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कोविंद ने जीत लिया पुखरायां का दिल

Mon, 28 Jun 2021 01:21 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jun 2021 01:21 AM IST
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Kovind wins Pukhrayan's heart
कानपुर देहात। अरे अपने कोविंद तो बिलकुल नहीं बदले। गाड़ी में बैठने के बाद जब उनकी नजर छतों में खड़े लोगों पर पड़ी तो फ्लीट चलने से पहले ही बिना कोई परवाह किए फिर नीचे उतर पड़े। हाथ जोड़कर छत पर खड़े लोगों से अभिवादन किया। कोविंद की इस सादगी ने पुखरायां की जनता का दिल जीत लिया। हर कोई उनकी सादगी का फिर कायल हो गया।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रामस्वरुप ग्रामोद्योग डिग्री कॉलेज परिसर में जनता को संबोधित करने के बाद सीधे अपने मित्र सतीश चंद्र मिश्रा के घर पहुंचे। वहां उनसे मुलाकात करने के बाद वह कड़े सुरक्षा घेरे में बाहर निकले और वहां खड़े लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए गाड़ी में बैठ गए। फ्लीट हेलीपैड की ओर बढ़ने ही वाली थी इसी बीच उनकी नजर छतों पर खड़ी महिलाओं, बच्चों समेत अन्य लोगों पर पड़ी।
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धूप में खड़े होकर अपने कोविंद की झलक पाने के लिए हर कोई बेताब था, इस बात को समझने में उन्होंने जरा भी देर नहीं लगाई। तुरंत गाड़ी से उतर कर छतों में खड़े लोगों से हाथ जोड़कर अभिवादन किया। जनता ने जवाब में उन्हें हाथ हिला कर विदा किया। गाड़ी में बैठकर चलने के बाद भी वह सुरक्षा की परवाह किए बिना छतों पर खड़े लोगों से हाथ हिलाकर कर अभिवादन करते हुए हेलीपैड की ओर गए।
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इस छोटे से घटनाक्रम के बाद पुखरायां के लोग उनकी सादगी के फिर कायल हो गए। उनके जाने के बाद हर कोई उनकी सरलता व सहजता की चर्चा करने लगा। पहले भी कोविंद ऐसे ही स्वभाव के थे और देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बाद भी उनमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
जीवन में उतार चढ़ाव आने पर नहीं होना चाहिए विचलित
रामनाथ कोविंद की कर्मस्थली पुखरायां ही रही है। राज्यसभा सदस्य रहने के दौरान वह पुखरायां के लोगों के बीच ही ज्यादा रहे। इसके बाद विधानसभा व लोकसभा चुनाव लड़ने के दौरान उन्होंने हमेशा पुखरायां में ही मुख्य कार्यालय बनाया। यह बात उन्होंने रविवार को जनता को संबोधित करने के दौरान कई बार कही। जीवन में उतार चढ़ाव के दौरान उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।

उन्होंने रविवार को एक बार फिर साबित कर दिया कि सादगी और सरलता व्यक्ति को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने संबोधन के दौरान कहा कि युवाओं को यह याद रखना चाहिए कि जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते है हमेशा एक समान रहें। अगर भटक गए तो जीवन सार्थक नहीं हो सकता। कहा व्यवहार में परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
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