Kanpur Weather: लालबंगला और चकेरी में झमाझम…बाकी जगह बारिश कम, जलवायु परिवर्तन से जल्दी होने लगी पॉकेट रेन
Weather News: मौसम विभाग के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से इस मानसून में पॉकेट रेन जल्दी होने लगी। शहर में बढ़ते हुए हीट आईलैंड की वजह से हर क्षेत्र का वायुमंडलीय दबाव अलग-अलग रहने लगा है। इसकी वजह से बारिश भी वहां का मौसम भी उसी तरह रहने लगा है।
विस्तार
कानपुर में जलवायु परिवर्तन का असर अब मानसूनी बारिश पर भी देखने को मिल रहा है। पिछली बार पॉकेट रेन (फुटकर बारिश) जुलाई के दूसरे सप्ताह के बाद देखने को मिली थी, जबकि इस बार शुरुआत से ही दिखने लगी है। मंगलवार को एक बार फिर शहर के अलग-अलग हिस्सों में कम ज्यादा बारिश हुई।
लाल बंगला, चकेरी, रामादेवी, श्यामनगर और सर्किट हाउस तक 49 मिमी बारिश हुई। यहां सड़कें लबालब हो गईं। शहर के बीच में मात्र 9.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। बगल के जिले उन्नाव की बात करें तो वहां सिर्फ चार मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, शहर में बढ़ते हुए हीट आईलैंड की वजह से हर क्षेत्र का वायुमंडलीय दबाव अलग-अलग रहने लगा है।
दोपहर तक बनी रही नमी
इसकी वजह से बारिश भी वहां का मौसम भी उसी तरह रहने लगा है। इसमें बदलाव होता रहता है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि मंगलवार सुबह चकेरी क्षेत्र में नमी की मात्रा 85 प्रतिशत रही, जो दोपहर तक इसी तरह बनी रही।
बूंदाबांदी के बीच घने बादल छाए रहे
सीएसए और शहर के बाकी हिस्से में दोपहर को नमी घटकर 69 प्रतिशत हो गई। ऐसे में नमी जहां अधिक नहीं थी, वहां पर बारिश तेज हुई। बताया जा रहा है कि माल रोड से अधिक बाजारों और मोहल्लों में इतना बारिश हुई कि पानी निकलने में एक घंटे लग गए। बाकी हिस्सों में बूंदाबांदी के बीच घने बादल छाए रहे।
क्यूम्यलोनिंबस बादलों के कारण होती है पॅाकेट रेन
सभी स्थानों पर एक जैसी बारिश के बजाय किसी क्षेत्र में भारी और किसी क्षेत्र में हल्की बारिश की स्थिति को पॉकेट रेन कहा जाता है। इसमें कुछ क्षेत्र ऐसे भी होते हैं, जहां पर बादल तो होते हैं लेकिन बारिश जरा भी नहीं होती है।
एक ही क्षेत्र में अचानक से बनता है बादलों का गुच्छा
यह स्थिति तब आती है, जब किसी क्षेत्र के वातावरण में नमी और तापमान अनुकूलता अधिक होती है और बादलों का एक ऐसा गुच्छा एक ही क्षेत्र में अचानक से बनता है और उतने ही क्षेत्र में बरस कर खत्म हो जाता है। ऐसे बादलों को क्यूम्यलोनिंबस बादल कहा जाता है।
शहर में तेजी से बन रही बहुमंजिला इमारतों से जो गर्म हवाएं निकलती हैं, वे उस समय मौजूद बादलों तक पहुंचकर उसकी नमी को खतम कर देती है। जिन क्षेत्रों में ये गर्म हवाएं नहीं पहुंचती, वहां बारिश हो जाती है और बाकी स्थानों पर सूखे जैसी स्थिति बन जाती है। -डॉ. एसएन सुनील पांडेय मौसम वैज्ञानिक
ऐसा रहा तापमान
अधिकतम- 33.4 डिग्री सेल्सियस।न्यूनतम- 24.4 डिग्री सेल्सियस।