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लखपति दीदी: बसरेहर अव्वल तो सैफई रहा फिसड्डी

Tue, 22 Jul 2025 12:41 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jul 2025 12:41 AM IST
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Lakhpati Didi: Basrehar is the best while Saifai is the worst
इटावा। जिले में केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लखपति दीदी योजना से 2,910 महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। इसमें अधिक लखपति दीदी बसरेहर ब्लॉक से बनीं हैं जबकि सबसे कम सैफई ब्लाॅक से बनीं हैं। लखपति दीदी बनने वाली महिलाओं की वार्षिक पारिवारिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक हो गई है। इससे उनके जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है और परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत लखपति दीदी योजना का संचालन वर्ष 2024 से शुरू हुआ था। इस योजना का मुख्य लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। लखपति दीदी योजना के तहत जिले को 4,578 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को कई योजनाओं से जोड़कर उन्हें लाभान्वित किया गया। विभागीय अफसरों के लगातार प्रयास से 2,910 की वार्षिक आय एक लाख या इससे अधिक हो गई।
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ब्लाॅक का नाम कुल लक्ष्य कुल बनीं लखपति दीदी

बढ़पुरा 652 444



बसरेहर 818 594

भरथना 638 343



चकरनगर 297 207

जसवंतनगर 885 451



महेवा 575 482

सैफई 313 190



ताखा 400 199



लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद रोजगार स्थापित करने के लिए इन महिलाओं को 1 से 5 लाख तक का ऋण दिया जाता है, जिस पर कोई ब्याज नहीं लगता। स्वयं सहायता समूह की महिला से निर्मित वस्तुओं के लिए बाजार तक पहुंचाने और उनकी बिक्री करने में मदद की जाती है। इससे उन्हें स्वावलंबी बनने में मदद मिल सके।
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कृषि, उद्यान, डेयरी विभाग, रेशम विभाग, खाद्य विभाग, उद्योग विभाग, राज्य सड़क परिवहन विभाग व विकास विभाग की मदद से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को विभाग से संचालित योजनाओं के तहत उनका प्रशिक्षित कर उनको आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रहता है।




राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के कई विभागों का सहयोग लिया जा रहा है। इस योजना से जुड़ने के बाद स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। उनकी वार्षिक आय एक लाख या इससे अधिक हो गई। आने वालों दिनों में शेष बची महिलाओं को सशक्त बनाया जाएगा।



-राकेश प्रसाद, डीडीओ।
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