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Kanpur News: सड़कों पर प्रदूषण फैला रहे एक लाख से ज्यादा वाहन
Mon, 01 Dec 2025 12:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 01 Dec 2025 12:53 AM IST
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कानपुर देहात। जिले के सड़कों पर एक लाख से ज्यादा ऐसे वाहन चल रहे हैं, जिनकी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) की अवधि समाप्त हो चुकी है। यह वाहन रोजाना प्रदूषित धुआं छोड़कर हवा को जहरीला बना रहे हैं। फिर भी पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से इन वाहनों पर कोई सख्ती नहीं दिखाई जा रही है।
जिले के परिवहन विभाग में तीन लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं। इनमें दो पहिया, चार पहिया, ऑटो व भारी वाहन भी शामिल हैं। पंजीकृत वाहनों में सबसे अधिक बाइकों की संख्या 2.53 लाख है। कारों की संख्या करीब 22 हजार है। इनमें से एक लाख से अधिक वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं है। जबकि प्रदूषण प्रमाण पत्र के लिए जिले में 19 प्रदूषण केंद्र संचालित हैं।
इन केंद्रों पर छह महीने से लेकर एक साल के लिए वाहनों की पीयूसी जारी की जाती है। इसके बावजूद सड़कों पर चालक बिना पीयूसी के वाहन लेकर बेखौफ दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के आरआई जीवन राम ने बताया कि बिना पीयूसी के वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं है। व्यवसायिक वाहनों की हर साल फिटनेस के दौरान एटीएस पर सभी कागजात की जांच होने के बाद प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। पिछले चार महीने में ऐसे 281 वाहनों का प्रदूषण चालान किया गया है।
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प्रदूषण से होती हैं कई बीमारियां
अकबरपुर सीएचसी पर तैनात फिजिशियन डॉ. शिवम तिवारी ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण कई प्रकार की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। श्वसन, हृदय, त्वचा संबंधी रोगों से लेकर कैंसर तक के जोखिम शामिल हैं। इससे बच्चों में निमोनिया तो बड़ों में सीओपीडी के कई मामले सामने आते हैं। वायु प्रदूषण के कारण वर्षा का जल तक दूषित हो जाता है। अम्लीय वर्षा के कारण शरीर पर इनफेक्शन, दाने, छाले हो जाते हैं।
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बयान-
वाहनों के धुएं से निकलती हैं कई जहरीली गैस
वाहनों के धुएं से कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, शूट पार्टिकल्स, पीएम-2.5 निकलता है। इससे पर्यावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसके कारण सबसे अधिक बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी होती है। चौराहों पर जाम की स्थिति में आस-पास की हवा काफी दूषित हो जाती है। इससे लोगों के बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। पुराने वाहनों के धुएं से सीसा (लेड) भी निकलता है, जो सांस लेने पर स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। सीसा फेफड़ों, तंत्रिका तंत्र और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके लंबे समय तक संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। - डॉ. शिवम तिवारी, फिजिशियन, सीएचसी अकबरपुर
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बीते चार महीने में वायु प्रदूषण के 281 चालान किए गए हैं। विभाग की ओर से समय-समय पर वाहनों की चेकिंग की जाती है। प्रदूषण के चालान को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। - सोमलता यादव, एआरटीओ (प्रवर्तन)
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जिले के परिवहन विभाग में तीन लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं। इनमें दो पहिया, चार पहिया, ऑटो व भारी वाहन भी शामिल हैं। पंजीकृत वाहनों में सबसे अधिक बाइकों की संख्या 2.53 लाख है। कारों की संख्या करीब 22 हजार है। इनमें से एक लाख से अधिक वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं है। जबकि प्रदूषण प्रमाण पत्र के लिए जिले में 19 प्रदूषण केंद्र संचालित हैं।
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इन केंद्रों पर छह महीने से लेकर एक साल के लिए वाहनों की पीयूसी जारी की जाती है। इसके बावजूद सड़कों पर चालक बिना पीयूसी के वाहन लेकर बेखौफ दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के आरआई जीवन राम ने बताया कि बिना पीयूसी के वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं है। व्यवसायिक वाहनों की हर साल फिटनेस के दौरान एटीएस पर सभी कागजात की जांच होने के बाद प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। पिछले चार महीने में ऐसे 281 वाहनों का प्रदूषण चालान किया गया है।
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प्रदूषण से होती हैं कई बीमारियां
अकबरपुर सीएचसी पर तैनात फिजिशियन डॉ. शिवम तिवारी ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण कई प्रकार की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। श्वसन, हृदय, त्वचा संबंधी रोगों से लेकर कैंसर तक के जोखिम शामिल हैं। इससे बच्चों में निमोनिया तो बड़ों में सीओपीडी के कई मामले सामने आते हैं। वायु प्रदूषण के कारण वर्षा का जल तक दूषित हो जाता है। अम्लीय वर्षा के कारण शरीर पर इनफेक्शन, दाने, छाले हो जाते हैं।
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बयान-
वाहनों के धुएं से निकलती हैं कई जहरीली गैस
वाहनों के धुएं से कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, शूट पार्टिकल्स, पीएम-2.5 निकलता है। इससे पर्यावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसके कारण सबसे अधिक बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी होती है। चौराहों पर जाम की स्थिति में आस-पास की हवा काफी दूषित हो जाती है। इससे लोगों के बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। पुराने वाहनों के धुएं से सीसा (लेड) भी निकलता है, जो सांस लेने पर स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। सीसा फेफड़ों, तंत्रिका तंत्र और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके लंबे समय तक संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। - डॉ. शिवम तिवारी, फिजिशियन, सीएचसी अकबरपुर
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बीते चार महीने में वायु प्रदूषण के 281 चालान किए गए हैं। विभाग की ओर से समय-समय पर वाहनों की चेकिंग की जाती है। प्रदूषण के चालान को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। - सोमलता यादव, एआरटीओ (प्रवर्तन)