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बाल सखा संग मिल बांटकर खाते थे गुड़-रोटी

Fri, 25 Jun 2021 01:45 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jun 2021 01:45 AM IST
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Kovind used to eat while sitting with a friend
डेरापुर (कानपुर देहात)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। बाल सखा ठाकुर जसवंत सिंह से उनकी गहरी दोस्ती थी। रामनाथ कोविंद स्कूल जाते समय रास्ते में बालसखा के घर के बाहर रुककर आवाज लगाते। वहां से दोनों साथ में स्कूल जाते। लंच होने पर दोनों नजदीक के बाग में जाकर बैठते और मां के हाथों से दिया गया कपड़े की पोटली में बंधा गुड-रोटी मिल बांटकर खाते।
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यादें ताजा करते हुए परौंख निवासी बाल सखा ठाकुर जसवंत सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति बचपन से ही बेहद सौम्य व कम बोलने वाले रहे। वर्ष 1951 में परौंख में राम मनोहर लोहिया आए थे। उस समय दोनों लोग कक्षा दो में पढ़ते थे। पड़ोसी होने के चलते बचपन से हम दोनों में अच्छी दोस्ती रही। एक साथ ही स्कूल जाते थे। जूनियर स्कूल छह किमी दूर खानपुर में था। दोपहर का भोजन दोनों ले जाते थे।
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इसमें अचार-पराठा, रोटी-गुड़ या कभी कभी भरवां मिर्च के साथ रोटी होती थी। स्कूल में भोजन वेला की छुट्टी होती तो नजदीक ही राजेंद्र प्रसाद के बाग के पास बने पक्के कुएं के चबूतरे पर बैठकर भोजन करते। इस दौरान मनपसंद पराठा या फिर मिर्च अचार बांट कर खाते थे। गांव से स्कूल जाने के लिए पगडंडी थी।
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कई बार तेज धूप होती तो रास्ते में लगे आम के पेड़ की छांव में सुस्ता लेते। उन्होंने बताया कि कक्षा आठ की परीक्षा के समय बाल सखा ने मन लगाकर पढ़ने की नसीहत दी थी। इस पर उन्होंने गुस्से में कह दिया था कि तुम पढ़ लिखकर डीएम बन जाना, मुझे खेती करनी है। वह डीएम से आगे निकलकर राष्ट्रपति बन गए हैं। इससे बेहद प्रसन्नता होती है।
दान कर दिए थे उपहार
वर्ष 2001 में राज्यसभा सदस्य बनने पर गांव आने पर सांसद रामनाथ कोविंद का भव्य स्वागत हुआ था। गांव के लोगों ने उन्हें 11 चांदी के मुकुट व रुपयों के हार पहनाए थे। जसवंत ने बताया कि स्वागत के बाद बाल सखा ने सारे उपहार व चांदी के मुकुट उन्हें सौंप दिए। उन्होंने कहा कि रुपये व उपहार से तुम गरीब बेटियों की शादी में मदद करना।
वकील साहब नहीं कहने का हुआ मलाल
ठाकुर जसवंत सिंह कहते हैं कि राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते थे और दिल्ली में सांसद हुकुम सिंह के आवास में रहते थे। इसी दौरान कुछ साथियों के साथ एक मुकदमे को लेकर मैं उसने मिलने गया। वहां कार्यालय में वह कुछ लोगों के साथ वार्ता कर रहे थे। मैंने बाहर मौजूद उनके सहयोगी से ठेठ गांव के लहजे में कहा कि परौंख से आया हूं और रामनाथ से मिलना है। इसके बाद सहयोगी सभी को अंदर ले गया। वहां रामनाथ कोविंद ने मामला समझा और हर संभव मदद का भरोसा दिया। इसके बाद आवभगत की। बाद में उन्हें वकील साहब न कहने का मलाल हुआ।
घर से बुलाकर दिया बेटे व बहू को आशीर्वाद
रूरा। बेटे की शादी में नहीं आ पाने पर रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल रहते रूरा आने पर बेटे व बहू को घर से बुलाकर आशीर्वाद दिया था। यह बात राष्ट्रपति से मिलने वालों की सूची में शामिल रूरा के वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद सक्सेना ने बताई।
पुरानी स्मृतियों को याद कर विनोद सक्सेना कहते हैं कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रपति ने जालौन गरौठा से दावेदारी प्रस्तुत की। इसी दौरान अकबरपुर में एक कार्यक्रम में वह भी मौजूद थे। यहां कुछ करीबियों ने गरौठा के बजाय इटावा से लोकसभा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया।

इस पर तब रामनाथ कोविंद ने कहा था कि इटावा में मुलायम सिंह यादव के सामने चुनाव लड़ना सूरज को दिया दिखाने के समान है। विनोद सक्सेना कहते हैं कि वर्ष 2015 में पुत्र अभिनव की शादी में कोविंद जी को आमंत्रित किया था, लेकिन व्यस्तता के चलते वह नहीं आ सके। 8 दिसंबर 2015 को एक कार्यक्रम में रूरा आने पर उन्होंने बेटे व बहू को बुलाकर आशीर्वाद दिया।
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