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खामोश हुआ मुख्तार: उम्रकैद की सजा होने के बाद इशारों में ही दे रहा जवाब, डिप्रेशन की आशंका

Tue, 06 Jun 2023 09:50 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 06 Jun 2023 09:50 PM IST
सार

वाराणसी की एमपी एमएलए कोर्ट ने अवधेश हत्याकांड में मुख्तार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा होने के बाद से बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी ने चुप्पी साध रखी है। कुछ भी पूछने पर अब वह सिर्फ इशारों में ही सिर हिलाकर हां या न में जवाब दे रहा है।

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Mukhtar became silent: after being sentenced to life imprisonment, he is giving answers only in gestures
मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांदा जिले में उम्रकैद की सजा होने के बाद से बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी ने चुप्पी साध रखी है। खाना पानी या कोई अन्य बात पूछने पर वह सिर्फ इशारों में ही सिर हिलाकर हां या न में जवाब दे रहा है। इस सबके बीच मंगलवार को भी मुख्तार के स्वास्थ्य का चेकअप कराया गया। हालांकि ब्लड प्रेशर सामान्य है, लेकिन खाने में सिर्फ दो रोटी ली है। उधर, मुख्तार की चुप्पी से अफसर खासे परेशान है।

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वह किसी से बोल नहीं रहा है। ज्यादा कुछ कहने उसका जवाब इशारों में देता है। सोमवार को वाराणसी की एमपी एमएलए कोर्ट ने अवधेश हत्याकांड में मुख्तार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फैसला सुनने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। वह जमीन पर लेट गया था। डॉक्टरों ने ब्लड प्रेशर नापने के बाद आराम की सलाह दी थी। जेल सूत्रों के अनुसार मंगलवार को मुख्तार का ब्लड प्रेशर चेक किया गया।

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खाने में मुख्तार ने सिर्फ दो रोटी ली। जेल अधिकारियों का कहना है कि मुख्तार किसी से बातचीत नहीं कर रहा है। कुछ कहने पर उसका जवाब इशारों में देता है। कारागार अधीक्षक वीरेश राज का कहना है मुख्तार की तबीयत सामान्य है। खाना भी खाया है। विपक्ष में फैसला आने के बाद चितिंत होना स्वाभाविक है। एक दो दिन में सबकुछ ठीक हो जाएगा।
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उधर, जिला अस्पताल के मनोरोग चिकित्सक डॉ. हर दयाल का कहना है कि किसी विशेष बात या घटना को लेकर कोई चुप्पी साध लेता है तो इसका सीधा असर उसके मस्तिष्क पर पड़ता है। इससे वह डिप्रेशन में भी जा सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक दीक्षित का कहना है कि मुख्तार को उम्रकैद की उम्मीद नहीं थी। इतनी बड़ी सजा के बाद डिप्रेेशन का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि कानून में हत्या की पुष्टि होने पर उम्रकैद की सजा होती है।
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