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lockdown in UP: उजाले के सन्नाटे पर पानी फेरता अंधेरे का मेला, हजारों की भीड़ रोज दे रही मौत को दावत

Mon, 13 Apr 2020 03:34 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई
आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 13 Apr 2020 03:34 AM IST
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lockdown in UP: thousands of lives are playing with death every night
लॉकडाउन के दौरान मंडी में मौजूद हजारों की भीड़ - फोटो : amar ujala

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग को एक अहम अस्त्र माना जा रहा है। दिन का उजाला पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की सख्ती के बीच सन्नाटे में ही गुजरता है, लेकिन कुछ जगहों पर रात के अंधेरे में सन्नाटे को चीरता हुआ लगने वाला मेला उजाले के सन्नाटे पर पानी फेरता दिखता है। फल और सब्जी मंडी आधी रात के बाद दो बजे से ही गुलजार हो जाती है और खरीद फरोख्त की अंधी दौड़ में कोरोना से बचाव को बताए गए सोशल डिस्टेंसिंग के फॉर्मूले की धज्जियां उड़ती नजर आती हैं। पेश है एक रिपोर्ट।

 

lockdown in UP: thousands of lives are playing with death every night
रात दो बजे से सुबह चार बजे तक होती है हजारों की भीड़ - फोटो : amar ujala

ग्रामीण इलाकों से सब्जी बेचने आते हैं किसान
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिला मुख्यालय से चारों तरफ लगभग 35 किलोमीटर की दूरी तक वाले इलाकों में होने वाली सब्जी की खेती की खपत जिला मुख्यालय की सब्जी मंडी में होती है। टड़ियावां, बालामऊ, बघौली, पिहानी, गोपामऊ आदि स्थानों से सब्जी बेचने के लिए लोग आधी रात में घरों से निकलते हैं और दो बजते-बजते सब्जी मंडी पहुंच जाते हैं। सब्जी मंडी में व्यापारियों से लेकर किसानों तक की भीड़ उमड़ती है और इस भीड़ के बीच सोशल डिस्टेंसिंग जैसा कुछ भी नजर नहीं आता।
 

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मंडी में रोज रात को लगती है हजारों की भीड़ - फोटो : amar ujala

तो क्या रात में नहीं संक्रमण का खतरा
आधी रात के बाद एक बजे से व्यापारियों का पहुंचना सब्जी मंडी में शुरू हो जाता है और दो बजे से किसान भी बड़ी संख्या में मंडी आ जाते हैं। इसके अलावा फुटकर में सब्जी बेचने वाले दुकानदारों की भीड़ भी मंडी में पहुंचना शुरू हो जाती है। इस पूरे व्यापार के दौरान सोशल डिस्टेसिंग का ख्याल कहीं नहीं रखा जाता। क्या दुकानदार, क्या व्यापारी और क्या किसान, होड़ में एहतियात बरतना बिल्कुल भूल जाते हैं। तड़के तीन बजे मंडी के हालात देखकर लगता है कि शायद इन लोगों को यह गलतफहमी है कि रात में संक्रमण का खतरा नहीं है।
 

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लॉकडाउन है या मजाक - फोटो : amar ujala

एहतियात के नाम पर कुछ मास्क और गमछे
सब्जी मंडी में उमड़ने वाली भीड़ में एहतियात के नाम पर सोशल डिस्टेसिंग तो कहीं दिखती नहीं, लेकिन मास्क और गमछे का उपयोग करते हुए लोग जरूर दिखाई देते हैं। यह बात और है कि यहां मंडी में तैनात प्राइवेट सुरक्षाकर्मी मास्क और गमछे के बिना ही ड्यूटी करते नजर आते हैं, लेकिन कैमरे का फ्लैश चमकते ही मुंह छिपा लेते हैं।
 

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सब्जी ले जाते किसान - फोटो : amar ujala
वाहनों की भीड़ भी तोड़ देती सन्नाटा
मंडी के अंदर ही नहीं बाहर भी लॉकडाउन का सन्नाटा टूटा नजर आता है। मंडी के मुख्य द्वार के बाहर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा से लेकर पिकअप डाला तक लाइन से लगे नजर आते हैं। मंडी के सुरक्षाकर्मी इन वाहनों के चालकों से सोशल डिस्टेंस बनाए रखने का अनुरोध करते दिखते हैं, लेकिन चालकों की मनमानी थमती नहीं।
 
चार से सात बजे तक मंडी खुलने का है आदेश
मंडी सचिव बबलू लाल के मुताबिक मंडी खुलने के लिए सुबह चार बजे से सात बजे तक का समय निर्धारित है, लेकिन ग्रामीण इलाकों से सब्जी बेचने वाले लोग लॉकडाउन के कारण दो बजे से ही आने लगते हैं। इसलिए व्यापारी भी जल्दी आ जाते हैं।
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