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मुस्लिम जोड़े ने वैदिक मंत्रों के साथ हिंदू रीति-रिवाज से की शादी तो हर जुबां ने कहा सदा सुहागन रहो
Sat, 29 Jun 2019 01:25 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 29 Jun 2019 01:25 AM IST
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मुस्लिम जोड़े ने हिन्दू रीति रिवाज से रचा विवाह
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में बिधनू के कठेरुआ गांव में एक अनोखी शादी देखने को मिली, जहां एक मुस्लिम जोड़े ने निकाह न कर हिंदू रीति रिवाज से शादी की। मौका था मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह का। इसमें इस मुस्लिम जोड़े ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हिंदू रीति-रिवाज से शादी की तो वहां मौजूद हर शख्स की जुबां से सदा सुहागन रहो का आर्शीवाद मिला।
हिन्दू रीति रिवाज से शादी कर इस मुस्लिम जोड़े ने धार्मिक सौहार्द्र की मिसाल पेश की, जबकि यहां पर 112 जोड़ों की शादियां हुईं। इसमें आए सात मुस्लिम जोड़ों में छह जोड़ों का निकाह बाकायदा काजी साहब ने कराया, लेकिन एक जोड़ा पूरे समारोह में आकर्षण का केंद्र बना रहा।
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हिन्दू रीति रिवाज से शादी कर इस मुस्लिम जोड़े ने धार्मिक सौहार्द्र की मिसाल पेश की, जबकि यहां पर 112 जोड़ों की शादियां हुईं। इसमें आए सात मुस्लिम जोड़ों में छह जोड़ों का निकाह बाकायदा काजी साहब ने कराया, लेकिन एक जोड़ा पूरे समारोह में आकर्षण का केंद्र बना रहा।
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112 जोड़ों एक दूजे के हो गए
- फोटो : अमर उजाला
बिधनू के कुल्हौली मझावन गांव के पुत्तन खां ने अपनी 20 साल की बेटी जूली की शादी घाटमपुर के नौरंगा पतारा के रहने वाले सम्मू खां के 22 साल के बेटे नौशाद से तय की थी, जब कठेरुआ स्थित एक गेस्टहाउस में जोड़ियां बन रही थीं, तो इस मुस्लिम जोड़े ने सभी को अचंभित कर दिया। दोनों का निकाह नहीं बल्कि विवाह हुआ।
लाल पगड़ी बांधकर दूल्हा बने नौशाद ने लाल साड़ी में सजी जूली की मांग में सिंदूर भरकर अग्नि के सात फेरे लिए और एक-दूजे का जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। नवदंपत्ति ने बताया कि विवाह स्थल पर आने के बाद उनकी इच्छा हिंदू रीति रिवाज से शादी करने की हुई। यह बात उन्होंने परिजनों से बताई तो दोनों पक्ष के अभिभावकों ने मियां-बीवी की खुशी के लिए मंजूरी दे दी। मुस्लिम नवदंपति के भीतर हिंदू धर्म के प्रति आदर और सम्मान देखकर विवाह स्थल में मौजूद सभी लोगों ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया।
लाल पगड़ी बांधकर दूल्हा बने नौशाद ने लाल साड़ी में सजी जूली की मांग में सिंदूर भरकर अग्नि के सात फेरे लिए और एक-दूजे का जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। नवदंपत्ति ने बताया कि विवाह स्थल पर आने के बाद उनकी इच्छा हिंदू रीति रिवाज से शादी करने की हुई। यह बात उन्होंने परिजनों से बताई तो दोनों पक्ष के अभिभावकों ने मियां-बीवी की खुशी के लिए मंजूरी दे दी। मुस्लिम नवदंपति के भीतर हिंदू धर्म के प्रति आदर और सम्मान देखकर विवाह स्थल में मौजूद सभी लोगों ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया।