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Kanpur News: यू-ट्यूब से सीख बनाई जैविक खाद, लहलहा रही फसल
Mon, 10 Feb 2025 12:54 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 10 Feb 2025 12:54 AM IST
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रूरा। नगर के एक किसान ने रासायनिक खाद को त्याग कर यूट्यूब से सीखकर खुद जैविक खाद तैयार की। उन्होंने तीन बीघे लाही व एक बीघे खेत में आलू की फसल बनाई खाद प्रयोग कर तैयार की है। लाही काटने के बाद एक विस्वा में तैयार की गई प्याज की बेड की रोपाई करेंगे।
मूलरूप से कन्नौज के सौरिख निवासी अनिल गुप्ता की ससुराल रोशनमऊ में है। एक साल से वह गांव छोड़कर रूरा नगर में किराए पर कमरा लेकर रहे। उन्होंने घर से दूर रहकर कमाने से अच्छा हुनरमंद बनकर खेती करने का निश्चय किया। पहले यू ट्यूब से जैविक खाद बनाने का तरीका सीखा। रूरा में उन्होंने 4 बीघा खेत बलकट पर लिया है। इसमें 60 हजार रुपये निवेश किए। इसके बाद बीस हजार रुपये की लागत से तैयार जैविक खाद का प्रयोग फसल पर किया। तीन बीघा में लाही व एक बीघा में आलू की फसल लहलहा रही है इससे वह उत्साहित हैं।
सिंचाई व मजदूरी में करीब 20 हजार रुपये का व्यय और हुआ है। अनिल ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब की मदद से स्वयं जैविक फसल तैयार की है। जैविक खाद से उनकी फसल में एक भी कीड़ा नहीं लगा है। फसल को ओस व सर्दी से बचाने के लिए तिरपाल व टट्टर लगाया है। उनके खेतों खड़ी फसल पक कर तैयार होने को है। करीब 22 क्विंटल लाही और 50 क्विंटल आलू उत्पादन का अनुमान है। इसतरह से करीब 1.60 लाख रुपये मुनाफा का अनुमान है। जबकि प्याज की फसल तैयार होने पर मुनाफा में वृद्धि होगी।
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इस तरह बनाई जैविक खाद
अनिल कहते हैं क गाय व भैस के गोबर को इकठ्ठा करके कुछ दिनों के लिए धूप में डाल देते हैं। हल्का सूखने पर उसने आठ दिनों पहले से फूल रहा सड़ा मठ्ठा, नीम की पत्ती का रस, चूना, पानी में फूला हुआ गुड़ का रस व दस फीट गहरे गड्ढे की मिट्टी आदि को एक साथ मिलाकर फसलों में प्रयोग करते हैं। फसल में कही भी कीड़ा नहीं लगा है।
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मूलरूप से कन्नौज के सौरिख निवासी अनिल गुप्ता की ससुराल रोशनमऊ में है। एक साल से वह गांव छोड़कर रूरा नगर में किराए पर कमरा लेकर रहे। उन्होंने घर से दूर रहकर कमाने से अच्छा हुनरमंद बनकर खेती करने का निश्चय किया। पहले यू ट्यूब से जैविक खाद बनाने का तरीका सीखा। रूरा में उन्होंने 4 बीघा खेत बलकट पर लिया है। इसमें 60 हजार रुपये निवेश किए। इसके बाद बीस हजार रुपये की लागत से तैयार जैविक खाद का प्रयोग फसल पर किया। तीन बीघा में लाही व एक बीघा में आलू की फसल लहलहा रही है इससे वह उत्साहित हैं।
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सिंचाई व मजदूरी में करीब 20 हजार रुपये का व्यय और हुआ है। अनिल ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब की मदद से स्वयं जैविक फसल तैयार की है। जैविक खाद से उनकी फसल में एक भी कीड़ा नहीं लगा है। फसल को ओस व सर्दी से बचाने के लिए तिरपाल व टट्टर लगाया है। उनके खेतों खड़ी फसल पक कर तैयार होने को है। करीब 22 क्विंटल लाही और 50 क्विंटल आलू उत्पादन का अनुमान है। इसतरह से करीब 1.60 लाख रुपये मुनाफा का अनुमान है। जबकि प्याज की फसल तैयार होने पर मुनाफा में वृद्धि होगी।
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इस तरह बनाई जैविक खाद
अनिल कहते हैं क गाय व भैस के गोबर को इकठ्ठा करके कुछ दिनों के लिए धूप में डाल देते हैं। हल्का सूखने पर उसने आठ दिनों पहले से फूल रहा सड़ा मठ्ठा, नीम की पत्ती का रस, चूना, पानी में फूला हुआ गुड़ का रस व दस फीट गहरे गड्ढे की मिट्टी आदि को एक साथ मिलाकर फसलों में प्रयोग करते हैं। फसल में कही भी कीड़ा नहीं लगा है।