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बिल्डरों से सांठगांठ कर केडीए को अपनों ने ही लूटा: 100 करोड़ फूंके फिर भी योजना में एक ईंट भी नहीं रख पाया

Tue, 17 Aug 2021 03:12 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 17 Aug 2021 03:12 PM IST
सार

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में अपील (विशेष अनुज्ञा याचिका) भी 31 मार्च 2008 को खारिज हो गई, लेकिन शेष जमीन 111.8469 हेक्टेयर से संबंधित धारा-6 की अधिसूचना निरस्त नहीं हुई थी। इसका अभिनिर्णय नौ फरवरी 2010 को तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) ने घोषित किया।

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KDA was robbed by their own in connivance with the builders
केडीए - फोटो : अमर उाजला

विस्तार

अपनी बहुप्रतीक्षित आवासीय योजना न्यू कानपुर सिटी को बसाने के लिए केडीए ने जमीन अधिग्रहण से लेकर हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट तक में चले मुकदमों में 100 करोड़ रुपये से अधिक फूंक चुक ा है। बिल्डरों के साथ अपने ही अधिक-और कर्मचारियों की सांठगांठ के चलते केडीए इस योजना में एक ईंट तक नहीं रख पाया है। दरअसल, कई बिल्डरों ने काश्तकारों से सड़कों के किनारे की जमीनें लिखवा ली हैं। मिलीभगत के चलते मौजूदा समय में भी योजना के लिए प्रस्तावित जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं।
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केडीए वीसी के अनुसार, जांच में पाया गया कि वर्ष 1995 के आसपास न्यू कानपुर सिटी योजना विकसित करने के लिए प्रस्तावित 464.6966 हेक्टेयर जमीन में से 352.8497 हेक्टेयर के लिए धारा-6 की अधिसूचना हाईकोर्ट में विभिन्न याचिकाओं में 26 सितंबर 2006 को पारित आदेश से निरस्त की गई। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में अपील (विशेष अनुज्ञा याचिका) भी 31 मार्च 2008 को खारिज हो गई, लेकिन शेष जमीन 111.8469 हेक्टेयर से संबंधित धारा-6 की अधिसूचना निरस्त नहीं हुई थी। इसका अभिनिर्णय नौ फरवरी 2010 को तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) ने घोषित किया।
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यह जमीन एक साथ न होकर बिखरी अवस्था में है। इस संबंध में 14 नवंबर 2008 को अपर जिलाधिकारी (वित्त-राजस्व) ने केडीए के विशेष कार्याधिकारी (अर्जन) को पत्र देकर अर्जन से संबंधित विवादग्रस्त और गैरविवाद ग्रस्त भूमि के संबंध में सूचना मांगी थी। इसके संबंध में अविवादित 111.8466 हेक्टेयर मिलीजुली जमीन संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत न करते हुए बिखरी अवस्था में मौजूद भूमि के अर्जन की कार्यवाही की गई। जांच में सामने आया कि जानबूझकर मिलीजुली जमीनें अर्जित नहीं की गईं।
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इससे बीच-बीच के बड़े प्लॉट अर्जन की प्रक्रिया से छूट गए और योजना अव्यवहारिक हो गई। अधूरा अर्जन होने से केडीए की तरफ से खर्च की गई धनराशि भी बेकार गई। इसके अतिरिक्त केडीए बोर्ड की 13 अक्तूबर 2017 को हुई 122वीं बोर्ड बैठक में न्यू कानपुर सिटी योजना विकसित करने के लिए प्रस्तावित 200 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू करने का फैसला लिया गया था, लेकिन यह जमीन भी अर्जित नहीं की गई। इसकी वजह से योजना धरातल पर ही नहीं आ सकी।


अन्य अफसरों-कर्मियों को दी नसीहत
केडीए वीसी ने पांच अफसरों समेत नौ के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करने के साथ ही अन्य अफसरों और कर्मचारियों को प्राधिकरण की कार्य संस्कृति में सुधार लाने की नसीहत दी है। नियमों के विपरीत काम करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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