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‘कानपुर का महाठग’: 10 साल तक लोगों को लगाया चूना, ये था PMO के अफसर का असली चेहरा, पढ़ें अभिषेक सिंह की कहानी

Fri, 25 Aug 2023 12:12 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 25 Aug 2023 12:12 PM IST
सार

Kanpur Crime: सोसाइटी में रहने वाले अनुपम कुमार ने बताया कि एक दिन वह अभिषेक प्रताप की फेसबुक आईडी चेक कर रहे थे। इस दौरान उन्हें एक क्षेत्रीय अभी सिंह नाम से एक आईडी मिली, जिसमें अभिषेक की प्रोफाइल फोटो लगी थी।

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Kanpurs big thug, Cheated people for 10 years, this was the real face of PMO officer, read Abhishek Singhs sto
महाठग की कहानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में बिल्डर निखिल शर्मा ने खुद महाठग अभिषेक प्रताप उर्फ संतोष से अपने कई अवैध काम कराए थे। इसके लिए उसने कई बार मोटी रकम दी और अपनी पायनियर ग्रींस सोसाइटी में रहने के लिए विला भी। उसी की मदद से निखिल ने पायनियर ग्रींस के तीन नक्शे फर्जी दस्तावेजों पर पास भी कराए।

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सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अभिषेक की वसूली बढ़ती जा रही थी। सोसाइटी में अपने रुतबे से 15 लोगों की रजिस्टर्ड सोसाइटी भी बनाकर जरूरत पर निखिल को घेरने के लिए जाल भी बुन दिया। अब निखिल परेशान होने लगा था। संबंधों में दरार पड़ गई। परेशान निखिल ने अंत में बिठूर थाना प्रभारी से शिकायत कर दी।
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थाना प्रभारी ने पीएमओ के अफसर पर हाथ डालने से पहले इसकी सूचना लखनऊ एसटीएफ को दी। इसके बाद एसटीएफ ने महाठग का मुखौटा उतार दिया। अभिषेक प्रताप ने बेहद चालाकी से अपना जाल सोसाइटी में बुना था। उसके साथ रहने वाला ममेरा भाई खुद को अभिषेक प्रताप का पीआरओ बताता था।

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सोसाइटी की मीटिंगों में आते थे अभिषेक के फोन
गाजीपुर के सैदपुर का रहने वाला प्रदीप सिंह खुद को वाराणसी में तैनात पुलिस अफसर बताते हुए सोसाइटी में लोगों से कहता था कि स्पेशल ड्यूटी में उसे एनआईए के डीआईजी के साथ संबद्ध किया गया है। अभिषेक की पोल खुलने के बाद से वह फरार है। इसी सोसाइटी के अनुपम कुमार के अनुसार सोसाइटी की मीटिंगों में अभिषेक के फोन आते थे।

झांसे में आ ही गया था निखिल
उनसे वह यह अहसास कराता था कि वह किसी आईएएस या अन्य किसी बड़े अफसर से बात कर रहा है। फोन करने वाले अभिषेक को सर का संबोधन करते थे। इससे लोगों में उसका रुतबा बढ़ता गया। आशंका है कि ठग के गुर्गे ही लोगों के सामने अभिषेक की छवि बनाने के लिए खुद फोन करते थे। लेकिन इन सबसे निखिल, तो झांसे में आ ही गया था।

फेसबुक आईडी से हो गया था शक
सोसाइटी में रहने वाले अनुपम कुमार ने बताया कि एक दिन वह अभिषेक प्रताप की फेसबुक आईडी चेक कर रहे थे। इस दौरान उन्हें एक क्षेत्रीय अभी सिंह नाम से एक आईडी मिली, जिसमें अभिषेक की प्रोफाइल फोटो लगी थी। उन्होंने बताया कि एक लोकसेवक की फेसबुक आईडी पर इस तरह से जाति को प्रमुखता से दर्शाता हुआ, नाम देखकर उन्हें शक हो गया था।

लोगों ने सोसाइटी में कराया शुद्धिकरण
शातिर ठग अभिषेक प्रताप सिंह दो सालों से पायनियर ग्रींस सोसाइटी में रहकर फर्जीवाड़ा कर रहा था। उसने इसी सोसाइटी में रहने वाली एक महिला के साथ मिलकर मंदिर के एक हिस्से में कब्जे का भी प्रयास किया, लेकिन लोगों के विरोध के आगे उसकी नहीं चली। उसके जेल जाने के बाद लोगों ने सोसाइटी में शुद्धिकरण के लिए पूजापाठ किया।

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