Karauli Baba: जेल में भी था बाबा का रसूख, करीबी के परिजनों से ऐंठे थे रुपये
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नोएडा के डॉक्टर सिद्धार्थ चौधरी को पीटने के मामले को लेकर सुर्खियों में आए करौली सरकार डॉ. संतोष सिंह भदौरिया के शुरुआती दौर के ठगी के किस्से आज भी उसके करीबियों में चर्चा का विषय है। सूत्रों के अनुसार जेल में बंद होने के दौरान कोर्ट में पेशी पर गए बाबा ने करीबी के परिजनों से रुपये ऐंठ लिए थे।
डॉ. संतोष सिंह भदौरिया वर्ष 1994 में भाकियू (टिकैत) में जिला अध्यक्ष के पद पर था। तभी किसानों की मांगों को लेकर भारी भीड़ के साथ तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश सिंह का घेराव कर दिया था। ज्ञापन लेने पहुंचे तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सीआर यादव से संतोष सिंह की बहस हुई, तभी किसानों ने हमला बोल दिया था। मारपीट के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट का सिर फट गया था। पुलिस ने लाठीचार्ज कर किसी तरह स्थिति काबू की और संतोष भदौरिया को मौके से ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
उस वक्त संतोष भदौरिया अपने परिवार के साथ रामादेवी में फ्रेंड्स कॉलोनी में किराये पर रहता था। जेल जाने के बाद आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि तीन सौ रुपये के लिए एक जेल में बंद एक परिचित के परिजनों से ही ठगी कर ली। इसका खुलासा तब हुआ था, जब परिचित जेल से जमानत पर छूटकर अपने परिजनों से मिला। पता चला कि संतोष ने युवक को जेल में सभी सुविधाएं दिलवाने के नाम पर रुपये ठग लिए थे। वहीं शनिवार को भी एलआईयू ने बाबा से काफी देर एकांत में पूछताछ की।
जेल से छूटने के बाद आईपीएस अधिकारी से बढ़ाया मेलजोल
सूत्रों के मुताबिक 1995 में जेल से बाहर आने के बाद संतोष भदौरिया ने शहर में तैनात तत्कालीन एक आईपीएस अफसर से काफी मेलजोल बढ़ा लिया था। जिसके बाद उसने प्रॉपर्टी के व्यापार में हाथ डाला। वह सभी का हिस्सा पहुंचाता था। आर्थिक स्थित में सुधार होने के बाद संतोष ने सिविल लांइस में जिलाधिकारी आवास के पास एक फ्लैट भी खरीदा था।
असम में काटा अज्ञातवास
सूत्रों की माने तो वर्ष 2002 के बाद अचानक संतोष भदौरिया अज्ञातवास में असम चला गया। वहां दो से तीन साल का समय व्यतीत करने के दौरान उसने पीएचडी की डिग्री हासिल की, जिसके बाद वह डॉ. संतोष भदौरिया हो गया। शहर लौटकर आने के बाद उसने बिधनू में शनिधाम मंदिर की स्थापना की। यहां प्राकृतिक थेरेपी और जैविक खाद का धंधा शुरू किया, जिसमें उसे कोई खास लाभ नहीं हुआ। बाद में भक्तों की संख्या बढ़ने पर वह करौली सरकार के नाम से जाना जाने लगा। आज 14 एकड़ में उसका साम्राज्य फैला हुआ है।
अब डिफेंडर समेत अन्य वाहनों से किस्तों में भेजा जा रहा रुपया
सूत्रों की मानें तो लवकुश आश्रम की एंबुलेंस से रुपयों को भरकर ठिकाने लगाने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद बाबा सतर्क हो चुका है। सुबह एंबुलेंस तो आश्रम से निकलती है, लेकिन उसमें अब रुपया नहीं होता। इन रुपयों को अब तीन करोड़ की डिफेंडर कार के अलावा अन्य वाहनों की मदद से किस्तों के रूप में ठिकाने लगाया जा रहा है। डिफेंडर को बाबा का बड़ा बेटा (आश्रम की पूरी आय का लेखाजोखा भी रखता है) खुद चलाकर ले जाता है।
बाबा के 62 भक्तों ने थाने में दिया प्रार्थनापत्र
बाबा के 62 भक्तों ने शनिवार को अपने प्रार्थनापत्र बिधनू थाने में भिजवाया। भक्तों ने नोएडा के डॉ. सिद्धार्थ चौधरी पर करौली सरकार डॉ. संतोष भदौरिया पर एक चैनल में डिबेट के दौरान अपशब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाया है। कार्यवाहक थाना प्रभारी मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच के बाद कार्रवाई होगी।
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