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Kanpur News: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की हुई आराधना
Mon, 12 Oct 2026 12:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 12 Oct 2026 12:31 AM IST
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कानपुर देहात। नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को दुर्गा मंदिरों में भवानी शैलपुत्री की आराधना की गई। दुर्गा के प्रथम अवतार शैलपुत्री की पूजा के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान लोगों ने व्रत रखकर मां का पूजन-अर्चन किया। नवरात्र पर्व के मद्देनजर जिले के प्रमुख मंदिरों को काफी आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
श्रद्धालुओं ने पूजा के लिए पहले से ही सारी तैयारियां पूरी कर ली थीं। यही वजह था कि पहले दिन पूजन-अर्चन करने वाले भक्तों में अपूर्व उत्साह देखने को मिला। पहले दिन खास तौर से अकबरपुर के कालका देवी मंदिर में भारी संख्या में भक्तों की भीड़ देखी गई। उल्लेखनीय है कि दुर्गा के पहले अवतार शैलपुत्री को प्रकृति की देवी माना जाता है। आचार्य प्रियंक दीक्षित ने बताया कि देवी का यही स्वरूप भक्तों को पर्यावरण संतुलन की ओर प्रेरित करता है।
मान्यता के अनुसार देवी का प्रथम अवतार सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक विचारों को प्रभावित करता है। मां दुर्गा के आराधना मात्र से ही मनुष्य के वैचारिक विकार दूर हो जाते हैं। शास्त्रों, पुराणों के मुताबिक हिमालय की पुत्री होने के कारण ही दुर्गा के पहले अवतार का नाम शैलपुत्री पड़ा। प्रकृति के भावों को स्पष्ट करने के लिए ही देवी के प्रथम स्वरूप के रूप में मां शैल पुत्री की आराधना की जाती है। यह भी मान्यता है कि शैलपुत्री की आराधना अकेले ही नहीं बल्कि भगवान शिव के साथ ही जानी चाहिए। इन्हीं मान्यताओं को देखते हुए श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर शैलपुत्री की पूजा की।
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माता का पूजन कर की सुख-समृद्धि की कामना
रसूलाबाद। नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंच मां शैलपुत्री की विधि पूर्वक पूजा की। धर्मगढ़ बाबा स्थित दुर्गा मां मंदिर, तोरना स्थित मां पंथा माई मंदिर, कहिजरी स्थित काली मां मंदिर, विकास नगर स्थित मां दुर्गा मंदिर, ऋषि आश्रम मां दुर्गा मंदिर, करियावर के मां दुर्गा मंदिर व उसरी में मां सत्य देवी काली मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजन किया। जबकि घरों में महिलाओं ने कलश स्थापना कर नौ दिन तक चलने वाले व्रत और पूजा का संकल्प लिया। (संवाद)
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मंदिर में लगी लंबी कतार, महिलाओं ने किया पूजन
रूरा। क्षेत्र के लमहरा गांव स्थित परहुल माता मंदिर, गहलौ के आशा देवी मंदिर, नगर के मां दुर्गा व पाथामैया मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री की पूजा की। महिलाओं ने घर में कलश स्थापना के बाद मंदिर में जाकर देवी माता की विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की। माता को पुष्प, नारियल और चुनरी अर्पित कर आशीर्वाद मांगा। (संवाद)
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श्रद्धालुओं ने की पूजा, प्रसाद का हुआ वितरण
मूसानगर। नगर के देवी मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया और प्रसाद वितरित किया गया। सिद्धपीठ माता मुक्तेश्वरी मंदिर में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर मन्नत मांगी। सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान मुख्य बाजार, फत्तेपुर, मूसानगर, बांगर और गढ़ सहित विभिन्न स्थानों पर सजे पंडालों में देवी प्रतिमाओं की स्थापना की गई। (संवाद)
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देवी मंदिरों में गूंजे मां के जयकारे
रनियां। शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन क्षेत्र के विभिन्न देवी मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माथा टेका और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से मां दुर्गा की स्थापना कराई। रनियां के देविनपुरवा कनखिया माता मंदिर, बाजार स्थित पंथौड़िया माता मंदिर में आचार्य साधु त्रिवेदी ने पूजन कर स्थापना कराई। मंदिरों में मां के जयकारे गूंजते रहे। आचार्य श्यामजी त्रिपाठी ने बताया कि शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इसी के साथ श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर विधि-विधान से मां की पूजा-अर्चना करते हैं। (संवाद)
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श्रद्धालुओं ने पूजा के लिए पहले से ही सारी तैयारियां पूरी कर ली थीं। यही वजह था कि पहले दिन पूजन-अर्चन करने वाले भक्तों में अपूर्व उत्साह देखने को मिला। पहले दिन खास तौर से अकबरपुर के कालका देवी मंदिर में भारी संख्या में भक्तों की भीड़ देखी गई। उल्लेखनीय है कि दुर्गा के पहले अवतार शैलपुत्री को प्रकृति की देवी माना जाता है। आचार्य प्रियंक दीक्षित ने बताया कि देवी का यही स्वरूप भक्तों को पर्यावरण संतुलन की ओर प्रेरित करता है।
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मान्यता के अनुसार देवी का प्रथम अवतार सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक विचारों को प्रभावित करता है। मां दुर्गा के आराधना मात्र से ही मनुष्य के वैचारिक विकार दूर हो जाते हैं। शास्त्रों, पुराणों के मुताबिक हिमालय की पुत्री होने के कारण ही दुर्गा के पहले अवतार का नाम शैलपुत्री पड़ा। प्रकृति के भावों को स्पष्ट करने के लिए ही देवी के प्रथम स्वरूप के रूप में मां शैल पुत्री की आराधना की जाती है। यह भी मान्यता है कि शैलपुत्री की आराधना अकेले ही नहीं बल्कि भगवान शिव के साथ ही जानी चाहिए। इन्हीं मान्यताओं को देखते हुए श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर शैलपुत्री की पूजा की।
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माता का पूजन कर की सुख-समृद्धि की कामना
रसूलाबाद। नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंच मां शैलपुत्री की विधि पूर्वक पूजा की। धर्मगढ़ बाबा स्थित दुर्गा मां मंदिर, तोरना स्थित मां पंथा माई मंदिर, कहिजरी स्थित काली मां मंदिर, विकास नगर स्थित मां दुर्गा मंदिर, ऋषि आश्रम मां दुर्गा मंदिर, करियावर के मां दुर्गा मंदिर व उसरी में मां सत्य देवी काली मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजन किया। जबकि घरों में महिलाओं ने कलश स्थापना कर नौ दिन तक चलने वाले व्रत और पूजा का संकल्प लिया। (संवाद)
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मंदिर में लगी लंबी कतार, महिलाओं ने किया पूजन
रूरा। क्षेत्र के लमहरा गांव स्थित परहुल माता मंदिर, गहलौ के आशा देवी मंदिर, नगर के मां दुर्गा व पाथामैया मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री की पूजा की। महिलाओं ने घर में कलश स्थापना के बाद मंदिर में जाकर देवी माता की विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की। माता को पुष्प, नारियल और चुनरी अर्पित कर आशीर्वाद मांगा। (संवाद)
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श्रद्धालुओं ने की पूजा, प्रसाद का हुआ वितरण
मूसानगर। नगर के देवी मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया और प्रसाद वितरित किया गया। सिद्धपीठ माता मुक्तेश्वरी मंदिर में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर मन्नत मांगी। सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान मुख्य बाजार, फत्तेपुर, मूसानगर, बांगर और गढ़ सहित विभिन्न स्थानों पर सजे पंडालों में देवी प्रतिमाओं की स्थापना की गई। (संवाद)
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देवी मंदिरों में गूंजे मां के जयकारे
रनियां। शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन क्षेत्र के विभिन्न देवी मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माथा टेका और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से मां दुर्गा की स्थापना कराई। रनियां के देविनपुरवा कनखिया माता मंदिर, बाजार स्थित पंथौड़िया माता मंदिर में आचार्य साधु त्रिवेदी ने पूजन कर स्थापना कराई। मंदिरों में मां के जयकारे गूंजते रहे। आचार्य श्यामजी त्रिपाठी ने बताया कि शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इसी के साथ श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर विधि-विधान से मां की पूजा-अर्चना करते हैं। (संवाद)