{"_id":"5f1c8f188ebc3e9f6b1b194d","slug":"kargil-vijay-diwas-martyr-satendra-kumar-crossed-the-border-while-fighting-enemies","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kargil Vijay Diwas: दुश्मनों से लड़ते-लड़ते बॉर्डर पार कर गए थे शहीद सतेंद्र कुमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kargil Vijay Diwas: दुश्मनों से लड़ते-लड़ते बॉर्डर पार कर गए थे शहीद सतेंद्र कुमार
Sun, 26 Jul 2020 02:19 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 26 Jul 2020 02:19 AM IST
विज्ञापन
शहीद सतेंद्र कुमार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहली सुजानपुर में रहने वाले सतेंद्र कुमार यादव युद्ध में शहीद हो गए थे। 13 कुुमायूं रेजीमेंट में तैनाती के दौरान युद्ध में भेजे गए थे। युद्ध के दौरान वे अपनी टोली के साथ बार्डर पार कर गए थे। वहां दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। उनका पार्थिव शरीर नहीं मिल पाया था।
विज्ञापन
इनके शौर्य और साहस को देखते हुए सरकार ने मरणोपरांत उनके परिजनों को ऑपरेशन विजय का प्रशस्ति पत्र भी था। सतेंद्र के बड़े भाई अर्जुन यादव ने बताया कि उनके पैर में गोली लगी थी। इसके बाद भी वो दुश्मनों से लड़ते रहे थे।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि सतेंद्र की शादी नहीं हुई थी। अर्जुन का छोटा बेटा आर्यन अपने चाचा से प्रेरित होकर सेना में जाना चाहता है। इसके लिए उसने एनडीए की तैयारी शुरू की है। वह पैरामिलिट्री कमांडो बनना चाहता है। अर्जुन ने बताया कि सरकार और सेना की ओर से उन्हें सब कुछ मिला है। हालांकि तत्कालीन जिलाधिकारी सीताराम मीणा ने घर के आसपास किसी एक चौराहे का नाम सतेंद्र के नाम पर रखने की घोषणा की थी, जिस पर आज तक अमल नहीं हुआ है।
विज्ञापन
साथियों को बचाने में घायल हुए थे अजीत सिंह
कल्याणपुर आवास विकास में रहने वाले अजीत सिंह राष्ट्रीय राइफल आरआर में सिपाही थे। कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें असम से बुलाकर कुपवाड़ा भेज दिया था। युद्ध के दौरान दुश्मनों की ओर से फेंका गया हैंडग्रेनेड उनके पास आ गिरा था।
अपने साथियों व खुद को बचाने के लिए उन्होंने हैंडग्रेनेड उठाकर दूर फेंकना चाहा तो वह फट गया। इसमें अजीत बुरी तरह घायल हो गए थे। 47 साल के अजीत सिंह के दो बेटे देवराज सिंह और शिवराज सिंह हैं। ये दोनों भी सेना में जाना चाहते हैं। देवराज केंद्रीय विद्यालय आईआईटी में 12वीं के छात्र हैं।
देवराज ने बताया कि वह सेना में मेजर बनना चाहता है। इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। शिवराज सिंह 10वीं का छात्र है। वह पायलट बनकर लड़ाकू विमान उड़ाना चाहता है। देवराज ने बताया कि शहर में लगने वाली हर सैन्य प्रदर्शनी में पिता व भाई के साथ जरूर जाते हैं। उनके बाबा छठि प्रसाद सिंह भी सेना में थे।