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हिस्ट्रीशीटर ‘माननीय’ ने दिया इस्तीफा
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 06 Jan 2015 03:45 AM IST
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‘अमर उजाला’ में लगातार खुलासे के बाद समाजवादी पार्टी कानपुर ग्रामीण इकाई के नवमनोनीत हिस्ट्रीशीटर सचिव मनोज सिंह ने कार्रवाई से पहले ही सोमवार को अपना इस्तीफा जिलाध्यक्ष को दे दिया।
जिलाध्यक्ष ने महासचिव विनोद प्रजापति की हिस्ट्रीशीट सामने आने पर उनकी भी रिपोर्ट प्रदेश संगठन को कार्रवाई के लिए भेज दी है। दोनों नेताओं का आपराधिक इतिहास सामने आने के बाद से ग्रामीण संगठन में जिलाध्यक्ष का भी विरोध शुरू हो गया है।
बर्रा आठ निवासी मनोज सिंह बर्रा थाने का हिस्ट्रीशीटर है। लगभग 23 दिन पहले ही रेप के आरोप में वह जेल से बाहर आया था। ग्रामीण इकाई के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव ने उसे सचिव के पद से नवाज दिया।
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‘अमर उजाला’ ने सबसे पहले ‘सपा का सचिव कौन- डॉन, डॉन, डॉन’ शीर्षक से इसका खुलासा किया। बताया कि मनोज पर सिर्फ बर्रा थाने में ही 16 मुकदमे हैं। यह खुलासा होने के बाद सपा में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन ग्रामीण इकाई की बैठक करके मामले की जांच महासचिव विनोद प्रजापति और एक अन्य पदाधिकारी को दी गई। सोमवार के अंक में ‘अमर उजाला’ ने फिर खुलासा किया कि हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह की जांच करने वाले विनोद प्रजापति भी हिस्ट्रीशीटर हैं।
इससे सपाइयों की बोलती बंद हो गई। जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह यादव के खिलाफ विरोध के स्वर उठने लगे। जिलाध्यक्ष दागी छवि वाले नेताओं पर कोई कार्रवाई करते कि इससे पहले ही सचिव मनोज सिंह ने इस्तीफा दे दिया।
जिलाध्यक्ष ने मनोज के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि महासचिव विनोद प्रजापति की एक रिपोर्ट बनाकर प्रदेश संगठन को कार्रवाई के लिए भेज दिया।
मनोज ने मुझे आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है। महासचिव विनोद प्रजापति को प्रदेश संगठन से पद दिया गया है। इसलिए विनोद पर कार्रवाई के लिए प्रदेश संगठन को अमर उजाला की कटिंग के साथ रिपोर्ट भेज दी गई है। अब प्रदेश संगठन ही विनोद पर कार्रवाई करेगा।
- महेन्द्र सिंह यादव, जिलाध्यक्ष कानपुर ग्रामीण
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जिलाध्यक्ष ने महासचिव विनोद प्रजापति की हिस्ट्रीशीट सामने आने पर उनकी भी रिपोर्ट प्रदेश संगठन को कार्रवाई के लिए भेज दी है। दोनों नेताओं का आपराधिक इतिहास सामने आने के बाद से ग्रामीण संगठन में जिलाध्यक्ष का भी विरोध शुरू हो गया है।
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बर्रा आठ निवासी मनोज सिंह बर्रा थाने का हिस्ट्रीशीटर है। लगभग 23 दिन पहले ही रेप के आरोप में वह जेल से बाहर आया था। ग्रामीण इकाई के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव ने उसे सचिव के पद से नवाज दिया।
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‘अमर उजाला’ ने सबसे पहले ‘सपा का सचिव कौन- डॉन, डॉन, डॉन’ शीर्षक से इसका खुलासा किया। बताया कि मनोज पर सिर्फ बर्रा थाने में ही 16 मुकदमे हैं। यह खुलासा होने के बाद सपा में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन ग्रामीण इकाई की बैठक करके मामले की जांच महासचिव विनोद प्रजापति और एक अन्य पदाधिकारी को दी गई। सोमवार के अंक में ‘अमर उजाला’ ने फिर खुलासा किया कि हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह की जांच करने वाले विनोद प्रजापति भी हिस्ट्रीशीटर हैं।
इससे सपाइयों की बोलती बंद हो गई। जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह यादव के खिलाफ विरोध के स्वर उठने लगे। जिलाध्यक्ष दागी छवि वाले नेताओं पर कोई कार्रवाई करते कि इससे पहले ही सचिव मनोज सिंह ने इस्तीफा दे दिया।
जिलाध्यक्ष ने मनोज के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि महासचिव विनोद प्रजापति की एक रिपोर्ट बनाकर प्रदेश संगठन को कार्रवाई के लिए भेज दिया।
मनोज ने मुझे आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है। महासचिव विनोद प्रजापति को प्रदेश संगठन से पद दिया गया है। इसलिए विनोद पर कार्रवाई के लिए प्रदेश संगठन को अमर उजाला की कटिंग के साथ रिपोर्ट भेज दी गई है। अब प्रदेश संगठन ही विनोद पर कार्रवाई करेगा।
- महेन्द्र सिंह यादव, जिलाध्यक्ष कानपुर ग्रामीण