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Kanpur News: वेटलैंड में गजट होगी मघई झील, सैटेलाइट से हो सकेगी निगरानी

Mon, 12 Oct 2026 12:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Mon, 12 Oct 2026 12:39 AM IST
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Maghai Lake will be gazetted as a wetland and can be monitored by satellite.
कानपुर देहात। मैथा तहसील क्षेत्र में मघई झील को संरक्षण की पहल हुई है। इसे आर्द्रभूमि (वेटलैंड) में अधिसूचित करने की प्रक्रिया लगभग पूरी है। शासन की हरी झंडी मिलने पर जीआईएस मैप पर यह झील दिखने लगेगी और इसी के जरिये सैटेलाइट से निगरानी हो सकेगी।
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औनहां में सामाजिक वानिकी मनोरंजन पार्क के करीब मघई झील है। यह 8.666 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली है। यहां प्रवासी पक्षी आते हैं और वन विभाग की ओर से करीब 28 लाख रुपये से करीब दो साल पहले यहां सुंदरीकरण कराया गया है। यह स्थल ईको टूरिज्म के मुफीद है। हालांकि झील के खुले हिस्सों पर कब्जे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में झील को आर्द्रभूमि में अधिसूचित कराने का प्रस्ताव है।
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इसके लिए वन विभाग की ओर से आवश्यक कार्रवाई पूरी कर जिला कमेटी की ओर से सितंबर माह के शुरुआत में प्रस्ताव मुख्य वन संरक्षक लखनऊ को भेजा गया था। वहां से इसे वेट लैंड अधिसूचित करने के लिए शासन को भेजा गया है। जानकारों का कहना है कि पर्यावरण नियमों के तहत वेटलैंड में गजट होने और जीआईएस मैप पर दिखने से कानूनी तौर पर झील को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जा सकेगा। सैटेलाइट से निगरानी की जा सकेगी और अवैध कब्जों को रोका जा सकेगा। इससे पर्यावरण और जैव विविधता का बचाव हो सकेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए उसके प्राकृतिक महत्व को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
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ईको पर्यटन विकास के लिए मिल सकता बजट
कानपुर देहात। वेटलैंड में गजट होने से मघई झील परिसर में ईको पर्यटन विकास के लिए बजट मिलने की उम्मीद है। बता दें कि औनहां में मघई झील के पास इंदिरा गांधी वन चेतना केंद्र है। यहां करीब बीस साल पूर्व पर्यटन विकास के लिए काम कराया गया था, लेकिन आगे का बजट नहीं मिलने और देखरेख के अभाव में वन चेतना केंद्र की हरियाली गुम हो गई। बनाए गए स्टैचू आदि भी क्षतिग्रस्त हो गए। बीते तीन साल पहले यहां सुंदरीकरण और ईको पर्यटन विकास के लिए करीब दो साल पहले 1.35 करोड़ रुपये की डीपीआर शासन को भेजा है। इसके साथ ही यहां वन विभाग की पौधशाला खोली गई। शासन से 28 लाख रुपये मंजूर किए गए। इससे सुरक्षा, बैठने, नाव, गेट, पर्यटक व्याख्या केंद्र और केयर टेकर हट आदि बनाए गए। (संवाद)
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बयान....
औनहां की मघई झील को आर्द्रभूमि अधिसूचित करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जल्द ही अनुमोदन की उम्मीद है। इसके बाद यह झील जीआईएस मैप पर दिखेगी और प्रभावी तरीके से जल स्रोत संरक्षण किया जा सकेगा। इस झील के आसपास का क्षेत्र पर्यावरण पर्यटन के अनुकूल है। आगे शासन से ईको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बजट मिल सकता है। - प्रोमिला, प्रभागीय वनाधिकारी कानपुर देहात
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जानें क्या है जीआईएस मैप
जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉरमेशन सिस्टम ) मैप पर झील के दिखने से जल संरक्षण, पर्यावरण निगरानी और पर्यटन को बढ़ावा देने में बड़ी मदद मिलेगी। झील के क्षेत्रफल का सटीक सीमांकन हो सकेगा। इससे अवैध कब्जे नहीं हो सकेंगे। जल स्तर की निगरानी सैटेलाइट डेटा की मदद से हो सकेगी। समय-समय पर झील के जल स्तर और उसके सूखने या भरने के पैटर्न को देखा जा सकेगा इसके साथ ही झील के आसपास के प्रदूषण, जलकुंभी के फैलाव और जलभराव क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी। वहीं आम नागरिक और पर्यटक ऑनलाइन मैप के जरिये झील की सटीक लोकेशन, गहराई या अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से देख सकेंगे।
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इटैली झील का प्रस्ताव सत्यापन में अटका
रसूलाबाद तहसील में करीब 105.23 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली इटैली झील को वेटलैंड में गजट की तैयारी है। हालांकि अतिक्रमण की स्थिति का सत्यापन शेष है। यह झील मनावा, इटैली, माल का पुरवा, मित्रसेनपुर कहिंजरी गांवों में फैली है। यहां राजकीय पक्षी सारस काफी संख्या में पाए जाते हैं। अब यह झील वेटलैंड में गजट कराने की प्रक्रिया की जा रही है। हालांकि प्रस्ताव वास्तविक स्थिति के सत्यापन में अटका है। वनाधिकारी प्रोमिला ने बताया कि प्रस्ताव बनाकर जिला स्तरीय कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसपर डीएम ने एडीएम प्रशासन को सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी है। अब तहसील स्तर से सत्यापन कराया जाना है।

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सजरा नक्शा मिलने से अटका यमुना नदी किनारे 14 वेटलैंड का प्रस्ताव
यमुना नदी किनारे कुल 14 वेटलैंड चिह्नित किए गए हैं। इनका भौतिक सत्यापन करा लिया गया है। अमरौधा में दो , बरौली में दो, फैजुल्लापुर, भोगनीपुर, फत्तेपुर रसूलपुर, फत्तेपुर मुर्तजानगर, फत्तेपुर, जलपुरा चांदापुर, जुनैदपुर, मऊखास में लंगड़े का पुरवा, पातेपुर, सेल्हूपुर में एक-एक वेटलैंड गजट कराने की प्रक्रिया सजरा नक्शा नहीं होने से अटकी है। प्रभागीय वनाधिकारी प्रोमिला ने बताया कि लेखपालों के कार्य बहिष्कार के चलते वेटलैंड वाले गांवों के सजरा नक्शा नहीं मिल सके हैं। इसकी वजह से प्रस्ताव तैयार नहीं हो सका है।
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