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Monkeypox: 25 से कम दाने तो मंकी पॉक्स संक्रमित मां पिला सकती दूध, इन संकेतों को जानना बेहद जरूरी

Thu, 28 Jul 2022 09:35 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 28 Jul 2022 09:35 AM IST
सार

बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव ने बताया कि चिकन पॉक्स में दाने पीठ और पेट से शुरू होते हैं और चेहरे पर बाद में आते हैं। मंकी पॉक्स में दाने मुंह से शुरू होते हैं और बाद में पेट-पीठ पर होते हैं।

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Know these things related to Monkeypox
मंकीपॉक्स संक्रमण - फोटो : istock

विस्तार

मंकी पॉक्स संक्रमित मां के शरीर में अगर 25 से कम दाने आए हैं तो वह बच्चे को दूध पिला सकती है। 25 से कम दानों तक मंकी पॉक्स का संक्रमण हल्का माना जाता है। 25 से अधिक होने पर यह संयत श्रेणी में आ जाता है और शरीर पर सौ से अधिक आने जाने पर संक्रमण को गंभीर माना जाता है।
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यह बात जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी ने मंकी पॉक्स पर आयोजित सेमिनार में बताईं। उन्होंने बताया कि गर्भवती को मंकी पॉक्स का संक्रमण होने पर गर्भस्थ शिशु में विकार हो सकते हैं। इसके साथ ही गर्भपात हो सकता है। इसके अलावा बच्चे की समय से पहले प्रसव हो सकता है।
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गर्भस्थ शिशु की मौत भी हो सकती है। सेमिनार का आयोजन हैलट परिसर स्थित मेडिसिन विभाग के सभागार में किया गया। मंकी पॉक्स के महामारी घोषित होने के बाद डॉक्टरों को रोग के संबंध में अपडेट किया जा रहा है। इस मौके पर बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव ने बताया कि चिकन पॉक्स में दाने पीठ और पेट से शुरू होते हैं और चेहरे पर बाद में आते हैं।
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मंकी पॉक्स में दाने मुंह से शुरू होते हैं और बाद में पेट-पीठ पर होते हैं। दाने चेचक से छोटे होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला थे। इस मौके पर डॉ. एसी गुप्ता, डॉ. एसके गौतम, डॉ. तनु मिड्ढा, डॉ. विशाल कुमार गु्प्ता ने मंकी पॉक्स के लक्षण, बचाव, जांचों और उपचार के संबंध में बताया।

लक्षण
- तेज बुखार 
- मांसपेशियों में दर्द, जकड़न, कमजोरी महसूस होती है
- लिम्फ नोड्स (लसीका ग्रंथियों) में सूजन आने लगती है
- संक्रमण के पांच दिनों के अंदर  चेचक जैसे निशान आ जाते हैं
- रोगी को ठंड लगती है

जटिलताएं
सेकेंडरी संक्रमण, निमोनिया, सेप्सिस, इंसेफ्लाइटिस, कार्निया का संक्रमण

ऐसे फैलता है
- संक्रमित के घावों को छू ले और हाथ साफ न करे
- संक्रमित के बिस्तर पर लेट जाए 
- संक्रमित से यौन संबंध बनाए
- झींक से निकले थूक कण शरीर पर पड़ें और साफ न करें

बचाव
- संक्रमित व्यक्ति को अलग कमरे में रखें
- संक्रमित के संपर्क में आने पर हाथ अच्छी तरह साबुन से धोएं
- संक्रमित की इस्तेमाल की हुई सामग्री को न छुएं
- मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधान का पालन करें 
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बेवजह न जाएं
- तेज बुखार, चकत्ते आने पर तुरंत अस्पताल जाएं।   
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