फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur: Whole childhood was spent in darkness, a ray of light burst from stem cell

Kanpur: पूरा बचपन अंधेरे में बीता, स्टेम सेल से फूटी रोशनी की किरण, एक महीने में ही थेरेपी ने दिखाया असर

Thu, 02 Mar 2023 09:18 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 02 Mar 2023 09:18 AM IST
विज्ञापन
Kanpur: Whole childhood was spent in darkness, a ray of light burst from stem cell
इमरान - फोटो : अमर उजाला

पूरा बचपन अंधेरे में गुजारने के बाद चौबेपुर के किशोर (16) इमरान की आंखों में रोशनी की किरण फूटी है। उसकी आंखों की रक्तवाहिनियों में गड़बड़ी के कारण रेटिना में रक्त आपूर्ति नहीं हो पाई। इससे रेटिना सूख गई और बचपन में ही आंखों की रोशनी चली गई थी। अब स्टेम सेल प्रत्यारोपण के बाद उसे हल्का-हल्का दिखने लगा है। डॉक्टरों के मुताबिक अभी और सुधार होगा।

विज्ञापन


इमरान के माता-पिता दुनिया में नहीं हैं, लेकिन बड़ी बहन ने हार नहीं मानी। अस्पतालों में जाकर भाई की आंखें दिखाती रही। बाद में उसने हैलट के नेत्र रोग विभाग में भाई को दिखाया। यह सोचकर कि शायद स्टेम सेल ही काम कर दे, उसके स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया गया। स्टेम सेल ने आंखों में अपना असर दिखाया और बड़ी बहन की तपस्या रंग लाई। इमरान की आंखों में रोशनी की किरण फूट पड़ी। उसने सबसे पहले अपने हाथ देखे।

विज्ञापन

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान का कहना है कि प्रत्यारोपण को अभी एक महीना हुआ है, अभी और सुधार होगा। इमरान ने बताया कि जब वह छोटा था तभी पिता इमरान और मां शमी बानो की मौत हो गई। घर की माली हालत भी ठीक नहीं थी तो किसी बड़े अस्पताल में जाकर दिखा नहीं पाया। बड़ी बहन ही उसे लेकर आती-जाती रही। बहन को उम्मीद थी कि उसके भाई की आंखें ठीक होंगी।

डेढ़ महीने पहले बहन इमरान को लेकर विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान की ओपीडी में पहुंची थी। डॉ. खान की यूनिट की जूनियर डॉक्टर डॉ. रिचा दत्ता ने उसे देखा। आंख में इलाज से कुछ कर पाने की गुंजाइश थी नहीं। रेटिना खराब थी। रक्तवाहिनियां सूखी हुई थीं। एक महीने पहले इमरान की आंखों में स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया गया। 20 दिन के अंदर ही रोशनी की किरण फूट गई।

विज्ञापन

बुधवार को वह नेत्ररोग विभाग में फॉलोअप में दिखाने आया तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने डॉक्टरों को बताया कि उसे अपने हाथ दिख रहे हैं। डॉ. खान ने बताया कि यह तो एक महीने का असर है। वैसे स्टेम सेल का पूरा असर छह महीने से एक साल में आता है।

रोगी की रेटिना में ब्लड सप्लाई बाधित थी। जो नसें खून पहुंचाती हैं, उनमें खराबी थी। रक्तवाहिनियों में खराबी जेनेटिक कारणों से आई या संक्रमण से यह शोध का विषय है, लेकिन रेटिना पूरी तरह खराब थी। इसका दवाओं और सर्जरी से मुकम्मल इलाज नहीं है। ऐसे में स्टेम सेल ने असर दिखाया है। स्टेम सेल जहां प्रत्यारोपित की जाती हैं, वहीं की कोशिकाओं के रूप में अपने को बदल लेती हैं। - डॉ. परवेज खान, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed