Kanpur Weather Update: बादलों से पारा चढ़ा...लेकिन हवाओं ने बढ़ाई ठंडक, कल से धूप निकलने के आसार, पढ़ें अलर्ट
Weather News: मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार सोमवार से धूप निकलना शुरू होगी, लेकिन इसी के साथ हवा की रफ्तार भी तेज होगी। ऐसे में दिन का पारा तेजी से नीचे जाने की संभावना है। रात में भी बादल छंट जाने से शीतलहर शुरू हो सकती है।
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कानपुर में बादलों की वजह से दिन का पारा पिछले 24 घंटे में दो डिग्री जरूर बढ़ गया, लेकिन बर्फीली हवाओं की वजह से गलन रही। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, ठंड और बढ़ती गई। सीएसए के मौसम विभाग के अनुसार शनिवार का अधिकतम तापमान 18.6 और न्यूनतम एक दिन पहले की तरह 12 डिग्री सेल्सियस पर रहा।
इस बीच सुबह के समय 2.2 मिमी की बारिश भी शहर के कुछ क्षेत्रों में हुई। मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार सोमवार से धूप निकलना शुरू होगी, लेकिन इसी के साथ हवा की रफ्तार भी तेज होगी। ऐसे में दिन का पारा तेजी से नीचे जाने की संभावना है। रात में भी बादल छंट जाने से शीतलहर शुरू हो सकती है। इस बीच हवा में अधिकतम नमी 95 और न्यूनतम 73 प्रतिशत रही।
जाड़े में पानी पी रहे कम, गुर्दों में हो रहा है जख्म
सर्दी में जरूरत से कम पानी पीने से गुर्दे फेल हो जा रहे हैं। गुर्दों में पानी की कमी होने से ये डिहाइड्रेशन की स्थिति में चले जा रहे हैं। इससे रोगी एक्यूट किडनी इंजरी (एकेआई) का शिकार हो रहे हैं। हैलट की इमरजेंसी में 10 दिनों में एकेआई के 50 रोगी आए हैं। जिन एकेआई के रोगियों को वायरल संक्रमण और टाइफाइड हो गया, उनके गुर्दे फेल हो जा रहे हैं। इनमें कई रोगी ऐसे हैं जिन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है।
डिहाइड्रेशन से एक्यूट किडनी इंजरी के रोगी बढ़े
ठंड के मौसम में हैलट ओपीडी और इमरजेंसी में एकेआई के 10 रोगी और उर्सला में पांच रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। कानपुर किडनी फाउंडेशन के सचिव वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिन्हा ने बताया कि एकेआई के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। एकेआई रोगी को अगर वायरल संक्रमण, टाइफाइड और कोई दूसरा रोग होता है तो रोगी एक्यूड किडनी फेल्योर में चले जाते हैं। हालांकि इलाज से ज्यादातर रोगी ठीक हो जाते हैं।
वायरल संक्रमण, टाइफाइड होने पर एकेआई रोगियों के गुर्दे हो रहे हैं फेल
उन्होंने बताया कि रोगी को ठीक होने में दो से तीन सप्ताह का समय लग जाता है। जो रोगी आ रहे हैं, वे जरूरत से कम पानी पी रहे हैं। कम से दो लीटर पानी जरूरी होता है। भर्ती रोगियों की डायग्नोसिस से पता चला है कि लोग जाड़े में औसत एक लीटर पानी पी रहे हैं। मेडिसिन के प्रोेफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि एकेआई के रोगी हर रोज इमरजेंसी में भर्ती होते हैं।
यह होती है दिक्कत
जाड़े में तेज प्यास न लगने से लोग कम पानी पीते हैं। इससे गुर्दों में कम पानी पहुंचता है और डिहाइड्रेशन हो जाता है। इससे गुर्दों की छन्नी जिसे ट्रिब्यूल कहते हैं, वे अस्थायी रूप से खराब हो जाती हैं। इससे सीरम क्रेटेनिन की मात्रा भी बढ़ जाती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- दिन में छह से 10 गिलास पानी पीएं।
- खाने के समय भरपूर पानी पीएं।
- प्यास न भी लगे तब भी बीच-बीच में पानी पीते रहें।
- जाड़े में कम से कम दो और गर्मी में कम से कम तीन लीटर पानी पीना जरूरी है।
हाई ब्लडप्रेशर भी खराब कर रहा गुर्दे
हाई ब्लडप्रेशर से हार्ट और ब्रेन अटैक का खतरा तो रहता ही है, लोगों के गुर्दे भी खराब हो रहे हैं। गुर्दा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर होने से गुर्दों पर दबाव आता है। इससे गुर्दे की कोशिकाएं रेनिन नामक रसायन छोड़ती हैं। इसके खून में मिलने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। ब्लड प्रेशर अधिक होने से रेनिन का रिसाव होता है और रेनिन ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। इससे रोगी क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) की गिरफ्त में आ जाता है।