{"_id":"689a56095faec837730dd7ab","slug":"more-than-10-thousand-pending-claims-of-the-city-can-be-settled-kanpur-news-c-12-1-knp1053-1223058-2025-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: शहर के 10 हजार से ज्यादा लंबित दावों का हो सकेगा निपटारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: शहर के 10 हजार से ज्यादा लंबित दावों का हो सकेगा निपटारा
विज्ञापन
कानपुर। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों को मृत ग्राहकों के खातों के दावों को 15 दिन में निपटाने के निर्देश जारी किए हैं। इससे शहर के 10 हजार से ज्यादा परिवारीजनों को लाभ होगा। उन्हें बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इससे पहले इस तरह के दावों के लिए निस्तारण के संबंध में कोई समय सीमा निर्धारित नहीं थी।
ऑल इंडिया वी बैंकर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महामंत्री आशीष मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में मृतक दावे के लिए कोई ऑनलाइन पोर्टल ज्यादातर बैंकों में उपलब्ध नहीं है। सभी सरकारी और निजी बैंकों में ऐसे मृतक दावों का फॉर्म बहुत जटिल है। किसी बैंक में 35 पन्ने का फार्म है तो कहीं 30 पन्ने का है। उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया जटिल है। इससे लंबा वक्त लगता है। बैंकों में अपने पैनल अधिवक्ताओं के नंबर ग्राहकों को दिए जाते हैं जिससे ग्राहक जटिल दावे की समस्त प्रक्रिया पूरा कर सकें। ऐसे में कम पढ़े लिखे और ग्रामीण क्षेत्र के ग्राहकों को संबंधी मृतक के खाते के पैसे को पाने के लिए बहुत रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
उन्होंने बताया कि आरबीआई के नए निर्देश से शहर में 10 हजार से ज्यादा लंबित मृतक दावे का निस्तारण किया जा सकेगा। साथ ही 15 दिन की समय सीमा निर्धारित कर देने से बैंक की सीधी जवाबदेही तय हो गई है। आरबीआई के निर्देश में ऐसे मामलों का जिक्र किया है जिसमें व्यक्ति मृतक हो गया है और उसका पैसा आने वाला है। ऐसे खातों के लिए एक नए खाता खोलने का निर्देश जारी किया है। खाते में कोई निकासी नहीं की जाएगी। अगर खाता खोलने की स्थिति नहीं होगी तो आने वाली राशि को जहां भेजी गई है उसी को वापस भेज दिया जाएगा। साथ ही संदेश में लिखा जाएगा कि खाताधारक मृतक है। मृतक खातों में कोई सेंधमारी भी नहीं कर पाएगा। बैंक इसे अपने सिस्टम में रख सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऑल इंडिया वी बैंकर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महामंत्री आशीष मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में मृतक दावे के लिए कोई ऑनलाइन पोर्टल ज्यादातर बैंकों में उपलब्ध नहीं है। सभी सरकारी और निजी बैंकों में ऐसे मृतक दावों का फॉर्म बहुत जटिल है। किसी बैंक में 35 पन्ने का फार्म है तो कहीं 30 पन्ने का है। उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया जटिल है। इससे लंबा वक्त लगता है। बैंकों में अपने पैनल अधिवक्ताओं के नंबर ग्राहकों को दिए जाते हैं जिससे ग्राहक जटिल दावे की समस्त प्रक्रिया पूरा कर सकें। ऐसे में कम पढ़े लिखे और ग्रामीण क्षेत्र के ग्राहकों को संबंधी मृतक के खाते के पैसे को पाने के लिए बहुत रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि आरबीआई के नए निर्देश से शहर में 10 हजार से ज्यादा लंबित मृतक दावे का निस्तारण किया जा सकेगा। साथ ही 15 दिन की समय सीमा निर्धारित कर देने से बैंक की सीधी जवाबदेही तय हो गई है। आरबीआई के निर्देश में ऐसे मामलों का जिक्र किया है जिसमें व्यक्ति मृतक हो गया है और उसका पैसा आने वाला है। ऐसे खातों के लिए एक नए खाता खोलने का निर्देश जारी किया है। खाते में कोई निकासी नहीं की जाएगी। अगर खाता खोलने की स्थिति नहीं होगी तो आने वाली राशि को जहां भेजी गई है उसी को वापस भेज दिया जाएगा। साथ ही संदेश में लिखा जाएगा कि खाताधारक मृतक है। मृतक खातों में कोई सेंधमारी भी नहीं कर पाएगा। बैंक इसे अपने सिस्टम में रख सकेंगे।
विज्ञापन