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हज सब्सिडी पर प्रतिक्रियाएं- 'सरकार को सिर्फ मुस्लिमाें को टारगेट बनाना है...'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 17 Jan 2018 12:47 PM IST
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डेमो पिक
केंद्र सरकार की ओर से हज सब्सिडी खत्म करने के मामले में यूपी में कानपुर के मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि उनके इस फैसले से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे सरकार की नीयत पता चलता है। मुस्लिम समाज ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
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मौलाना मतीनुल हक ओसामा
- फोटो : अमर उजाला
देवबंदी विचारधारा के कार्यवाहक शहरकाजी मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने कहा कि हज यात्री दो से ढाई लाख रुपये खर्च कर हज करने जाता है। 10-15 हजार रुपये की हवाई किराये में मिलने वाली सब्सिडी से फर्क नहीं पड़ेगा। मुस्लिम महिलाओं की फिक्र करने वाली सरकार के पास इतना धन नहीं कि वह उनकी तालीम के लिए सब्सिडी से बची रकम का इस्तेमाल करेगी।
डॉ. हिना जहीर नकवी
- फोटो : अमर उजाला
शिया महिला शहरकाजी डॉ. हिना जहीर नकवी ने कहा कि तमाम मुस्लिम महिलाएं जिंदगी भर रकम बचाकर हज करने की सोचती हैं। इस सब्सिडी से उस वर्ग को कुछ फायदा मिल जाता था। कुंभ समेत तमाम धार्मिक कार्यक्रमों में करोड़ों अरबों रुपये सरकार खर्च करती है। सरकार को सिर्फ मुस्लिमाें को टारगेट बनाना है। तुष्टीकरण होता तो सच्चर कमेटी की रिपोर्ट मुस्लिमों की हालत दलितों से बदतर न बताती।
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हाजी मोहम्मद सलीस
- फोटो : अमर उजाला
आल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल के महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस ने कहा कि जो लोग एक बार हज करने जाते हैं, उनके लिए सब्सिडी नहीं बंद करनी चाहिए थी। जिंदगी में कई बार उमरा करने सऊदी अरब जाने वालों के लिए हज सब्सिडी घटानी चाहिए थी। केंद्रीय हज समिति को अधिकार दें कि दुनिया की किसी भी सस्ती एयरलाइंस को चुन सकें। घाटे में चल रही महंगी एयर इंडिया को हज यात्री क्यों ढोएंगे।
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मौलाना हाशिम अशरफी
- फोटो : अमर उजाला
आल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना हाशिम अशरफी ने कहा कि न तो 70 साल पहले सरकार से भीख मांगी थी और न ही हज सब्सिडी की भीख अब मांग रहे हैं। देश की चुनी सरकार ने हमारे समुदाय का ख्याल रखते हुए सब्सिडी दी थी। इसमें केंद्र की अटल बिहारी सरकार भी शामिल थी। अब केंद्र सरकार बंद कर रही है तो कर दे। इस बची रकम से यतीम बच्चों के लिए यतीमखाना देश में खोल दें क्योंकि उनका यह काम कम से कम दिखेगा तो।