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लैब हुई खाली, सच-झूठ का खेल जारी
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Sun, 01 Nov 2015 02:06 AM IST
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‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद वासुदेव मिश्र उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की बायोलॉजी लैब में मिठाई बनाने का काम बंद हो गया।
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इलाहाबाद स्वीट्स हाउस के कारीगर अपना सामान और मिठाइयां गाड़ी में लाद कर विद्यालय से चले गए। लेकिन अब लैब किराए पर देने का मामला तूल पकड़ गया है। प्रिंसिपल और विद्यालय मैनेजर के बीच ठन गई है। तू-तू-मैं-मैं शुरू हो गई है। दोनों लैब किराए पर दिए जाने का आरोप एक-दूसरे पर डाल रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण का सच जानने के लिए ‘अमर उजाला’ टीम शनिवार को विद्यालय पहुंची, तो विद्यालय प्रशासन ने विद्यालय का मुख्य गेट बंद करा दिया। इलाहाबाद स्वीट्स के मालिक ने गेट बंद कराने का विरोध किया तब जाकर गेट खोला गया। टीम भीतर दाखिल हुई तो विद्यालय के सभी कमरों में ताला लगा मिला।
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कुछ लोगों ने कहा आज छुट्टी है, कुछ ने कहा कई टीचर थोड़ी देर पहले ही निकले हैं। लैब के बाहर देखा कि कारीगर गाड़ियों पर सामान लाद कर जा रहे थे। उधर, कुछ ही देर में विद्यालय में सन् 1987 से मैनेजर बने सुधीर कुमार विद्यालय के क्रीड़ा कक्ष में गृहस्थी बसाए अपने कर्मचारी रतन के साथ विद्यालय आ पहुंचे।
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रिपोर्टर ने उनसे लैब के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि ‘मुझे विद्यालय से कोई लेना-देना नहीं है। लैब बायोलॉजी विषय के टीचर उमाकांत दुबे (प्रिंसिपल) की देखरेख में है, वही इसके इंचार्ज हैं। सुधीर कुमार ने कहा कि वे सोमवार को प्रिंसिपल को नोटिस देकर जवाब मांगेंगे।
रिपोर्टर ने विद्यालय के बाहर बनी 19 दुकानों के किराये के बारे में पूछा, जवाब मिला कि उन्हें दुकानों के किराये से भी कोई मतलब नहीं है। वे सिर्फ स्कूल में जमा होने वाली बच्चों की फीस के बारे में जानते हैं। मैंने सिर्फ कोचिंग के लिए एक कमरा किराए पर दिया है।
उधर, टीम ने छुट्टी पर गए प्रिंसिपल व लैब इंचार्ज उमाकांत दुबे से बात की तो उन्होंने जवाब दिया कि लैब उन्होंने किराये पर नहीं दी। चाभी भले ही उनके पास रहती है पर, मैनेजर ने उनसे चाभी लेकर लैब किराए पर दी। प्रिंसिपल का कहना है कि मैनेजर के पास कई डुप्लीकेट चाभियां भी हैं।