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छलका बेटी का दर्द, बोली- लॉकडाउन की वजह से मां के अंतिम संस्कार में झारखंड नहीं जा पाई
Fri, 03 Apr 2020 01:31 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 03 Apr 2020 01:31 PM IST
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पूनम ओझा
- फोटो : अमर उजाला
देश में लॉकडाउन की वजह से कानपुर में रहने वाली एक बेटी अपनी मां के अंतिम दर्शन करने के लिए बोकारो (झारखंड) नहीं जा सकीं। मां की मौत की सूचना मिलने पर बेटी ने घर पर ही उन्हें यादकर आंसू बहा लिए। मामला बर्रा विश्व बैंक का है।
बर्रा विश्वबैंक बैंक निवासी पूनम ओझा की मां श्यामा अवस्थी झारखंड के बोकारो स्टील सिटी में रहती थी। गुरुवार को उनके निधन की सूचना मिली। पूनम कहती है कि सूचना तो मिल गई, लेकिन वहां जाना संभव नहीं हो पाया। ट्रेनें या बस की सुविधा थी नहीं।
अपनी गाड़ी से भी जाते तो परमिशन कैसे मिलती। वैसे भी बार्डर पर रोके जाने की कई खबरें पढ़ रही थी। ऐसी स्थिति में वहां जाना टाल दिया। यह बेहद पीड़ादायक था कि अपनी मां को अंतिम बार देख भी नहीं पाई। पूनम ने कहा कि उनकी मां-पिता और भाई ही केवल बोकारो में रहते हैं, शेष पूरे रिश्तेदार यहीं कानपुर और लखनऊ में ही रहते हैं।
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कोई भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। बोकारो में भी केवल पांच लोगों को ही घाट पर जाने की परमिशन मिली। पूनम कहती हैं कि हमेशा के लिए यह टीस रह गई कि अपनी मां को अंतिम बार नहीं देख पाई।
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बर्रा विश्वबैंक बैंक निवासी पूनम ओझा की मां श्यामा अवस्थी झारखंड के बोकारो स्टील सिटी में रहती थी। गुरुवार को उनके निधन की सूचना मिली। पूनम कहती है कि सूचना तो मिल गई, लेकिन वहां जाना संभव नहीं हो पाया। ट्रेनें या बस की सुविधा थी नहीं।
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अपनी गाड़ी से भी जाते तो परमिशन कैसे मिलती। वैसे भी बार्डर पर रोके जाने की कई खबरें पढ़ रही थी। ऐसी स्थिति में वहां जाना टाल दिया। यह बेहद पीड़ादायक था कि अपनी मां को अंतिम बार देख भी नहीं पाई। पूनम ने कहा कि उनकी मां-पिता और भाई ही केवल बोकारो में रहते हैं, शेष पूरे रिश्तेदार यहीं कानपुर और लखनऊ में ही रहते हैं।
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कोई भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। बोकारो में भी केवल पांच लोगों को ही घाट पर जाने की परमिशन मिली। पूनम कहती हैं कि हमेशा के लिए यह टीस रह गई कि अपनी मां को अंतिम बार नहीं देख पाई।