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डॉक्टरों का कमाल: गॉलब्लैडर से निकाली 200 ग्राम की पथरी, टूटा त्रिनिदाद-टोबैगो का रिकॉर्ड!
Sun, 31 May 2026 04:38 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: Shikha Pandey
Updated Sun, 31 May 2026 04:38 PM IST
सार
गैस्ट्रो सर्जरी विभाग की टीम ने विश्व की सबसे बड़ी गॉलब्लैडर की पथरी होने का दावा किया। अब तक वेनेजुएला के द्वीप गणराज्य त्रिनिदाद और टोबैगो के नाम यह कीर्तिमान था।
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आयुर्विज्ञान विवि सैफई के गेस्ट्रो सर्जरी विभाग में निकाली गई विश्व की सबसे बड़ी गॉलब्लैडर की पथरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विवि सैफई के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग की टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से विश्व के सबसे बड़े 200 ग्राम के गॉलब्लैडर स्टोन को सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सा क्षेत्र में नया मुकाम हासिल किया है। अब तक वेनेजुएला के छोटे जुड़वा द्वीप गणराज्य, त्रिनिदाद और टोबैगो को लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से सबसे बड़ी 178 ग्राम वजन की पथरी निकालने का रिकाॅर्ड था।
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विवि के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग में इलाज के लिए पहुंची 62 वर्षीय महिला को लंबे समय से पेट दर्द, उल्टी और पाचन संबंधी गंभीर समस्या थी। जांच में महिला के गॉलब्लैडर में 14 x 8.3 x 4.2 सेंटीमीटर की 200 ग्राम वजन की भारी-भरकम पथरी मिली। इसे सामान्य परिस्थितियों में ओपन सर्जरी से निकालना ही संभव माना जाता है।
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ऑपरेशन को सफलतापूर्वक दिया अंजाम
विवि के गैस्ट्रो सर्जन डॉ. कन्हैया लाल चौधरी ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी पथरी को लैप्रोस्कोपिक विधि से निकालना अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। डॉ. चौधरी और उनकी टीम ने कई घंटों की कठिन सर्जरी के बाद मरीज को सुरक्षित उपचार प्रदान किया। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और तेजी से रिकवरी कर रहा है। इस उपलब्धि के बाद यूपीयूएमएस सैफई का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय सिंह ने इस सफलता पर डॉ. कन्हैया लाल चौधरी एवं उनकी टीम को बधाई दी।
विवि के गैस्ट्रो सर्जन डॉ. कन्हैया लाल चौधरी ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी पथरी को लैप्रोस्कोपिक विधि से निकालना अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। डॉ. चौधरी और उनकी टीम ने कई घंटों की कठिन सर्जरी के बाद मरीज को सुरक्षित उपचार प्रदान किया। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और तेजी से रिकवरी कर रहा है। इस उपलब्धि के बाद यूपीयूएमएस सैफई का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय सिंह ने इस सफलता पर डॉ. कन्हैया लाल चौधरी एवं उनकी टीम को बधाई दी।