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बदलेगा लैंडयूज, लखनपुर में बनेंगे फ्लैट
अमर उजाला ब्यूरो कानपुर
Updated Wed, 25 May 2016 01:18 AM IST
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आदर्श त्रिपाठी
कानपुर। शहर के रीयल एस्टेट सेक्टर में नए चलन की शुरुआत की तैयारी है। सेक्टर में मंदी से हिले बिल्डरों को कामर्शियल की बजाय रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट में निवेश फायदे का सौदा लग रहा है। लखनपुर में कामर्शियल लैंडयूज (मॉल-मल्टीप्लेक्स) वाले प्लाट का लैंडयूज रेजिडेंशियल में बदलने का आवेदन केडीए में किया गया है। केडीए के सीएटीपी आशीष शिवपुरी ने बताया कि आवेदन को शासन की मंजूरी मिल गई है। लैंडयूज चेंज पर एक आपत्ति आई है, जिसकी सुनवाई 31 मई को केडीए में होगी। आपत्ति का निराकरण होने के बाद करीब 10 हजार वर्गमीटर जमीन का लैंडयूज रेजिडेंशियल हो जाएगा। यहां ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाया जा सकेगा।
आमतौर पर कामर्शियल लैंडयूज वाली जमीन रेजिडेेंशियल की तुलना में महंगी और फायदेमंद मानी जाती है। आबादी के बीच रेजिडेंशियल और कामर्शियल दोनों की समान वैल्यू होती है। हालांकि कामर्शियल लैंडयूज के नियम-कायदे बदल जाते हैं। इसका नक्शा पास कराने में कई मानकों को पूरा करना होता है। रीयल एस्टेट सेक्टर के जानकार यजुवेंद्र सिंह के मुताबिक कामर्शियल लैंडयूज पर टैक्स लाइबिलिटी भी बढ़ जाती हैं। रीयल एस्टेट सेक्टर की मंदी के चलते बिल्डरों की कोशिश है कि नियमों के चक्कर में उलझने की बजाय कम लागत और सहजता से पूरे होने वाले प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाए। डिमांड के मुताबिक भी बिल्डर लैंडयूज चेंज करा रहे हैं।
मॉडल सिटी का रास्ता साफ, स्मार्ट की दौड़ जारी
इलाहाबाद/कानपुर (ब्यूरो)। इंद्रानगर स्थित समाज कल्याण विभाग की जमीन पर मेट्रो की मॉडल सिटी बसने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने मॉडल सिटी के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। अब 100 एकड़ जमीन पर मॉडल सिटी बसाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। दूसरी ओर, कानपुर को स्मार्ट सिटी में शामिल कराने के लिए फिलहाल तैयारियां जारी हैं। 21 जून तक नगर निगम को केंद्र सरकार के पास डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भेजनी है। मेट्रो मॉडल सिटी के लिए प्रस्तावित जमीन पर काबिज 50 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। केडीए के एडवोकेट अनूप त्रिवेदी ने बताया कि प्रकाश नारायण सहित 50 लोगों ने याचिका दाखिल कर मेट्रो रेल के डीपीआर और प्रोजेक्ट को चुनौती दी थी। कहा गया कि सरकार ने 100 एकड़ भूमि ट्राइब समूह को वहां बसाने के लिए दी थी। जमीन समाज कल्याण विभाग के पास थी, जिसे सरकार ने अब मेट्रो प्रोजेक्ट को दे दिया है। केडीए की ओर से याचिका का विरोध किया गया। कोर्ट ने कहा कि याचीगण चाहें तो मामला सिविल कोर्ट के सामने ले जा सकते हैं। इस प्रकरण पर याचिका पोषणीय नहीं है। इससे पहले भी इसी मामले पर हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज की जा चुकी है। दूसरी ओर शहर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल कराने के लिए नगर निगम में तैयारियां जारी हैं। स्मार्ट सिटी चयन के लिए कानपुर दूसरे चरण की दौड़ में शामिल है। 21 जून तक केंद्र सरकार को डीपीआर भेजने के लिए अधिकारी तैयारी में जुटे हैं। दो क्षेत्रों के चयन के लिए वोटिंग प्रक्रिया जारी है।
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कानपुर। शहर के रीयल एस्टेट सेक्टर में नए चलन की शुरुआत की तैयारी है। सेक्टर में मंदी से हिले बिल्डरों को कामर्शियल की बजाय रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट में निवेश फायदे का सौदा लग रहा है। लखनपुर में कामर्शियल लैंडयूज (मॉल-मल्टीप्लेक्स) वाले प्लाट का लैंडयूज रेजिडेंशियल में बदलने का आवेदन केडीए में किया गया है। केडीए के सीएटीपी आशीष शिवपुरी ने बताया कि आवेदन को शासन की मंजूरी मिल गई है। लैंडयूज चेंज पर एक आपत्ति आई है, जिसकी सुनवाई 31 मई को केडीए में होगी। आपत्ति का निराकरण होने के बाद करीब 10 हजार वर्गमीटर जमीन का लैंडयूज रेजिडेंशियल हो जाएगा। यहां ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाया जा सकेगा।
आमतौर पर कामर्शियल लैंडयूज वाली जमीन रेजिडेेंशियल की तुलना में महंगी और फायदेमंद मानी जाती है। आबादी के बीच रेजिडेंशियल और कामर्शियल दोनों की समान वैल्यू होती है। हालांकि कामर्शियल लैंडयूज के नियम-कायदे बदल जाते हैं। इसका नक्शा पास कराने में कई मानकों को पूरा करना होता है। रीयल एस्टेट सेक्टर के जानकार यजुवेंद्र सिंह के मुताबिक कामर्शियल लैंडयूज पर टैक्स लाइबिलिटी भी बढ़ जाती हैं। रीयल एस्टेट सेक्टर की मंदी के चलते बिल्डरों की कोशिश है कि नियमों के चक्कर में उलझने की बजाय कम लागत और सहजता से पूरे होने वाले प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाए। डिमांड के मुताबिक भी बिल्डर लैंडयूज चेंज करा रहे हैं।
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मॉडल सिटी का रास्ता साफ, स्मार्ट की दौड़ जारी
इलाहाबाद/कानपुर (ब्यूरो)। इंद्रानगर स्थित समाज कल्याण विभाग की जमीन पर मेट्रो की मॉडल सिटी बसने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने मॉडल सिटी के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। अब 100 एकड़ जमीन पर मॉडल सिटी बसाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। दूसरी ओर, कानपुर को स्मार्ट सिटी में शामिल कराने के लिए फिलहाल तैयारियां जारी हैं। 21 जून तक नगर निगम को केंद्र सरकार के पास डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भेजनी है। मेट्रो मॉडल सिटी के लिए प्रस्तावित जमीन पर काबिज 50 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। केडीए के एडवोकेट अनूप त्रिवेदी ने बताया कि प्रकाश नारायण सहित 50 लोगों ने याचिका दाखिल कर मेट्रो रेल के डीपीआर और प्रोजेक्ट को चुनौती दी थी। कहा गया कि सरकार ने 100 एकड़ भूमि ट्राइब समूह को वहां बसाने के लिए दी थी। जमीन समाज कल्याण विभाग के पास थी, जिसे सरकार ने अब मेट्रो प्रोजेक्ट को दे दिया है। केडीए की ओर से याचिका का विरोध किया गया। कोर्ट ने कहा कि याचीगण चाहें तो मामला सिविल कोर्ट के सामने ले जा सकते हैं। इस प्रकरण पर याचिका पोषणीय नहीं है। इससे पहले भी इसी मामले पर हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज की जा चुकी है। दूसरी ओर शहर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल कराने के लिए नगर निगम में तैयारियां जारी हैं। स्मार्ट सिटी चयन के लिए कानपुर दूसरे चरण की दौड़ में शामिल है। 21 जून तक केंद्र सरकार को डीपीआर भेजने के लिए अधिकारी तैयारी में जुटे हैं। दो क्षेत्रों के चयन के लिए वोटिंग प्रक्रिया जारी है।
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