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किडनी कांड में खुलासा, दिल्ली के मेट्रो स्टेशन पर तय होता था सौदा
Mon, 04 Mar 2019 06:09 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 04 Mar 2019 06:09 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
किडनी कांड के आरोपी गौरव मिश्रा और टी राजकुमार डोनरों को केतन कौशिक से मिलवाते थे। दिल्ली के कड़कड़डुमा मेट्रो स्टेशन पर हर केस की डील फाइनल होती थी। इसके बाद केतन ही तय करता था कि किडनी या लिवर किस रिसीवर को कहां ट्रांसप्लांट होनी है। अस्पताल के कोऑर्डिनेटरों से भी पूरी साठगांठ केतन ही करता था। यह खुलासा पुलिस ने रविवार को 12 घंटे की कस्टडी रिमांड पर लिए गए आरोपी गौरव मिश्रा से पूछताछ के बाद किया।
मेडिकल स्टोर के कर्मचारियों से भी साठगांठ
गौरव ने बताया कि केतन कौशिक डॉक्टर नहीं, बल्कि दिल्ली में उसका मेडिकल स्टोर है। इस वजह से बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों में उसकी पैठ है। इसके जरिए उसने विदेशों में मानव अंगों की तस्करी का नेटवर्क खड़ा किया। साथ ही उसने दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों के आसपास के मेडिकल स्टोरों के कर्मचारियों के बीच अपना जाल फैलाया। इन मेडिकल स्टोर के कर्मचारियों के जरिए वह मरीजों से संपर्क करता था।
अपोलो कांड के आरोपी बृजेंद्र ने मिलाया था
गौरव ने बताया कि केतन कौशिक से उसकी मुलाकात वर्ष 2016 के अपोलो कांड में जेल गए बृजेंद्र सिंह चौहान ने दिल्ली में कराई थी। बृजेंद्र पद्मश्री डॉक्टर का 15 साल तक पर्सनल सेक्रेटरी रहा था। जेल जाने से पहले तक सभी डील वह खुद ही फाइनल करता था। इसके बाद यह काम उसने शुरू कर दिया था।
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बृजेंद्र के जरिए पीएसआरआई और फोर्टिस के कोऑर्डिनेटरों से उसका संपर्क हुआ था। जमानत पर जेल से छूटने के बाद बृजेंद्र ने उससे संपर्क किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर काम करना शुरू कर दिया। बृजेंद्र बैक डोर से काम करता था। वर्ष 2014 में बृजेंद्र से पहली बार मुलाकात हुई थी। लखनऊ के एक मरीज की किडनी ट्रांसप्लांट कराने की डील उसने सीधे बृजेंद्र से की थी, जिसमें केतन ने डोनर मुहैया कराया था।
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मेडिकल स्टोर के कर्मचारियों से भी साठगांठ
गौरव ने बताया कि केतन कौशिक डॉक्टर नहीं, बल्कि दिल्ली में उसका मेडिकल स्टोर है। इस वजह से बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों में उसकी पैठ है। इसके जरिए उसने विदेशों में मानव अंगों की तस्करी का नेटवर्क खड़ा किया। साथ ही उसने दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों के आसपास के मेडिकल स्टोरों के कर्मचारियों के बीच अपना जाल फैलाया। इन मेडिकल स्टोर के कर्मचारियों के जरिए वह मरीजों से संपर्क करता था।
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अपोलो कांड के आरोपी बृजेंद्र ने मिलाया था
गौरव ने बताया कि केतन कौशिक से उसकी मुलाकात वर्ष 2016 के अपोलो कांड में जेल गए बृजेंद्र सिंह चौहान ने दिल्ली में कराई थी। बृजेंद्र पद्मश्री डॉक्टर का 15 साल तक पर्सनल सेक्रेटरी रहा था। जेल जाने से पहले तक सभी डील वह खुद ही फाइनल करता था। इसके बाद यह काम उसने शुरू कर दिया था।
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बृजेंद्र के जरिए पीएसआरआई और फोर्टिस के कोऑर्डिनेटरों से उसका संपर्क हुआ था। जमानत पर जेल से छूटने के बाद बृजेंद्र ने उससे संपर्क किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर काम करना शुरू कर दिया। बृजेंद्र बैक डोर से काम करता था। वर्ष 2014 में बृजेंद्र से पहली बार मुलाकात हुई थी। लखनऊ के एक मरीज की किडनी ट्रांसप्लांट कराने की डील उसने सीधे बृजेंद्र से की थी, जिसमें केतन ने डोनर मुहैया कराया था।