{"_id":"5eb704118ebc3e9025769d00","slug":"mahant-ramakant-of-panki-tample-death-city-news-knp5593485194","type":"story","status":"publish","title_hn":"पनकी मंदिर के बड़े महंत रमाकांत बाबा नहीं रहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पनकी मंदिर के बड़े महंत रमाकांत बाबा नहीं रहे
विज्ञापन
बाबा रामाकांत दास पनकी मंदिर के बड़े महंत की फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर पनकी के बड़े महंत रमाकांत बाबा ( वैरागी) का 88 वर्ष की उम्र में शनिवार को निधन हो गया। उन्हें किडनी और हृदय से संबंधित बीमारी थी। बिठूर के घाट में उन्हें पंचाग्नि दी गई। उनके उत्तराधिकारी महंत कृष्णदास महाराज, बालकदास, सुरेश दास, जितेंद्र दास रामदास और रमाकांत ने मुखाग्नि दी। लॉकडाउन के चलते कम ही लोग उनके अंतिम संस्कार में पहुंच सके।
रमाकांत बाबा पिछले 12 दिन से एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थे। शनिवार सुबह उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को पनकी मंदिर लाया गया। उनके निधन की खबर सुनकर बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे। महंत कृष्णदास महाराज ने जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी से बिठूर में अंतिम संस्कार कराने की अनुमति मांगी। इस पर 20 लोगों को ही शामिल होने की अनुमति मिली। दोपहर करीब सवा तीन बजे उनका अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधायक सुरेंद्र मैथानी, एमएलसी अरुण पाठक, महंत महामंडलेश्वर जितेंद्रदास, दिनेश वाजपेयी आदि मौजूद रहे।
देहात में जन्मे रमाकांत बाबा 12 साल की उम्र में आ गए थे मंदिर
रमाकांत बाबा का जन्म कानपुर देहात स्थित अनूपपुर गांव में हुआ था। उनके निधन की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, वहां भी शोक की लहर दौड़ गई। गांव से भी कई लोग आना चाहते थे लेकिन लॉकडाउन की वजह से नहीं आ सके। रमाकांत बाबा के भांजे दिनेश वाजपेयी ने बताया कि वे 12 साल की उम्र में ही पनकी मंदिर आ गए थे। तब से मंदिर में ही सेवा कर रहे थे। उन्होंने छोटे महंत भुवनेश्वर दास चौबे के साथ मिलकर मंदिर को दूर-दूर तक ख्याति दिलाई।
विज्ञापन
गृहस्थ जीवन में लीन महंतों को उत्तराधिकारी बनाए जाने पर हुआ था विवाद
बड़े महंत रमाकांत बाबा ने 1988 में अपना उत्तराधिकारी बालक दास को बनाया था। 2014 में छोटे महंत भुवनेश्वर दास चौबे ने निधन से पहले अपने भतीजे जितेंद्रदास को अपना उत्तराधिकारी बनाया। इसके बाद 2016 में बड़े महंत ने अपना उत्तराधिकारी सुरेश दास को बना दिया। ठीक एक साल बाद अपने भतीजे कृष्णदास महाराज को उत्तराधिकारी बना दिया। इसको लेकर विवाद हुआ था। क्योंकि मंदिर के नियमानुसार उत्तराधिकारी वही बनाया जा सकता है जो वैरागी हो लेकिन कृष्णदास महाराज और सुरेश दास दोनों ही गृहस्थ हैं।
विज्ञापन
रमाकांत बाबा पिछले 12 दिन से एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थे। शनिवार सुबह उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को पनकी मंदिर लाया गया। उनके निधन की खबर सुनकर बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे। महंत कृष्णदास महाराज ने जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी से बिठूर में अंतिम संस्कार कराने की अनुमति मांगी। इस पर 20 लोगों को ही शामिल होने की अनुमति मिली। दोपहर करीब सवा तीन बजे उनका अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधायक सुरेंद्र मैथानी, एमएलसी अरुण पाठक, महंत महामंडलेश्वर जितेंद्रदास, दिनेश वाजपेयी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
देहात में जन्मे रमाकांत बाबा 12 साल की उम्र में आ गए थे मंदिर
रमाकांत बाबा का जन्म कानपुर देहात स्थित अनूपपुर गांव में हुआ था। उनके निधन की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, वहां भी शोक की लहर दौड़ गई। गांव से भी कई लोग आना चाहते थे लेकिन लॉकडाउन की वजह से नहीं आ सके। रमाकांत बाबा के भांजे दिनेश वाजपेयी ने बताया कि वे 12 साल की उम्र में ही पनकी मंदिर आ गए थे। तब से मंदिर में ही सेवा कर रहे थे। उन्होंने छोटे महंत भुवनेश्वर दास चौबे के साथ मिलकर मंदिर को दूर-दूर तक ख्याति दिलाई।
विज्ञापन
गृहस्थ जीवन में लीन महंतों को उत्तराधिकारी बनाए जाने पर हुआ था विवाद
बड़े महंत रमाकांत बाबा ने 1988 में अपना उत्तराधिकारी बालक दास को बनाया था। 2014 में छोटे महंत भुवनेश्वर दास चौबे ने निधन से पहले अपने भतीजे जितेंद्रदास को अपना उत्तराधिकारी बनाया। इसके बाद 2016 में बड़े महंत ने अपना उत्तराधिकारी सुरेश दास को बना दिया। ठीक एक साल बाद अपने भतीजे कृष्णदास महाराज को उत्तराधिकारी बना दिया। इसको लेकर विवाद हुआ था। क्योंकि मंदिर के नियमानुसार उत्तराधिकारी वही बनाया जा सकता है जो वैरागी हो लेकिन कृष्णदास महाराज और सुरेश दास दोनों ही गृहस्थ हैं।