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एमएलसी चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग, स्नातक में अरुण-मानवेंद्र के बीच रही लड़ाई
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 04 Feb 2017 01:09 AM IST
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कानपुर नगर में 57.1, देहात में 53.36 फीसदी वोटिंग हुई
- फोटो : अमर उजाला
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स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के इतिहास में कानपुर में अब तक की सबसे ज्यादा (57.1 फीसदी) वोटिंग हुई। इतनी वोटिंग इससे पहले कभी नहीं हुई। पिछली बार 2015 में 28 फीसदी वोटिंग हुई थी। वोटिंग बढ़ने का कारण मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ना बताया जा रहा है। अधिकतर वोटरों ने कहा कि अब विकास की राजनीति होनी चाहिए। मुद्दों पर बात करने वालों को ही वोट दिया जाएगा। इस चुनाव के नतीजे छह मार्च को आएंगे।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव शुक्रवार को कानपुर नगर, देहात और उन्नाव के अलग-अलग केंद्रों पर कराए गए। इन जिलों के एक लाख 53 हजार 707 लोगों को वोट डालना था। 2015 के चुनाव की तुलना में इस बार 29.1 फीसदी ज्यादा वोटिंग हुई। शहर के साथ-साथ देहात क्षेत्र में भी वोट बरसे। देहात में 53.36 फीसदी वोटिंग हुई है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक एमएलसी चुनाव में पहली बार इतनी वोटिंग हुई है। वोटिंग के मामले में उन्नाव के मतदाताओं ने निराश किया है। जिला निर्वाचन आयोग के तमाम प्रयासों के बाद भी 45 फीसदी वोटिंग हो सकी। आयोग की मंशा 50 फीसदी या उससे ज्यादा वोटिंग कराने की थी। बहरहाल, बढ़े वोटिंग फीसदी ने प्रत्याशियों की धुकधुकी बढ़ा दी है। वह कह रहे हैं कि बढ़ा वोट कहां जाएगा, इसका आकलन कर पाना मुश्किल है।
मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था
कानपुर नगर, देहात और उन्नाव स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (एमएलसी) के मतदान में मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी अरुण पाठक और निर्दलीय मानवेंद्र स्वरूप के बीच रहा। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (एमएलसी) चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था। चुनाव निरस्त होने से पहले कहा गया कि हार-जीत की लड़ाई राज बहादुर सिंह चंदेल, हेमराज सिंह गौर और श्रीकांत द्विवेदी के बीच होगी।
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स्नातक और निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव शुक्रवार को शांतिपूर्ण ढंग से निपट गया। अब छह मार्च को मतगणना होगी। इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि एमएलसी चुनाव के नतीजों से विधानसभा चुनावों की गरमाहट का अंदाजा लगाया जा सकेगा। भाजपा और सपा ने अधिकृत प्रत्याशी भी उतारे हैं। कांग्र्रेस, सपा समर्थित उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। शुक्रवार को सुबह आठ बजे से अपराह्न पांच बजे तक वोटिंग का जो ट्रेंड रहा, उसके मुताबिक स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला कांटे का है। मतदाताओं से बातचीत में पता चला कि स्थानीय के साथ ही राष्ट्रीय मुद्दों को तवज्जो पर वोटिंग की गई है। जातिगत समीकरण भी बैठे हैं। बहरहाल, प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। अब छह मार्च को राजकीय पॉलिटेक्निक कानपुर में मतगणना होगी, तभी जीत-हार के सही अंतर का पता चल सकेगा।
मैदान में ये प्रत्याशी भी
स्नातक - अरुण कुमार पाठक, आशीष कुमार पांडेय, जय प्रकाश साहू, तारिक रहमान, दीप कुमार शुक्ला, नकी हैदर, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, डॉ. महादेव, माया कौशल, राम भरत, विवेक कटियार।
एकजुट रहा परिवार
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी मानवेंद्र स्वरूप का परिवार एकजुट रहा। डीएवी ग्रुप के डॉ. नागेंद्र स्वरूप, उनकी पत्नी कुमकुम स्वरूप तमाम मतदान केंद्रों पर गए। पर्ची बांटने की ड्यूटी देखी और शाम चार बजे तक डटे रहने के दिशा-निर्देश दिए। अलक्षेंद्र स्वरूप, गौरवेंद्र स्वरूप ने भी मतदान केंद्रों पर जाकर चुनाव की व्यवस्था देखी। मानवेंद्र स्वरूप भी घूमते रहे। पूरे परिवार ने जीएनके इंटर कॉलेज में वोट डाला। डिग्री-इंटर कॉलेज के शिक्षक-प्रिंसिपल भी डटे रहे।
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स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव शुक्रवार को कानपुर नगर, देहात और उन्नाव के अलग-अलग केंद्रों पर कराए गए। इन जिलों के एक लाख 53 हजार 707 लोगों को वोट डालना था। 2015 के चुनाव की तुलना में इस बार 29.1 फीसदी ज्यादा वोटिंग हुई। शहर के साथ-साथ देहात क्षेत्र में भी वोट बरसे। देहात में 53.36 फीसदी वोटिंग हुई है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक एमएलसी चुनाव में पहली बार इतनी वोटिंग हुई है। वोटिंग के मामले में उन्नाव के मतदाताओं ने निराश किया है। जिला निर्वाचन आयोग के तमाम प्रयासों के बाद भी 45 फीसदी वोटिंग हो सकी। आयोग की मंशा 50 फीसदी या उससे ज्यादा वोटिंग कराने की थी। बहरहाल, बढ़े वोटिंग फीसदी ने प्रत्याशियों की धुकधुकी बढ़ा दी है। वह कह रहे हैं कि बढ़ा वोट कहां जाएगा, इसका आकलन कर पाना मुश्किल है।
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मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था
कानपुर नगर, देहात और उन्नाव स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (एमएलसी) के मतदान में मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी अरुण पाठक और निर्दलीय मानवेंद्र स्वरूप के बीच रहा। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (एमएलसी) चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था। चुनाव निरस्त होने से पहले कहा गया कि हार-जीत की लड़ाई राज बहादुर सिंह चंदेल, हेमराज सिंह गौर और श्रीकांत द्विवेदी के बीच होगी।
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स्नातक और निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव शुक्रवार को शांतिपूर्ण ढंग से निपट गया। अब छह मार्च को मतगणना होगी। इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि एमएलसी चुनाव के नतीजों से विधानसभा चुनावों की गरमाहट का अंदाजा लगाया जा सकेगा। भाजपा और सपा ने अधिकृत प्रत्याशी भी उतारे हैं। कांग्र्रेस, सपा समर्थित उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। शुक्रवार को सुबह आठ बजे से अपराह्न पांच बजे तक वोटिंग का जो ट्रेंड रहा, उसके मुताबिक स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला कांटे का है। मतदाताओं से बातचीत में पता चला कि स्थानीय के साथ ही राष्ट्रीय मुद्दों को तवज्जो पर वोटिंग की गई है। जातिगत समीकरण भी बैठे हैं। बहरहाल, प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। अब छह मार्च को राजकीय पॉलिटेक्निक कानपुर में मतगणना होगी, तभी जीत-हार के सही अंतर का पता चल सकेगा।
मैदान में ये प्रत्याशी भी
स्नातक - अरुण कुमार पाठक, आशीष कुमार पांडेय, जय प्रकाश साहू, तारिक रहमान, दीप कुमार शुक्ला, नकी हैदर, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, डॉ. महादेव, माया कौशल, राम भरत, विवेक कटियार।
एकजुट रहा परिवार
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी मानवेंद्र स्वरूप का परिवार एकजुट रहा। डीएवी ग्रुप के डॉ. नागेंद्र स्वरूप, उनकी पत्नी कुमकुम स्वरूप तमाम मतदान केंद्रों पर गए। पर्ची बांटने की ड्यूटी देखी और शाम चार बजे तक डटे रहने के दिशा-निर्देश दिए। अलक्षेंद्र स्वरूप, गौरवेंद्र स्वरूप ने भी मतदान केंद्रों पर जाकर चुनाव की व्यवस्था देखी। मानवेंद्र स्वरूप भी घूमते रहे। पूरे परिवार ने जीएनके इंटर कॉलेज में वोट डाला। डिग्री-इंटर कॉलेज के शिक्षक-प्रिंसिपल भी डटे रहे।