Kanpur Weather: बिपरजॉय का असर...कानपुर में सुबह से झमाझम बारिश, तेज हवा के साथ लुढ़का पारा, पढ़ें पूरा अपडेट
Weather News: बिपरजॉय का असर पूरी तरह से प्रदेश में भी दिखने लगा है। कानपुर समेत अन्य जिलों में सुबह से बारिश हो रही है। तापमान 3.2 प्रतिशत घटा है, लेकिन रात में नमी 95 फीसदी की चोटी पर पहुंच गई।
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कानपुर में बुधवार सुबह से झमाझम बारिश के चलते लोगों को गर्मी से राहत नसीब हुई है। साथ ही, तेज हवा के चलते पारा भी लुढ़क गया। रात में तो, 95 फीसदी नमी दर्ज की गई। उम्मीद है कि इस बारिश से धरती की तपिश शांत होगी और मौसम सुहाना हो जाएगा।
सीएसए के मौसम विभाग का कहना है कि इस महीने पहली बार शहर व आसपास के क्षेत्रों में सात मिली बारिश रिकार्ड की गई। डॉ. एसएन पांडेय अनुसार अगले 48 घंटे तक इसी तरह का मौसम रहने की संभावना है। इस महीने 19 दिनों में चुभती गर्मी ने बेहाल किया।
वहीं, मंगलवार को दिन का पारा 3.2 डिग्री घटकर जून में पहली बार 35.8 डिग्री पर आ गया। न्यूनतम पारा 28.2 डिग्री रहा, जो सामान्य से 0.2 डिग्री अधिक है। डॉ. पांडेय के अनुसार बिपरजॉय चक्रवात की वजह से अरब सागर से उठने वाली हवाओं का रुख मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर है।
अगले चार दिनों तक रहेगा ऐसा ही मौसम
ऐसे में यदि इस तरह का मौसम अगले चार दिनों तक बना रहता है, तो मानसून भी समय से पहले आ सकता है। आमतौर पर मानसून 26 से 28 जून के बीच आ जाता है। पांच जून से लेकर 19 जून के बीच सिर्फ तीन बार बदला मौसम लेकिन बूंदाबांदी तक ही सीमित रहा।
लोगों ने लिया बारिश का मजा
शहरवासियों ने हल्की बारिश का भरपूर आनंद लिया। बच्चे छतों और सड़कों पर बारिश में भीगे, तो बाजारों में बारिश के बीच ही लोगों ने खरीददारी की। बाजारों, चौराहों, अपार्टमेंट सभी जगह लोगों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बारिश ही रही। यह पहली बारिश है, जो पूरे शहर में हुई।
जून 2013 में बरसा था 359 मिमी पानी
इस बार जून का महीना ज्यादा गर्म रहा। वर्ष 2012 को छोड़ दें तो 2010 से लेकर 2022 तक जून में जमकर बारिश हुई है। सबसे ज्यादा बारिश 2013 में 359 मिमी बारिश रिकार्ड की गई थी। सीएसए के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार बिपरजॉय चक्रवात यदि अगले चार दिनों तक बना रहा तो इस बार 2022 से ज्यादा बारिश हो सकती है।
जून में इस तरह हुई बारिश
- 2010 में 27.5 मिमी
- 2011 में 235.8 मिमी
- 2012 में 2.0 मिमी
- 2013 में 359.0 मिमी
- 2014 में 25.3 मिमी
- 2015 में 48.9 मिमी
- 2016 में 113.4 मिमी
- 2017 में 50.6 मिमी
- 2018 में 63.4 मिमी
- 2019 में 40.0 मिमी
- 2020 में 97.4 मिमी
- 2021 में 96.4 मिमी
- 2022 में 35.8 मिमी