इरफान सोलंकी प्रकरण: कमिश्नर आवास के पास छिपे थे विधायक, 24 घंटे नहीं लगी भनक, नई सड़क हिंसा में भी कनेक्शन
सपा विधायक इरफान सोलंकी के मामले में पुलिस की बड़ी नाकामी सामने आई है। दरअसल, कमांड से चंद कदम की दूरी पर विधायक 24 घंटे छिपे रहे थे, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। आठ नवंबर की रात इरफान पर केस दर्ज हुआ था और वो कुछ ही देर बाद शहर छोड़ चले गए थे।
विस्तार
कानपुर में सपा विधायक इरफान सोलंकी को जब पुलिस तलाश रही थी तब वह कमांड (पुलिस कमिश्नर आवास) से चंद कदम की दूरी पर वह 24 घंटे तक छिपे रहे थे। ठिकाना था ग्वालटोली स्थित सपा नेत्री नूरी शौकत का घर। पुलिस अलग-अलग शहरों में दबिश देती रही थी। बीच शहर से सरेशाम वह कार से नोएडा रवाना हो गए थे।
मामले में यह पुलिस की बड़ी नाकाम रही है। इरफान सोलंकी पर आठ नवंबर की रात आठ बजे एफआईआर दर्ज हुई थी। देर रात ढाई बजे पुलिस बल ने जाजमऊ में स्थित उनके आवास पर दबिश दी थी। तब इरफान वहां नहीं मिले थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह निकल चुके थे।
वहीं, नौ नवंबर को इरफान लखनऊ में प्रेसवार्ता करते दिखे थे। दोपहर बाद वह मोबाइल बंद कर अंडरग्राउंड हो गए थे। पुलिस इधर उधर हाथ पैर मारती रह गई थी। अब जब उसके मददगार पकड़े गए तो बड़ा खुलासा हुआ। पुलिस सूत्रों के मुताबिक नौ नवंबर की शाम को ही इरफान नूरी शौकत के घर आ गए थे।
दस नवंबर को शाम करीब चार बजे वह नोएडा रवाना हुए थे। उनके साथ नूरी और उनका ड्राइवर भी गया था। हैरानी इस बात की है कि पुलिस लखनऊ में दबिश देने पहुंची थी, लेकिन इरफान की करीबी के घर तक नहीं पहुंच सकी थी।
दावा: रिजवान ने भी बनाया फर्जी आधार
ग्वालटोली थाने में जिस तहरीर पर केस दर्ज किया गया है, उसमें रिजवान का जिक्र नहीं है। एक जगह पर रिजवान का नाम लिखा है, जिसमें आठ तारीख वाले मुकदमे का विवरण लिखा है। इस पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए कि जब रिजवान पर आरोप नहीं लगा, तो उसको नामजद आरोपी कैसे बनाया गया।
हालांकि ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी का कहना है कि कुछ तथ्य ऐसे सामने आए हैं, जिससे पता चला है कि रिजवान ने भी फर्जी आधार बनाया है। इससे संबंधित पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ चल रही है।
पुराने केसों की समीक्षा शुरू
इरफान व रिजवान पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। रिजवान सोलंकी उन्नाव से भूमाफिया भी है। ऐसे में पुलिस दोनों के पुराने केसों की समीक्षा शुरू कर दी है। जिसमें स्वरूपनगर थाने में दर्ज तीन केस शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज में हुए बवाल से संबंधित ये तीनों केस हैं।
इसमें तब फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। इसी तरह से 2011 में तत्कालीन केस्को एमडी से बदसलूकी करने में केस दर्ज हुआ था। पुलिस इस केस के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। जिन जिन में साक्ष्य होंगे, उन केसों की दोबारा फाइलें खुलने की संभावना है।
नई सड़क बवाल कनेक्शन की तलाश
तीन जून को नई सड़क पर बवाल हुआ था। बिल्डर हाजी वसी व बाबा बिरयानी के मालिक मुख्तार बाबा भी इसमें जेल भेजे गए थे। इस दौरान पता चला था कि हाजी वसी की हमराज कंस्ट्रक्शन की कंपनी में विधायक की पत्नी व चाचा की हिस्सेदारी हैं। वह कंपनी के निदेशक हैं। अब पुलिस इस तथ्य से संबंधित जानकारी भी जुटा रही है।
पूछताछ के बाद विधायक की बहन को छोड़ा
विधायक व उसके भाई की गिरफ्तारी करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। इसलिए पुलिस ने अब विधायक के परिजनों, रिश्तेदारों व करीबियों से पूछताछ शुरू की है। मंगलवार को विधायक की बहन को हिरासत में लिया था। उससे रात भर पूछताछ की। बुधवार को छोड़ दिया। हालांकि कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी। बहन को क्लीनचिट अभी नहीं दी गई है।