Lal Imli: पैकेज से पहले बीआईसी करेगा अपनी संपत्तियों का मूल्यांकन, सितंबर में आ सकते हैं केंद्रीय कपड़ा मंत्री
Kanpur News: मुख्यमंत्री ने लाल इमली को शुरू कराने की घोषणा की है। इसके लिए बड़ा पैकेज भी दिया जाएगा। इससे पहले बीआईसी अपनी संपत्तियों का मूल्यांकन करेगा। 2019 में हुए मूल्यांकन में 66 एकड़ में फैली संपत्तियों की कीमत दो हजार करोड़ आंकी गई थी।
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कानपुर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लाल इमली मिल को फिर से शुरू करने की घोषणा की है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार से बड़ा पैकेज देने की भी तैयारी है। हालांकि इस पैकेज को देने से पहले बीआईसी (ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन) की सभी संपत्तियों का फिर से मूल्यांकन कराया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय कपड़ा मंत्री और बीआईसी के अफसर सितंबर में शहर आ सकते हैं। कमेटी देखेगी कि मिल चलाने के लिए किस तरह की जरूरतें हैं। इससे पहले 2019 में संपत्तियों का मूल्यांकन कराया गया था।
तब 66 एकड़ में फैली संपत्तियों की कीमत दो हजार करोड़ के करीब आंकी गई थी। लाल इमली मिल और धारीवाल बीआईसी के अधीन हैं। सिविल लांइस, मकरावटगंज, वीआईपी रोड, ग्वालटोली, खलासी लाइन में बीआईसी की मिलें और बंगले हैं। सूत्रों ने बताया कि बीआईसी की जमीन सबसे ज्यादा नजूल की हैं और ये लीज पर दी गई हैं। इनकी लीज खत्म हो रही है। इन पर जिला प्रशासन कब्जा वापस ले रहा है। इन जमीनों के ज्यादा से ज्यादा उपयोग के लिए प्रदेश सरकार, कपड़ा मंत्रालय के बीच समन्वय के साथ बातचीत भी शुरू हुई है।
लाल इमली मिल को चलाने के लिए जरूरी संसाधनों की जानकारी जुटाने के लिए अध्ययन कमेटी बनाई जाएगी, जो मिल चलाने के लिए पूंजी, मशीनरी, उत्पादों की मांग, कर्मचारियों की नियुक्ति आदि पर रिपोर्ट देगी। इसके अलावा बीआईसी की सभी संपत्तियों का मूल्यांकन भी कराया जाएगा। लाल इमली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह का कहना है कि अगले महीने केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और बीआईसी के अफसर शहर आ सकते हैं। मिल फिर चलने से नई लोगों की भी भर्तियां होंगी।
दो बार पहले भी बना रिवाइवल प्लान, बंगले बेचने में हुआ था भ्रष्टाचार
मिल चलाने के लिए पहले भी दो बार रिवाइवल प्लान लाए गए थे। पहले प्लान में बीआईसी के बंगलों की बिक्री की गई। जिसे शहर के रईसों ने खरीदा था। इसमें बीआईसी अफसरों ने रईसों से मिलीभगत करके करोड़ों के बंगले कौड़ियों के दाम में बेचे थे। 27 बंगले महज 131 करोड़ रुपये में बेचे गए थे। मौजूदा समय में इनकी कीमत एक हजार करोड़ रुपये के आसपास है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई जांच कर रही है। इसके बाद जून 2011 में दूसरा प्रस्ताव लाया गया, जो कागजों तक सीमित रहा। बाद में 2012 से लाल इमली में उत्पादन बंद कर दिया गया। 2017 में नीति आयोग भी इसे बंद करने की सिफारिश कर चुका है।
बीआईसी की सहायक कंपनी कानपुर टेक्सटाइल, एल्गिन मिल हो चुकी हैं नीलाम
बीआईसी की सहायक कंपनी कानपुर टेक्सटाइल और एल्गिन मिल की चल संपत्तियां सालों पहले नीलाम हो चुकी हैं। मिलें चलाने के लिए 1984 में अलग-अलग बैंकों से 40 लाख रुपये का लोन लिया गया था। अफसरों की मनमानी के चलते बैंक लोन बढ़कर 29 करोड़ हो गया। बाद में कोर्ट के आदेश पर कोटक महिंद्रा बैंक को लिक्विडेटर बनाया गया था। लिक्विडेटर ने कब्जे खाली कराने के साथ ही दोनों मिलों की चल संपत्तियों को 15 करोड़ से ज्यादा में नीलाम कर दिया था।