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Kanpur News: हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी में स्पॉट काउंसलिंग के सहारे लेदर टेक्नोलॉजी की सीटें
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कानपुर। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी में लेदर टेक्नोलॉजी की सीटें स्पॉट काउंसलिंग के सहारे ही हैं। हर साल की तरह इस बार भी लेदर इन फैशन टेक्नोलॉजी की सीटें रेगुलर के बजाय स्पॉट काउंसलिंग से भरी हैं। 31 सीटों में से रेगुलर काउंसलिंग में मात्र दो और स्पॉट काउंसलिंग के माध्यम से 26 सीटें भरी हैं। तीन सीटें अभी भी खाली हैं।
एचबीटीयू में दो चरण में चली पांच राउंड रेगुलर और एक स्पॉट काउंसलिंग के बाद लगभग सभी सीटें भर गई हैं। मात्र लेदर इन फैशन टेक्नोलॉजी में ही तीन सीटें खाली हैं। हालांकि विवि जोसा की काउंसलिंग के बाद से एक बार और स्पॉट काउंसलिंग कराने के पक्ष में हैं।
इस पर अंतिम विचार होना बाकी है। एचबीटीयू में रेगुलर काउंसलिंग में पेंट, फूड ऑयल के अलावा लेदर टेक्नोलॉजी की परफार्मेंस काफी खराब रहती है। स्पॉट काउंसलिंग के दौरान ही छात्र सक्रिय होते हैं और लगभग सभी ब्रांच भर जाती है।
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विवि सूत्रों की माने तो पहले साल अच्छी परफार्मेंस देने पर छात्रों के पास दूसरे साल ब्रांच बदलने का मौका होता है। यही वजह है कि अंत तक प्रयास करने के बाद फिर छात्र बची सीटों पर दाखिला ले लेते हैं। पिछली कुछ सालों से कम से तीन से चार छात्र अपनी ब्रांच बदलने में सफल हो जाते हैं।
इसके अलावा सरकार लेदर पर काफी फोकस कर रही है। यहां का प्लेसमेंट भी बेहतर जाता है। साथ ही इस बार से लेदर इन फैशन टेक्नोलॉजी को भी शामिल किया गया है। जिसके प्रभाव में भी कई छात्र आएं हैं।
डीन एकेडमिक्स प्रो. ललित कुमार सिंह ने कहा कि यह सही है कि लेदर की अधिकतर सीटें स्पॉट काउंसलिंग से भरती हैं। लेदर के प्रति छात्रों की विचारधारा बदली है। सरकार भी लेदर को काफी प्रमोट कर रही है। लेदर टेक्नोलॉजी में प्रवेश लेने के वाले कुछ छात्र ही अगले साल सीटें बदल पाते हैं। अभी तीन सीटें बची हैं। दूसरे राउंड की स्पॉट काउंसलिंग होगी या नहीं इस पर जल्द ही निर्णय होगा।
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एचबीटीयू में दो चरण में चली पांच राउंड रेगुलर और एक स्पॉट काउंसलिंग के बाद लगभग सभी सीटें भर गई हैं। मात्र लेदर इन फैशन टेक्नोलॉजी में ही तीन सीटें खाली हैं। हालांकि विवि जोसा की काउंसलिंग के बाद से एक बार और स्पॉट काउंसलिंग कराने के पक्ष में हैं।
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इस पर अंतिम विचार होना बाकी है। एचबीटीयू में रेगुलर काउंसलिंग में पेंट, फूड ऑयल के अलावा लेदर टेक्नोलॉजी की परफार्मेंस काफी खराब रहती है। स्पॉट काउंसलिंग के दौरान ही छात्र सक्रिय होते हैं और लगभग सभी ब्रांच भर जाती है।
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विवि सूत्रों की माने तो पहले साल अच्छी परफार्मेंस देने पर छात्रों के पास दूसरे साल ब्रांच बदलने का मौका होता है। यही वजह है कि अंत तक प्रयास करने के बाद फिर छात्र बची सीटों पर दाखिला ले लेते हैं। पिछली कुछ सालों से कम से तीन से चार छात्र अपनी ब्रांच बदलने में सफल हो जाते हैं।
इसके अलावा सरकार लेदर पर काफी फोकस कर रही है। यहां का प्लेसमेंट भी बेहतर जाता है। साथ ही इस बार से लेदर इन फैशन टेक्नोलॉजी को भी शामिल किया गया है। जिसके प्रभाव में भी कई छात्र आएं हैं।
डीन एकेडमिक्स प्रो. ललित कुमार सिंह ने कहा कि यह सही है कि लेदर की अधिकतर सीटें स्पॉट काउंसलिंग से भरती हैं। लेदर के प्रति छात्रों की विचारधारा बदली है। सरकार भी लेदर को काफी प्रमोट कर रही है। लेदर टेक्नोलॉजी में प्रवेश लेने के वाले कुछ छात्र ही अगले साल सीटें बदल पाते हैं। अभी तीन सीटें बची हैं। दूसरे राउंड की स्पॉट काउंसलिंग होगी या नहीं इस पर जल्द ही निर्णय होगा।