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सूदखोर ने किया इतना तंग, फांसी पर झूला मजदूर, तीन दिन से घर में नहीं जला था चूल्हा 

Thu, 27 Jul 2017 08:26 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 27 Jul 2017 08:26 AM IST
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laborer hanging on at hamirpur
परिजन रिक्शाचालक की मौत पर विलाप करते हुए - फोटो : अमर उजाला
हमीरपुर के राठ कस्बे में मकान पर सूदखोर के कब्जे और उसकी धमकी से आजिज आकर एक मजदूर  ने फांसी लगाकर जान दे दी। अपने परिवार का पेट पालने के लिए वह रिक्शा चलाता था। मजदूर की मौत से परिवार की दुनिया लुट गई है। परिजन हर हालत में सूदखोर पर कार्रवाई चाहते हैं। इस मांग को लेकर उन्होंने मोहल्ले के लोगों के साथ जाम लगा दिया।
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​तीन दिन से घर में नहीं जला था चूल्हा

laborer hanging on at hamirpur
पुलिसवाले परिजनों से पूछताछ करते हुए - फोटो : अमर उजाला
सूचना पर पहुंचे सीओ श्रीराम ने कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। कस्बे के पठानपुरा पुरानी बजरिया निवासी संतोष अनुरागी (45) पुत्र जमुना प्रसाद रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का भरण पोषण करता था। संतोष की पत्नी चुन्नी देवी ने बताया कि पति ने पुत्रियों के विवाह के लिए पिछले वर्ष नगर के मुगलपुरा मोहल्ला निवासी मलखान यादव से 60 हजार रुपये कर्ज लिया था। बताया कि पति ने किसी तरह मेहनत कर थोड़ा-थोड़ा कर ब्याज समेत एक लाख रुपये उसे लौटा दिए थे। इसके बावजूद सूदखोर उससे तकादा करता रहता था। आरोप लगाया कि 24 जुलाई को मलखान यादव ने कब्जा करने की नीयत से अपने कुछ घरेलू सामान उसके मकान में रख दिया और पति को मकान खाली करने की धमकी दी। यह भी आरोप लगाया कि कि दबंग ने 25 जुलाई को उसके घर में घुसकर पति से मारपीट भी की।

बताया कि जब पति बच्चों सहित सूदखोर के पैरों पर गिरकर गिड़गिड़ाया तब वह मकान खाली करने की बात कहते हुए वहां से चला गया। महिला का कहना है कि सूदखोर द्वारा पूरे परिवार का अपमान पति बर्दाश्त नहीं कर सका। सूदखोर की रोज-रोज की प्रताड़ना और मकान पर कब्जे के भय से आहत होकर संतोष ने बुधवार की सुबह करीब पांच बजे गमछे का फंदा बना पंखे से फांसी लगा ली। जब पत्नी और बच्चों ने पति को फंदे से लटका देख हड़कंप मच गया। संतोष ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। उधर, पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही शव मिला गुस्साए परिजनों ने हमीरपुर मार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया। परिजनों ने पांच लाख रुपये मुआवजा, मकान पर कब्जे को बेदखल कराने और सूदखोर पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। मौके पर पहुंचे सीओ श्रीराम ने परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब कहीं जाकर दो घंटे बाद जाम खुल सका। 

पत्नी चुन्नी देवी ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते उसके घर में तीन दिन से भोजन के लाले पड़े थे। सूदखोर के रोज-रोज घर आकर उत्पीड़न किए जाने से भी परिवार के सभी सदस्यों की भूख मर चुकी थी। बताया कि उसके घर में पिछले तीन दिनों से चूल्हा तक नहीं जला है। 
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मासूमों के सिर से उठा पिता का साया

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घर में मातम मनाती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
संतोष की पांच पुत्रियां और दो पुत्र हैं। उसने तीन बेटियों सीमा, सोना और अनीता का विवाह कर दिया था। दो पुत्रियां गीता व सीता अविवाहित हैं। उसके दो बेटे कल्लू और लल्लू हैं। रिक्शा चालक की मौत के बाद अब इन मासूम बच्चाें का भविष्य अंधकारमय हो गया है। पहले से ही गरीबी से जूझ रहा परिवार एकमात्र कमाऊ व्यक्ति की मौत के बाद बेसहारा हो गया है।

 
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