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ग्राउंड रिपोर्ट: बिधूना विधानसभा सीट पर हर चुनाव में अलग नतीजा, बदलता ट्रेंड ले रहा इम्तिहान

Tue, 07 May 2024 05:27 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 07 May 2024 05:27 PM IST
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सार
Kannauj news: बिधूना विधानसभा सीट पर बढ़त के लिए सपा और भाजपा दोनों ने जोर लगा रखा है। पिछले पांच चुनाव में मतदाता सपा-भाजपा के बीच ही डोलते रहे हैं।
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lok sabha election, Ground Report Bidhuna Assembly Seat
बिधूना कस्बे का भगत सिंह चौराहा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीन जिलों में फैले कन्नौज संसदीय क्षेत्र शामिल औरेया जिले की बिधूना विधानसभा सीट की अलग ही अहमियत है। दो सियासी घरानों के बीच वर्चस्व की इस सीट पर बढ़त के लिए सपा और भाजपा के बीच खूब जोरआजमाइश हो रही है। नतीजा किसके हक में आएगा, यह चार जून को पता चलेगा, लेकिन उसके पहले यहां के मतदाताओं ने सियासी सूरमाओं की धुकधुकी बढ़ा रखी है। पिछले दो लोकसभा चुनाव में बढ़त बनाने वाली भाजपा विधानसभा चुनाव में इस सीट को गंवा चुकी है। सपा लोकसभा चुनाव में पिछड़ने के ट्रेंड को तोड़ने के लिए जद्दोजहद कर रही है।



बिधूना विधानसभा क्षेत्र का सियासी मिजाज और अंदाज जरा हटकर है। 2012 के विधानसभा चुनाव में यह सीट सपा के हिस्से में रही थी। भाजपा यहां मुकाबले में तीसरे नंबर पर रही। दो साल बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां सपा पर 12422 वोट की लंबी बढ़त ली थी। तीन साल बाद हुए 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सपा से यह सीट छीन ली।


हालांकि लोकसभा चुनाव के मुकाबले बढ़त कम होकर 3910 वोट की रह गई। यानी भाजपा के वोटों में 8512 की कमी आ गई। दो साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सपा पर बढ़त तो बनाई, लेकिन यह कम होकर सिर्फ 340 वोट की ही रह गई। तीन साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में सपा ने भाजपा पर बढ़त बनाते हुए 7765 वोटों से जीत हासिल कर ली। भाजपा के वोटों का ग्राफ लगातार चार चुनाव में कम होता गया है।

कांटे के मुकाबले की सीट
कन्नौत संसदीय सीट में शामिल बिधूना विधानसभा ऐसी सीट है, जहां अमूमन कांटे का मुकाबला होता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में ही यहां सपा-भाजपा के बीच लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आखिर में 340 वोटों से बाजी भाजपा के हाथ लगी। उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में सपा ने भाजपा से इस सीट को वापस झटक लिया। उसके पहले 2007 के चुनाव में सपा उम्मीदवार रहे धनीराम वर्मा ने बसपा के टिकट पर लड़े तत्कालीन विधायक विनय शाक्य को कांटे के मुकाबले में 296 वोट से हराकर अपनी सीट वापस हासिल की थी। 2107 विनय शाक्य ने पाला बदलकर भाजपा के टिकट से फिर से चुनाव जीत लिया। इस बार 3910 वोट से कामयाबी मिली। 2002 के चुनाव में धनीराम वर्मा की बहू सपा उम्मीदवार रेखा वर्मा ने विनय शाक्य की बेटी और भाजपा उम्मीदवार रिया शाक्य को हराकर यह सीट हासिल कर ली। वह इस सीट से पहली महिला विधायक बनीं। इस बार भी दोनों पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर के आसार हैं।

यहां पाला बदलने का खूब चलता है खेल
बिधूना विधानसभा क्षेत्र में पाला बदलने का खेल खूब चलता है। पिछला विधानसभा चुनाव भी इसका गवाह बना। भाजपा के विधायक रहे विनय शाक्य चुनाव के दौरान पाला बदलकर सपा में चले गए। 2017 में वह भाजपा के पाले में आए। विधायक भी बन गए। 2022 में वह फिर से पाला बदलकर सपा में आ गए। उनके भाई देवेश शाक्य ने सपा से टिकट मांगा, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। वहीं, भाजपा ने विनय शाक्य की बेटी रिया शाक्य को उम्मीदवार बना दिया। सपा ने देवेश शाक्य को एटा लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है।

अखिलेश, योगी दोनों लगा चुके जोर
बिधूना के बदलते सियासी माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए हर कोई जतन करने में लगा है। इस सीट की सियासी चुनौती से निपटने के लिए भाजपा ने वहां पूरा जोर लगा रखा है। अखिलेश यादव ने भी नामांकन के बाद पहले रोडशो में रसूलाबाद के इसी विधानसभा का रुख किया था। बसपा उम्मीदवार इमरान बिन जफर भी क्षेत्र में खुद ही पहुंचकर अपनी दस्तक दे रहे हैं।

 

मुद्दों की बातों से सभी बेखबर
बिधूना कस्बे में रोडवेज बस स्टैंड बना है, लेकिन वहां कोई भी बस नहीं जाती है। अड्डे पर जाने के बजाए बसें बाहर से ही निकल जाती हैं। मुसाफिरों को सड़क किनारे खड़ा होकर ही इंतजार करना होता है। इसी तरह बेला, सहार, एरवा-कटरा और अछल्दा के लोग भी इलाकाई समस्याओं से जूझ रहे हैं। चुनाव में उनके मुद्दों के बजाए नेता सिर्फ सियासी तीर चला रहे हैं।

पिछले दो लोकसभा चुनाव में मिले वोट
- 2014 में सपा को 75656 वोट, भाजपा को 88078 वोट, बसपा को 29022 वोट मिले
- 2019 में सपा को 106025 वोट, भाजपा को 106365 वोट, बसपा चुनाव नहीं लड़ी

पिछले तीन विधानसभा चुनाव में मिले वोट
- 2022 में सपा को 97257 वोट, भाजपा को 89492 वोट, बसपा को 32220 वोट मिले
- 2017 में सपा को 77995 वोट, भाजपा को 81905 वोट, बसपा को 53366 वोट मिले
- 2012 में सपा को 72226 वोट, भाजपा को 43891 वोट, बसपा को 54120 वोट मिले

 

बिधूना के वोटर
कुल वोटर: 367576
पुरुष: 200261
महिला: 167290
थर्ड जेंडर: 25

इनके हवाले है दारोमदार
सपा से विधायक रेखा वर्मा का घराना इलाके में सियासी रसूख हासिल किए है। उनके ससुर धनीराम वर्मा इसी सीट से पांच बार विधायक रहे हैं। लोधी बिरादरी में इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। संसदीय सीट से सपा के खेमे में एकमात्र विधायक हैं। तिर्वा में रानी अवंती बाई प्रकरण के दौरान सपा ने इन्हें आगे कर समाज को साधने का जिम्मा दे रखा है। वह सपा सरकार में हुए काम को लेकर जनता के बीच पहुंच रही हैं।

पिछला विधानसभा चुनाव मजबूती से लड़ने वाली रिया शाक्य कामयाबी न मिलने के बाद भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। विधानसभा में वह सांसद सुब्रत पाठक की प्रतिनिधि के रूप में जनता के बीच रहती हैं। इनके पिता विनय शाक्य दो बार इसी सीट से विधायक रहे हैं। रिया केंद्र व प्रदेश सरकार की योजना के साथ जनता के बीच पार्टी के लिए समर्थन जुटाने में लगी हैं।
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