli today, 10 people have died so far
सीडीओ महेंद्र कुमार पहुचे कुरसौली-ग्रामीण सजंय से जानकारी लेते हुए - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर के बिठूर स्थित कुरसौली गांव में वायरल फीवर और डेंगू बुखार ने आतंक फैला रखा है। हंसता-खेलता कुरसौली गांव बुखार और डेंगू से वीरान हो गया है। 26 दिन में 10 मौतों से गांव वालों का हौसला टूट गया है। वे अब गांव छोड़कर भाग रहे हैं। सीडीओ महेंद्र कुमार गांव पहुंच कर ग्रामीणों से जानकरी ले रहे हैं वहीं सूत्रों की मानें तो शासन के आदेश के बाद कानपुर डीएम और सीएमओ आज रात कुरसौली में ही बिताएंगे।
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वायरल फीवर और डेंगू बुखार के खौफ से गांव के 80 फीसदी घर खाली हो गए हैं। गांव में करीब 500 घर हैं। जिन गलियों में बुजुर्गों और बच्चों की जमघट लगती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। बुखार और डेंगू ने इस गांव की अर्थव्यवस्था भी तोड़ दी। गांववालों का कहना है कि कारोबार बंद है और कुरसौली का नाम बताने पर बाहर भी काम नहीं मिल रहा है। 
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Mysterious fever in Kanpur: DM and CMO will stay in Kursauli today, 10 people have died so far
सूनी पड़ी गांव की गलियां - फोटो : amar ujala
नहर पटरी से बाएं घूमते ही कल्याणपुर ब्लॉक के इस गांव की व्यथा सामने आ जाती है। गांव में घुसते ही रास्ते के दाएं-बाएं बने घरों पर ताला लगा है। बच्चे, महिलाएं नजर नहीं आते। एक-दो घरों की दालान में बीमार व कराहते बुजुर्ग दिख जाते हैं। बरगदवाली गली के घरों के बच्चे अब नहीं हैं, परिजनों ने उन्हें ननिहाल या किसी रिश्तेदार के यहां भेज दिया है।

जिस गली में मौत हुई, वे मरघट सी नजर आ रही हैं। जो इक्का-दुक्का घर खुले हैं, उनकी दहलीज पर बैठे लोग यहां आने वाले आगंतुक को फटी-फटी आंखों से देखने लगते हैं। गांव के संजय, ज्वाला, अभिषेक बताते हैं कि फॉगिंग न होने से लोगों का हौसला टूट गया। उनकी जान की किसी को परवाह नहीं है। प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के आने के एक दिन पहले फॉगिंग हुई तो लगा कि बीमारी खत्म होगी।

इसके बाद प्रधान अमित सिंह ही जो करा पा रहे हैं, कर रहे हैं। फॉगिंग न होने से घबराहट होने लगी और मौतें तो लगातार हो ही रही हैं। लोगों ने बताया कि आधे गांव के लोग प्लंबर का काम करते हैं, अब जब काम के लिए जा रहे हैं, तो उनसे कुछ दिन बाद आने के लिए कहा जा रहा। नहर पटरी मार्केट बंद है। गांववालों की दुकानें बंद हैं। राशन कोटेदार चंदन के बच्चे भी बुखार की चपेट में हैं, इससे राशन की दुकान भी नहीं खुल रही है।
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