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इस शादी का किस्सा बन गया मिसाल, आप भी जानकर हो जाएंगे हैरान
गौरव शुक्ला, कानपुर
Updated Mon, 10 Oct 2016 02:50 PM IST
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भारत के लिये रोल मॉडल बने नवदंपति
- फोटो : संजय लोचन पांडेय
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‘अमर उजाला’ की अनूठी पहल विधवा विवाह समारोह (चार अक्तूबर) में एक दूसरे का हाथ थामने वाले रावतपुर गांव के अंकुर श्रीवास्तव और नौबस्ता की ज्योति श्रीवास्तव का जीवन फिर से खुशियों से भर गया है। शनिवार को अंकुर के घर में ज्योति की चौथी की तैयारियां ऐसे चल रहीं थीं मानो कोई त्योहार। इस काम में खुद ज्योति भी अपनी सास का हाथ बंटा रही थी। रविवार को ज्योति विदा होकर अपने मायके चली गईं। इससे अंकुर थोड़ा दुखी तो था लेकिन नई शुरुआत की खुशी उसकी आंखों में साफ देखी जा सकती थी। इसी तरह समारोह में शादी के बंधन में बंधे कर्रही के अशोक कुमार और दीपमाला, राधा विहार के अंकित और पूजा, नौबस्ता के संदीप और प्रियंका गुप्ता भी अपनी नई जिंदगी से बेहद खुश हैं। ये सभी नवदंपति कानपुर ही नहीं पूरे भारत के लिये रोल मॉडल बन चुके हैं।
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अंकुर बोले,‘हम दोनों पर किस्मत हुई मेहरबान’
सेल्फी लेते अंकुर व ज्योति
- फोटो : संजय लोचन पांडेय
आदर्श नगर रावतपुर गांव निवासी अंकुर श्रीवास्तव पेशे से एक जूनियर कंस्ट्रक्शन मैनेजर हैं। अंकुर के पिता सुरेश चंद्र और बड़े भाई अमित प्राइवेट नौकरी करते हैं। पांच साल पहले अंकुर की शादी आयुषि से हुई थी। एक साल बाद बेटे आदि का जन्म होते ही घर में खुशियां तो आईं लेकिन ठीक चार महीने बाद आयुषि की सड़क दुर्घटना में मौत होने से घर का सुकून मातम में तब्दील हो गया। अंकुर टूट से गये थे। पुनर्विवाह के बाद अंकुर का जीवन बदल गया है खुशियां फिर से लौट आई हैं। अंकुर ने कहा कि हम दोनों पर किस्मत मेहरबान हुई है। बेटे आदि (अंकुर का बेटा) और हर्षित (ज्योति का बेटा) का बेहतर भविष्य बनाने के लिये हम मिलजुलकर काम करेंगे। ज्योति ने कहा कि कभी लगता नहीं था कि मेरा परिवार फिर से बसेगा। अमर उजाला ने ‘बाबुल’ बनकर मुझे विदा किया और लैंडमार्क जैसे वीआईपी होटल में मेरी शादी कराई। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुझे आशीर्वाद देंगे यह कभी सोचा ही नहीं था। अंकुर के चार वर्षीय बेटे आदि को मां के रूप में नया दोस्त मिल गया है।
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अंकुर के दादा बोले,‘लोग समर्थन करें समाज में कई बदलाव आयेंगे’
अंकुर के दादा फतेहबहादुर ने कहा समाज में बदलाव जरूरी
- फोटो : संजय लोचन पांडेय
अंकुर के दादा फतेहबहादुर श्रीवास्तव बहू ज्योति के आने से खुश हैं। कहा कि पहले विधवाओं को बेसहारा छोड़ दिया जाता था। अधिकतर विधवाओं का जीवन चहारदीवारी के भीतर घुट-घुटकर गुजर जाता था। लेकिन अब जो बदलाव आया है उससे समाज को एक नई दिशा मिलेगी। महिला-पुरुष को समान अधिकार मिलना चाहिये। समाज में और बदलावों की जरूरत है। अंकुर और ज्योति दोनों ने आपसी सामंजस्य से एक दूसरे का हाथ थाम कर हिंदू समाज को एक नया संदेश दिया है। लोग समर्थन करें समाज में कई बदलाव आयेंगे।
ज्योति की सास आशा बोलीं,‘मेरी सारी चिंतायें खत्म हो गईं’
अंकुर की मां आशा ज्योति को बहू नहीं बेटी मानती हैं
- फोटो : संजय लोचन पांडेय
ज्योति की सास और अंकुर की मां आशा श्रीवास्तव नई बहू के आने से बहुत खुश हैं। बहू की चौथी के लिये उन्होंने स्वादिष्ट पकवान बनाकर समधी-समधन के लिये तैयार किए। आशा ने कहा कि अब मेरी सारी चिंतायें खत्म हो गई हैं। ज्योति ने आते ही अपनी जिम्मेदारियां संभाल ली हैं। इसी तरह बदलावों की दिशा में बढ़-चढ़कर और लोग भी हिस्सा लें। अब जरूरत है कि लोग भविष्य के बारे में सोचें। मेरे घर में अचानक खुशियां बरस पड़ी हैं। नई नवेली बहू की मुंह दिखाई के लिये दूर-दूर से लोग आ रहे हैं।