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Kanpur News: दो माह में बंद हो गया एमडीआर टीबी वार्ड, लखनऊ रेफर हो रहे गंभीर क्षय रोगी
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फोटो-08- बंद पड़ा टीवी वार्ड। संवाद
हरदोई। जनपद के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में भी क्षय रोगियों के इलाज के लिए बेहतर व्यवस्थाएं नहीं हैं। करीब एक साल पहले गंभीर क्षय रोगियों के उपचार के लिए एमडीआर टीबी वार्ड शुरू किया गया था लेकिन इसमें शायद ही कोई मरीज भर्ती हुआ हो और कुछ ही दिनों में वार्ड बंद हो गया। क्षय रोगियों को अब इमरजेंसी के रेड जोन में सांस रोगियों के संग भर्ती किया जाता है वहीं गंभीर रोगियों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
सरकार भले ही टीबी मुक्त करने के लिए प्रयासरत है लेकिन मेडिकल कॉलेज में क्षय रोगियों के समुचित इलाज की व्यवस्था ही नहीं है। स्थिति यह है कि जिले की 45 लाख आबादी को सिर्फ ओपीडी की सुविधा मिल रही है लेकिन अगर कोई गंभीर क्षय रोगी को इलाज पाना होता हो तो उसे 110 किलोमीटर दूर लखनऊ के हायर सेंटरों पर जाना पड़ता है।
बता दें कि जिले में 11 जून 2025 को गंभीर क्षय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में क्षय केंद्र के पास आयुष विंग को खाली करवाकर मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) वार्ड शुरू किया गया था। वार्ड में भर्ती करके मरीज का उपचार भी किया जा रहा था लेकिन इसके दो माह बाद ही वार्ड के सामने ही ट्रॉमा सेंटर का निर्माण शुरू हो गया और वार्ड बंद कर दिया गया। अब कोई क्षय रोगी आता है तो उसे या तो लखनऊ रेफर कर दिया जाता है या फिर इमरजेंसी में सांस के रोगियों के साथ भर्ती कर दिया जाता है।
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10 बेडों के वार्ड में चार वार्ड ही आरक्षित
इमरजेंसी के रेड जोन में वैसे तो 10 वार्ड हैं लेकिन सांस के रोगियों से भरे रहते हैं। हालांकि चार बेड क्षय रोगियों के लिए आरक्षित किए गए हैं लेकिन कई बार स्थिति यह हो जाती है कि इन बेडों पर भी पहले से मरीज भर्ती रहते हैं। इससे मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया जाता है और चिकित्सक उन्हें तुरंत रेफर कर देते हैं।
सांस के सामान्य मरीजों की जान भी खतरे में
मेडिकल कॉलेज में आने वाले क्षय रोगियों के लिए कोई अलग वार्ड नहीं है। गंभीर रूप से खांसते और संक्रमण फैलाने की क्षमता रखने वाले इन टीबी मरीजों को इमरजेंसी के रेड जोन में सांस के सामान्य मरीजों के साथ ही भर्ती कर दिया जाता है। रेड जोन वार्ड में भर्ती टड़ियावां के हरिहरपुर निवासी सीताराम के परिजन ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को मरीज को भर्ती कराया था। बताया कि अभी तो कुछ मरीज कम हो गए हैं लेकिन बुधवार तक वार्ड काफी भरा हुआ था। सांस के मरीज अधिक भर्ती रहते हैं। ऐसे में सांस रोगियों संग क्षय रोगियों के भर्ती होने से गंभीर संक्रमण का खतरा मंडराता रहता है।
गंभीर क्षय रोगियों को रेफर किया जा रहा है। एमडीआर टीबी वार्ड को बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार हुआ है। बजट आते ही जल्द ही वार्ड बनवाया जाएगा। जो कम गंभीर मरीज होते हैं उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज दिया जाता है। -डॉ. शिवम गुप्ता, विभागाध्यक्ष, टीबी व चेस्ट रोग
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सरकार भले ही टीबी मुक्त करने के लिए प्रयासरत है लेकिन मेडिकल कॉलेज में क्षय रोगियों के समुचित इलाज की व्यवस्था ही नहीं है। स्थिति यह है कि जिले की 45 लाख आबादी को सिर्फ ओपीडी की सुविधा मिल रही है लेकिन अगर कोई गंभीर क्षय रोगी को इलाज पाना होता हो तो उसे 110 किलोमीटर दूर लखनऊ के हायर सेंटरों पर जाना पड़ता है।
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बता दें कि जिले में 11 जून 2025 को गंभीर क्षय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में क्षय केंद्र के पास आयुष विंग को खाली करवाकर मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) वार्ड शुरू किया गया था। वार्ड में भर्ती करके मरीज का उपचार भी किया जा रहा था लेकिन इसके दो माह बाद ही वार्ड के सामने ही ट्रॉमा सेंटर का निर्माण शुरू हो गया और वार्ड बंद कर दिया गया। अब कोई क्षय रोगी आता है तो उसे या तो लखनऊ रेफर कर दिया जाता है या फिर इमरजेंसी में सांस के रोगियों के साथ भर्ती कर दिया जाता है।
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10 बेडों के वार्ड में चार वार्ड ही आरक्षित
इमरजेंसी के रेड जोन में वैसे तो 10 वार्ड हैं लेकिन सांस के रोगियों से भरे रहते हैं। हालांकि चार बेड क्षय रोगियों के लिए आरक्षित किए गए हैं लेकिन कई बार स्थिति यह हो जाती है कि इन बेडों पर भी पहले से मरीज भर्ती रहते हैं। इससे मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया जाता है और चिकित्सक उन्हें तुरंत रेफर कर देते हैं।
सांस के सामान्य मरीजों की जान भी खतरे में
मेडिकल कॉलेज में आने वाले क्षय रोगियों के लिए कोई अलग वार्ड नहीं है। गंभीर रूप से खांसते और संक्रमण फैलाने की क्षमता रखने वाले इन टीबी मरीजों को इमरजेंसी के रेड जोन में सांस के सामान्य मरीजों के साथ ही भर्ती कर दिया जाता है। रेड जोन वार्ड में भर्ती टड़ियावां के हरिहरपुर निवासी सीताराम के परिजन ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को मरीज को भर्ती कराया था। बताया कि अभी तो कुछ मरीज कम हो गए हैं लेकिन बुधवार तक वार्ड काफी भरा हुआ था। सांस के मरीज अधिक भर्ती रहते हैं। ऐसे में सांस रोगियों संग क्षय रोगियों के भर्ती होने से गंभीर संक्रमण का खतरा मंडराता रहता है।
गंभीर क्षय रोगियों को रेफर किया जा रहा है। एमडीआर टीबी वार्ड को बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार हुआ है। बजट आते ही जल्द ही वार्ड बनवाया जाएगा। जो कम गंभीर मरीज होते हैं उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज दिया जाता है। -डॉ. शिवम गुप्ता, विभागाध्यक्ष, टीबी व चेस्ट रोग

फोटो-08- बंद पड़ा टीवी वार्ड। संवाद