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Kanpur News: गड़बड़ी की जांच के लिए सांसद ने प्रमुख सचिव को लिखा पत्र
Sat, 25 Jul 2026 02:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 25 Jul 2026 02:03 AM IST
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कानपुर देहात। नोटों की गड्डियों के साथ मेडिकल कॉलेज के पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य और एक डॉक्टर की तस्वीर वायरल होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले का संज्ञान लेते हुए अकबरपुर लोकसभा सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने शुक्रवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने आठ बिंदुओं को दर्शाते हुए मामले की मजिस्ट्रेटी, स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
सांसद भोले ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को लिखे पत्र में उल्लेख किया है कि मेडिकल कॉलेज में पिछले छह महीनों में वित्तीय अनियमितता को लेकर सोशल मीडिया व स्थानीय लोगाें से उन्हें शिकायत मिली है। उन्होंने लिखा है कि शिकायत के अनुसार कार्यवाहक प्राचार्य रहे डॉ. हरप्रीत सिंह, डॉ. विमल यादव व फार्मासिस्ट चंद्रकांत पर कई गंभीर आरोप हैं। इसलिए मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में वित्तीय 2025-26 व 2026-27 में हुई आउटसोर्स, संविदा भर्ती व सामान खरीदारी, जैम पोर्टल, ई-निविदा से जो भी कार्य हुए हैं। उनकी फर्म व मालिक के मोबाइल नंबर सहित पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच एजेंसी या तीन सदस्यीय मजिस्ट्रेटी जांच करवाई जाए। यदि आरोप सही पाए जाएं तो आरोपियों से सरकारी धन की क्षति भी वसूली जाए।
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सांसद ने पत्र में दर्शाए यह बिंदु
1- पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत के कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. विमल कुमार यादव को कंसाइनी एवं क्रय सदस्य के रूप में नियुक्त कर विभिन्न विक्रेताओं से कथित रूप से अवैध धन लेकर कार्य आवंटित किए गए।
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2- 141 नर्सिंग स्टाफ एवं जो भी आउट सोर्स, संविदा की भर्ती प्रक्रिया में कथित रूप से आर्थिक अनियमितताएं कर संबंधित कंपनी को लाभ पहुंचाना।
3- जनवरी से मई तक की अवधि वाले टेंडर की समाप्ति के बाद भी नई चयन प्रक्रिया समय से प्रारंभ नहीं की गई।
4- फार्मासिस्ट चंद्रकांत को कथित रूप से व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के लिए उनके रिश्तेदार के नाम से संचालित दीक्षा ट्रेडिंग कंपनी के माध्यम से फर्जी बिलों का भुगतान कराया गया।
5- लॉन्ड्री टेंडर में वास्तविक 180 बेड के स्थान पर 230 बेड दर्शाकर लगभग छह लाख की वित्तीय अनियमितता किए जाने का आरोप
6- फार्मासिस्ट चंद्रकांत को मेंटेनेंस का नोडल अधिकारी बनाकर विभिन्न कार्यों में अनियमित भुगतान व वित्तीय लाभ पहुंचाए जाने के आरोप हैं।
7- शासनादेश की अवहेलना करते हुए लगभग 3.5 से चार करोड़ की दवाओं की खरीद निजी स्रोतों से करवाई गई। जबकि नियमानुसार केवल सीमित परिस्थितियों में ही बाहरी खरीद की अनुमति है। आरोप है कि लगभग 80 फीसदी दवाएं निजी स्रोतों से खरीदकर भारी कमीशन लिया गया है।
8- यह भी शिकायत है कि डॉ. विमल कुमार यादव अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग कर प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित करते हैं।
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बयान......
मेडिकल कॉलेज में हुई गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता से संबंधी शिकायत मेरे पास आई थी। सोशल मीडिया से भी जानकारी हुई। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के लोगों पर लगे आरोप गंभीर है। प्रदेश सरकार जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा/स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है। जिसमें उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई, जिससे दोषी लोगों पर कार्रवाई हो सके। - देवेंद्र सिंह भोले, सांसद
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सोमवार को जांच समिति के साथ होगी बैठक
पूरे प्रकरण को लेकर मेरी अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर दी गई है। कार्यवाहक रहे प्राचार्य डॉ. हरप्रीत और डॉ. विमल से जवाब लिया गया है। उनके जवाब और जांच समिति की रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को जांच समिति के साथ बैठक की जाएगी। जो लोग भी दोषी है, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य
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सांसद भोले ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को लिखे पत्र में उल्लेख किया है कि मेडिकल कॉलेज में पिछले छह महीनों में वित्तीय अनियमितता को लेकर सोशल मीडिया व स्थानीय लोगाें से उन्हें शिकायत मिली है। उन्होंने लिखा है कि शिकायत के अनुसार कार्यवाहक प्राचार्य रहे डॉ. हरप्रीत सिंह, डॉ. विमल यादव व फार्मासिस्ट चंद्रकांत पर कई गंभीर आरोप हैं। इसलिए मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में वित्तीय 2025-26 व 2026-27 में हुई आउटसोर्स, संविदा भर्ती व सामान खरीदारी, जैम पोर्टल, ई-निविदा से जो भी कार्य हुए हैं। उनकी फर्म व मालिक के मोबाइल नंबर सहित पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच एजेंसी या तीन सदस्यीय मजिस्ट्रेटी जांच करवाई जाए। यदि आरोप सही पाए जाएं तो आरोपियों से सरकारी धन की क्षति भी वसूली जाए।
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सांसद ने पत्र में दर्शाए यह बिंदु
1- पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत के कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. विमल कुमार यादव को कंसाइनी एवं क्रय सदस्य के रूप में नियुक्त कर विभिन्न विक्रेताओं से कथित रूप से अवैध धन लेकर कार्य आवंटित किए गए।
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2- 141 नर्सिंग स्टाफ एवं जो भी आउट सोर्स, संविदा की भर्ती प्रक्रिया में कथित रूप से आर्थिक अनियमितताएं कर संबंधित कंपनी को लाभ पहुंचाना।
3- जनवरी से मई तक की अवधि वाले टेंडर की समाप्ति के बाद भी नई चयन प्रक्रिया समय से प्रारंभ नहीं की गई।
4- फार्मासिस्ट चंद्रकांत को कथित रूप से व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के लिए उनके रिश्तेदार के नाम से संचालित दीक्षा ट्रेडिंग कंपनी के माध्यम से फर्जी बिलों का भुगतान कराया गया।
5- लॉन्ड्री टेंडर में वास्तविक 180 बेड के स्थान पर 230 बेड दर्शाकर लगभग छह लाख की वित्तीय अनियमितता किए जाने का आरोप
6- फार्मासिस्ट चंद्रकांत को मेंटेनेंस का नोडल अधिकारी बनाकर विभिन्न कार्यों में अनियमित भुगतान व वित्तीय लाभ पहुंचाए जाने के आरोप हैं।
7- शासनादेश की अवहेलना करते हुए लगभग 3.5 से चार करोड़ की दवाओं की खरीद निजी स्रोतों से करवाई गई। जबकि नियमानुसार केवल सीमित परिस्थितियों में ही बाहरी खरीद की अनुमति है। आरोप है कि लगभग 80 फीसदी दवाएं निजी स्रोतों से खरीदकर भारी कमीशन लिया गया है।
8- यह भी शिकायत है कि डॉ. विमल कुमार यादव अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग कर प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित करते हैं।
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बयान......
मेडिकल कॉलेज में हुई गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता से संबंधी शिकायत मेरे पास आई थी। सोशल मीडिया से भी जानकारी हुई। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के लोगों पर लगे आरोप गंभीर है। प्रदेश सरकार जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा/स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है। जिसमें उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई, जिससे दोषी लोगों पर कार्रवाई हो सके। - देवेंद्र सिंह भोले, सांसद
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सोमवार को जांच समिति के साथ होगी बैठक
पूरे प्रकरण को लेकर मेरी अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर दी गई है। कार्यवाहक रहे प्राचार्य डॉ. हरप्रीत और डॉ. विमल से जवाब लिया गया है। उनके जवाब और जांच समिति की रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को जांच समिति के साथ बैठक की जाएगी। जो लोग भी दोषी है, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य