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धर्म से बड़ी है इंसानियत: हिंदू की अर्थी को मुस्लिम पड़ोसियों ने दिया कंधा, पेश की सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल

Fri, 22 Apr 2022 08:14 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 22 Apr 2022 08:14 AM IST
सार

पड़ोसियों ने हिंदू रीति-रिवाज से अर्थी तैयार की और श्मशान तक ले गए। वहां शव को हिंदू कब्रिस्तान में दफन कराया। अंतिम संस्कार में शामिल हुए लोगों ने कहा कि रमजान में यह पवित्र कार्य करने का अवसर मिला। मन को बड़ा सुकून मिला। 

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Muslim neighbors gave shoulder to orphan Hindu, set an example of communal harmony
अनाथ देवा को दफनाते पड़ोसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गुरुवार को मानवता और सद्भावना की मिसाल देखने को मिली। जब एक अनाथ हिंदू का अंतिम संस्कार पड़ोसी मुस्लिम परिवारों ने किया। बता दें कि कानपुर के बाबूपुरवा के अजीतगंज में 40 वर्षीय देवा उर्फ गुड्डू के निधन पर पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम परिवारों ने अंतिम संस्कार कराया। आर्थिक तंगी से गुजर रहे परिजनों की मदद करते हुए पड़ोसियों ने अर्थी तैयार कराई। शव को हिंदू कब्रिस्तान में दफन कराया। मृतक की आत्मा शांति के लिए मौन रखकर प्रार्थना भी की।

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देवा की शादी नहीं हुई थी। वह कभी रिक्शा चलाते थे, तो कभी मजदूरी करते थे। बुधवार को उनकी अपने ही घर के बाहर संदिग्ध हालात में मौत हो गई। घंटाघर में रहने वाली भाभी बबली अपने बेटे के साथ पहुंचीं। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें मौत का कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा सुरक्षित किया गया। परिजनों के अनुसार देवा अक्सर बीमार रहते थे। 

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पोस्टमार्टम के बाद मुस्लिम समुदाय के पड़ोसियों मोहम्मद ताहिर, रजाउद्दीन, मोहम्मद अनस अंसारी, साबिर, मोहम्मद इस्लाम आदि ने हिंदू रीति-रिवाज से अर्थी को कंधा देकर शव को दफन कराया। आपस में चंदा कर अर्थी से लेकर अंतिम क्रिया का इंतजाम किया। 

इस दौरान लोग चर्चा करते रहे कि जाति, धर्म से बढ़कर इंसानियत होती है और अंत में इंसान ही इंसान के काम आता है। लोगों ने कहा कि क्या फर्क पड़ता है कि कौन मरा, सिर्फ इतना जानते हैं इंसान की मौत हुई और इंसानियत के लिए ये काम किया। 

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