Kanpur: पीजीआई में इसी साल से होगा गुर्दा प्रत्यारोपण, किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए मिले 1.43 करोड़ रुपये
Kanpur News: मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि केंद्र ने धनराशि नेशनल ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रोग्राम (एनओटीपी) के तहत आवंटित की है। किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के उपकरण आदि के लिए केंद्र की संस्था हाइट्स को जिम्मेदारी देने की योजना है।
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गुर्दा रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई इंस्टीट्यूट में इसी साल से गुर्दा प्रत्यारोपण होने लगेगा। इससे गुर्दा रोगियों को दिल्ली, लखनऊ नहीं भागना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने पीजीआई की किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए एक करोड़ 43 लाख की धनराशि जारी कर दी है। इससे ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल होने वाले उपकरण आएंगे।
पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग में इस समय तीन गुर्दा रोग विशेषज्ञ हैं। साथ ही 30 बेड का वार्ड संचालित हो रहा है। विभाग में डायलिसिस यूनिट चल रही है। किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए जरूरी आधी सुविधाएं पहले से ही विभाग में उपलब्ध हैं। अब गुर्दा प्रत्यारोपण कराने वाले रोगियों के लिए अलग से आईसीयू की व्यवस्था की जाएगी। ऐसे रोगियों को संक्रमण से बचाव के लिए विशेष व्यवस्था रहती है।
विभाग के पास 30 बेड का वार्ड है
गुर्दा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी ने बताया कि एक तिहाई रोगी ऐसे होते हैं जिन्हें गुर्दा प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि विभाग में अभी 10 रोगियों की प्रतिदिन डायलिसिस हो रही है। पीजीआई में भर्ती होने वाले रोगियों की ही डायलिसिस होती है। ओपीडी में प्रतिदिन औसत 50-60 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण होता है। विभाग के पास 30 बेड का वार्ड है।
एनओटीपी के तहत आवंटित की है धनराशि
उन्होंने बताया कि क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के स्टेज-5 के एक तिहाई रोगी रहते हैं। इन रोगियों को ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। शहर के अलावा आसपास के जिलों के गुर्दा रोगी इलाज के लिए विभाग में आते हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि केंद्र ने धनराशि नेशनल ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रोग्राम (एनओटीपी) के तहत आवंटित की है। किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के उपकरण आदि के लिए केंद्र की संस्था हाइट्स को जिम्मेदारी देने की योजना है। इसी साल से गुर्दा प्रत्यारोपण होने लगेगा।
गर्मी और सर्दी में बढ़ जाते 20 फीसदी गुर्दा रोगी
हर साल गर्मी और सर्दी के मौसम में 20 फीसदी गुर्दा रोगी बढ़ जाते हैं। गर्मी में डिहाइड्रेशन और डायरिया की वजह से गुर्दों में खराबी आती है और जाड़े में एकदम से ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह से गुर्दा फेल होता है। इस दौरान हैलट इमरजेंसी में औसत आठ रोगी गुर्दे की दिक्कत लेकर आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें 15 फीसदी रोगियों की डायलिसिस करानी पड़ती है। एक्यूट रीनल फेल्योर के रोगी दो सप्ताह इलाज से ठीक हो जाते हैं लेकिन क्रोनिक रीनल फेल्योर (सीआरएफ) के रोगियों का गुर्दा सुधरता नहीं है। बाद में किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत आ जाती है।