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मुफ्त की जमीन हड़पने को सेठ जी बन गए गरीब, ऐसे खुला प्रधान का कारनामा
Thu, 27 Jun 2019 10:57 AM IST
शिखा पांडेय
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 27 Jun 2019 10:57 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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एक प्रधान ने 15 साल पहले अफसरों के साथ मिलकर कानपुर के मंधना से थोड़ा आगे जीटी रोड किनारे बेशकीमती करीब पांच बीघा पक्के (100 बिस्वा) जमीन के पट्टे फैक्ट्री मालिकों और रिश्तेदारों के नाम कर दिए। पट्टा आवंटन में गड़बड़ी की शिकायत अब एसडीएम बिल्हौर से की गई।
एसडीएम ने खुद लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार के साथ पट्टा आवंटन की जांच की। खुलासा हुआ कि यह जमीन जीटी रोड किनारे एक किमी का चक है। यह कृषि योग्य जमीन नहीं है। आवंटन के बाद भी कभी इस पर खेती नहीं की गई। कोई कब्जा भी नहीं है।
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एसडीएम ने खुद लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार के साथ पट्टा आवंटन की जांच की। खुलासा हुआ कि यह जमीन जीटी रोड किनारे एक किमी का चक है। यह कृषि योग्य जमीन नहीं है। आवंटन के बाद भी कभी इस पर खेती नहीं की गई। कोई कब्जा भी नहीं है।
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यह जमीन अपात्र धनाढ्यों, प्रधान के रिश्तेदारों को गलत तरीके से आवंटित की गई। एसडीएम ने 22 मई को जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट देते हुए आवंटन निरस्त करने की संस्तुति कर दी।
एक को सुनवाई
एसडीएम की रिपोर्ट के बाद पट्टे निरस्त करने के लिए जिलाधिकारी की कोर्ट में मुकदमा दाखिल हुआ। यह मुकदमा जिलाधिकारी कोर्ट ने सुनवाई के लिए एडीएम फाइनेंस की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था। इस पर सुनवाई शुरू हो गई है। सुनवाई की अगली तारीख एक जुलाई लगी है।
एक को सुनवाई
एसडीएम की रिपोर्ट के बाद पट्टे निरस्त करने के लिए जिलाधिकारी की कोर्ट में मुकदमा दाखिल हुआ। यह मुकदमा जिलाधिकारी कोर्ट ने सुनवाई के लिए एडीएम फाइनेंस की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था। इस पर सुनवाई शुरू हो गई है। सुनवाई की अगली तारीख एक जुलाई लगी है।
करोड़ों रुपये के वारे न्यारे होते
एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि गलत तरीके से आवंटित जमीन जीटी रोड (राष्ट्रीय राज मार्ग) के किनारे है। इसलिए भविष्य में इसका अधिग्रहण होने की संभावना है। निकट भविष्य में भूमि का अधिग्रहण करने पर सरकार को काफी राजस्व के नुकसान की आशंका है। मालूम हो कि अधिग्रहण करने पर जमीन की कीमत का चार गुना मुआवजा मिलता है।
एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि गलत तरीके से आवंटित जमीन जीटी रोड (राष्ट्रीय राज मार्ग) के किनारे है। इसलिए भविष्य में इसका अधिग्रहण होने की संभावना है। निकट भविष्य में भूमि का अधिग्रहण करने पर सरकार को काफी राजस्व के नुकसान की आशंका है। मालूम हो कि अधिग्रहण करने पर जमीन की कीमत का चार गुना मुआवजा मिलता है।
अपात्रों को पट्टे करने की शिकायत के बाद जांच की गई। इसके बाद जिलाधिकारी की कोर्ट में मुकदमा दाखिल करा दिया गया। जिलाधिकारी की कोर्ट से यह मुकदमा सुनवाई के लिए एडीएम फाइनेंस की कोर्ट में स्थानांतरित हो गया है। पट्टा निरस्त करने, संबंधित प्रधान और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई पर कोर्ट फैसला करेगी। फैसला आने के बाद उस पर अमल कराया जाएगा। - हिमांशु कुमार गुप्ता, एसडीएम बिल्हौर