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दूधिये के बेटे की हत्या: गला कसते ही आशीष बोला- चाचा माफ कर दो, मारपीट का नहीं किया था विरोध, पढ़ें पूरी कहानी

Sun, 07 Jan 2024 06:35 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 07 Jan 2024 06:35 AM IST
सार

Fatehpur News: आशीष का युवती से प्रेम प्रसंग पिछले डेढ़ साल चल रहा था। यह बात दोनों परिवारों को मालूम थी। आम तौर पर अभिभावकों की अनदेखी से इस उम्र में युवा बहकने लगते हैं। हत्याकांड की इस घटना में भी ऐसा ही सामने आया।

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Murder of milkmans son in fatehpur, Was caught in objectionable situation with girl
fatehpur murder case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फतेहपुर जिले में 28 दिसंबर की रात आशीष की आखिरी रात होने वाली है, इसका उसे अंदाजा भी नहीं रहा होगा। पकड़े जाने के बाद आवेश में पिता और पुत्र मफलर के सहारे आशीष को कार तक घसीटते ले गए। हत्यारोपी की मानें, तो उस समय आशीष डरा और सहमा था। वह गाली गलौज और मारपीट रहे थे, उसकी जुबां से विरोध का एक शब्द नहीं निकला।

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उसने भागने की भी कोशिश नहीं की। वह भागता, तो शायद लोकलाज के डर से भाग जाने देते। कोर्रा गांव के जंगल के पास पुत्तन ने कार रोकवाई और गला कसना शुरू किया। गला कसते ही आशीष चीखकर बोला बाबा माफ कर दो। दोबारा विपिन से चाचा बोलकर माफी मांगी, लेकिन देर हो चुकी थी। आवेश में हत्या का पाश्चाताप भी आरोपियों को हुआ।

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शिकायतों की अनदेखी परिवारों को पड़ी भारी
आशीष का युवती से प्रेम प्रसंग पिछले डेढ़ साल चल रहा था। यह बात दोनों परिवारों को मालूम थी। आम तौर पर अभिभावकों की अनदेखी से इस उम्र में युवा बहकने लगते हैं। हत्याकांड की इस घटना में भी ऐसा ही सामने आया। लड़की का पिता पहले तीन बार राजेंद्र से आशीष को समझाने के लिए बोल चुका था।

बातचीत के बाद सबकुछ पहले जैसा हो जाता था
उधर, राजेंद्र भी पुत्तन को अपनी लड़की को समझाने के लिए बोलता था। दोनों पक्षों में बातचीत के बाद सबकुछ पहले जैसा हो जाता था। इस दौरान दोनों परिवारों ने युवाओं को ऐसे काम का अंजाम समझाना ठीक नहीं समझा। उन्हें ठीक से अभी दुनियादारी समझ भी नहीं थी। मृतक आशीष ने दो साल पहले दतौली से इंटर की परीक्षा पास की थी।

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परिवारों का सब कुछ बर्बाद हो गया
वह चार बहनों रश्मी, लक्ष्मी, संध्या, नंदो के बीच इकलौता भाई था। परिवार का चिराग बुझने से मां दया रश्मी, पिता, दादी ज्ञानमति हाल बेहाल है। उधर, हत्यारोपी पिता-पुत्र पुलिस हिरासत में हैं। युवती अपनी मां और छोटे भाई-बहन के साथ घर छोड़कर चली गई है। हत्यारोपी विपिन बांदा जिला चिल्ला में किराने की दुकान संचालित करता था। परिवारों का सब कुछ बर्बाद हो गया।

गुस्से के शिकार होने से पहले पुलिस शव ले गई
शव को पुलिस ललौली थाना क्षेत्र वापस नहीं लाई। पुलिस मर्का से शव मिलने के बाद दूसरी ओर कौंहन थाना असोथर ले गई। परिजनों के आने की भनक लगते ही पुलिस ने असोथर से ही शव सीधे पोस्टमार्टम भेज दिया। शव आशीष के लापता होने के नौ दिन बाद मिला है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस सतर्कता दिखाती, तो पहले ही शव मिल जाता। पुलिस ने गुस्से से बचने के लिए शव सीधे पोस्टमार्टम भेज दिया।

दो दिन पहले मल्लाह ने देखा था शव
पुलिस औगासी पुल पर खोजबीन को पहुंची। यहां एक मल्लाह ने पुलिस को खबर थी कि मर्का के पास दो दिन पहले युवक का शव देखा है। इसी आधार पर पुलिस ने नदी में मर्का की ओर तलाश चालू की।

कार के अंदर घटना को दिया था अंजाम
बता दें कि डेयरी संचालक के 28 दिसंबर से लापता पुत्र आशीष साहू (20) का यमुना नदी मर्का थाना क्षेत्र से शनिवार को शव बरामद हुआ। आपत्तिजनक हालात में पकड़े जाने के बाद युवती के पिता ने बेटे के सहयोग से युवक की मफलर से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। घटना को कार के अंदर अंजाम दिया।

मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस एक युवती तक पहुंची
उसी कार से शव को औगासी पुल की दूसरी ओर यमुना नदी में फेंका था। पुलिस ने पिता-पुत्र को हिरासत में लिया है। ललौली थाने के उरौली निवासी राजेंद्र साहू का मृतक आशीष पुत्र था। वह 28 दिसंबर रात को घर से कुछ दूर पशुबाड़े में सोने गया था। इसके बाद लापता हो गया था। मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस एक युवती तक पहुंची।

स्टीमर से नदी में खोज की गई थी
पुलिस ने युवती के पिता और भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ चालू की। जांच में हत्या कर शव यमुना नदी में फेंकने का पता लगा। पुलिस दूसरे दिन भी शनिवार दोपहर 11 बजे औगासी पुल पहुंची। स्टीमर से नदी में खोज शुरू की गई।
औगासी से 19 किलोमीटर दूर बांदा जिला मर्का थाना क्षेत्र अंतर्गत नदी किनारे शव मिला।

टीशर्ट में छपा नाम और अन्य कपड़े देखकर पहचान की।
कई दिन पहले की मौत की वजह शव फूल चुका था। उसकी टीशर्ट में आशीष साहू नाम छपा था। टीशर्ट में छपा नाम और अन्य कपड़े देखकर चाचा राजू ने पहचान की। पुलिस इस पार असोथर थाने के कौंहन गांव शव लेकर आई। यहीं पंचनामा भराने के बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया।

आपत्तिजनक हालात में देख उसे खबर दी
इधर, पुलिस की पूछताछ में युवती के पिता रणविजय सिंह उर्फ पुत्तन सिंह ने कबूला कि घटना की रात आशीष पुत्री के कमरे में था।  इसी दौरान बेटे विपिन की नींद खुली। बेटा आहट होने पर पुत्री के कमरे पहुंचा। बेटे ने आशीष को पुत्री के साथ आपत्तिजनक हालात में देख उसे खबर दी। उसने बेटे से इको वैन चालू करने को बोला।

नदी किनारे शव को फेंक घर लौट आए थे
वह आशीष को घसीटकर वैन में ले गया। वैन घुमाते हुए बेटा ललौली थाने के सामने से कोर्रा गांव की ओर पहुंचा। कोर्रा के पास ही आशीष का उसके ही मफलर से गला कसकर मार डाला। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने मुत्तौर, देवगांव के रास्ते औगासी पुल पर पहुंचा। पुल में बांदा सीमा की ओर नदी किनारे शव को फेंक घर लौट आए थे।

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