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यूपी: इमरजेंसी से एनआरसी वार्ड की दौड़ में गई बच्चे की जान, डॉक्टरों ने इलाज के लिए नहीं लगाया हाथ
Sun, 23 Jun 2019 08:12 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 23 Jun 2019 08:12 PM IST
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बच्चे की मौत के बाद बदहवास पिता और दादी
- फोटो : अमर उजाला
बीमारी से बच्चों की मौत को लेकर पूरे देश के लोगों में गुस्सा है। इसके बाद भी डॉक्टर संवेदनशील नहीं हैं। इसी का नतीजा है कि लोहिया अस्पताल में इमरजेंसी और एनआरसी वार्ड के चक्कर लगाने में एक मासूम बच्चे की जान चली गई। किसी भी डाक्टर ने इलाज के नाम पर बच्चे को हाथ तक नहीं लगाया।
मसेनी स्थित एसआर कोल्ड स्टोरेज के मिकट निवासी पप्पू अपनी पत्नी मीना के साथ चाढ़े माह के कुपोषित बेटे को गंभीर हालत में लेकर रविवार सुबह दस बजे लोहिया अस्पताल पहुंचे। नाजुक हालत में उसे एनआरसी (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर) वार्ड ले गए। वहां मौजूद डाॅ. विवेक सक्सेना ने बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे इमरजेंसी भेज दिया। इस पर पप्पू बच्चे को इमरजेंसी ले गए।
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मसेनी स्थित एसआर कोल्ड स्टोरेज के मिकट निवासी पप्पू अपनी पत्नी मीना के साथ चाढ़े माह के कुपोषित बेटे को गंभीर हालत में लेकर रविवार सुबह दस बजे लोहिया अस्पताल पहुंचे। नाजुक हालत में उसे एनआरसी (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर) वार्ड ले गए। वहां मौजूद डाॅ. विवेक सक्सेना ने बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे इमरजेंसी भेज दिया। इस पर पप्पू बच्चे को इमरजेंसी ले गए।
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15 दिन पूर्व भी लोहिया अस्पताल में दुधमुंहा रहा था भर्ती
वहां डॉ.गौरव मिश्रा ने बच्चे कुपोषित होने से उसे फिर से एनआरसी वार्ड में ले जाने की सलाह दी। पप्पू ने एनआरसी वार्ड से ही वहां भेजे जाने की बात बताई। बावजूद इसके पप्पू व मीना ने बच्चे को लेकर इमरजेंसी से एनआरसी वार्ड तक कई चक्कर लगाए। आखिरकार इलाज के अभाव में बच्चे की दोपहर को 12.30 बजे लोहिया अस्पताल में ही जान चली गई।
पप्पू ने बताया कि 15 दिन पूर्व तबियत बिगड़ने पर उन्होंने बच्चे को एनआरसी वार्ड में भर्ती कराया था। कुछ सुधार होते ही दो दिन बाद उसकी छुट्टी कर दी गई। उसी दौरान यदि पूरा इलाज मिल जाता तो बच्चे की जान बच सकती थी। वहीं एनआरसी ड्यूटी पर मौजूद डॉ.विवेक सक्सेना ने बताया कि बेड खाली नहीं था। गंभीर हालत में बच्चे को इमरजेंसी में भर्ती किया जाता है। उन्होंने बच्चे को देखने के बाद डॉ.राजेश तिवारी व सीएमएस एसपी सिंह को भी दिखवाया। गंभीर हालत में बच्चे को रेफर कर दिया था।
कुपोषण व डायरिया से गई बच्चे की जान
सीएमएस डॉ.एसपी सिंह ने बताया कि बच्चे को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया था। बच्चा पहले से सूखा रोग से ग्रसित था। ऊपर से डायरिया बनने से हालत गंभीर हो गई थी। उसकी रेफर स्लिप बनाने के साथ एंबुलेंस की भी व्यवस्था कर दी गई थी। तब तक बच्चे की जान चली गई। बताया कि एनआरसी वार्ड में 10 बेड पर 21 बच्चे पहले से भर्ती हैं। इसी वजह से इमरजेंसी में इलाज शुरू किया गया था। वैसे इमरजेंसी व एनआरसी वार्ड में से कहीं भी बच्चे को भर्ती किया जा सकता है। इलाज में कोई लापरवाही नहीं की गई।
पप्पू ने बताया कि 15 दिन पूर्व तबियत बिगड़ने पर उन्होंने बच्चे को एनआरसी वार्ड में भर्ती कराया था। कुछ सुधार होते ही दो दिन बाद उसकी छुट्टी कर दी गई। उसी दौरान यदि पूरा इलाज मिल जाता तो बच्चे की जान बच सकती थी। वहीं एनआरसी ड्यूटी पर मौजूद डॉ.विवेक सक्सेना ने बताया कि बेड खाली नहीं था। गंभीर हालत में बच्चे को इमरजेंसी में भर्ती किया जाता है। उन्होंने बच्चे को देखने के बाद डॉ.राजेश तिवारी व सीएमएस एसपी सिंह को भी दिखवाया। गंभीर हालत में बच्चे को रेफर कर दिया था।
कुपोषण व डायरिया से गई बच्चे की जान
सीएमएस डॉ.एसपी सिंह ने बताया कि बच्चे को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया था। बच्चा पहले से सूखा रोग से ग्रसित था। ऊपर से डायरिया बनने से हालत गंभीर हो गई थी। उसकी रेफर स्लिप बनाने के साथ एंबुलेंस की भी व्यवस्था कर दी गई थी। तब तक बच्चे की जान चली गई। बताया कि एनआरसी वार्ड में 10 बेड पर 21 बच्चे पहले से भर्ती हैं। इसी वजह से इमरजेंसी में इलाज शुरू किया गया था। वैसे इमरजेंसी व एनआरसी वार्ड में से कहीं भी बच्चे को भर्ती किया जा सकता है। इलाज में कोई लापरवाही नहीं की गई।