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Kanpur: घातक हो रहा है वायरल निमोनिया, एक मौत, क्रोनिक रोगियों को खतरा अधिक
Mon, 14 Apr 2025 08:48 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 14 Apr 2025 08:48 PM IST
सार
Kanpur News: वायरल निमोनिया से एक की मौत हो गई। क्रोनिक रोगियों को खतरा अधिक है। हैलट ओपीडी और इमरजेंसी में रोगी बढ़ रहे।
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हैलट अस्पताल
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पुराने सांस रोगियों के लिए वायरल निमोनिया घातक साबित हो रहा है। सीओपीडी और अस्थमा रोगियों की हालत बिगड़ जा रही है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। रोगियों का इलाज हैलट और डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल में चल रहा है। आईसीयू के सभी बेड फुल हैं। एक रोगी की मौत हो गई। शाम तक निमोनिया के चार रोगियों को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इसके साथ ही आम वायरल संक्रमण रोगियों की खांसी दो सप्ताह बाद भी ठीक नहीं हो रही है। गले का संक्रमण फेफड़ों में उतर जा रहा है।
निजी अस्पतालों में निमोनिया रोगियों की हालत बिगड़ने पर हैलट रेफर किया जा रहा है। कल्याणपुर के निजी अस्पताल से रेफर होकर हैलट इमरजेंसी आए एक निमोनिया रोगी की मौत हो गई। परिजन एंबुलेंस से उसे वापस ले गए। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने सोमवार को उनकी हाफ डे ओपीडी में दो सौ रोगी आए। सबसे अधिक रोगी वायरल संक्रमण के रहे हैं। रोगी के फेफड़ों की झिल्ली में सूजन आ जाती है। जो पहले से सांस रोगी हैं, उन्हें अधिक दिक्कत होती है। रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि अस्पताल का आईसीयू इस वक्त फुल है।
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निजी अस्पतालों में निमोनिया रोगियों की हालत बिगड़ने पर हैलट रेफर किया जा रहा है। कल्याणपुर के निजी अस्पताल से रेफर होकर हैलट इमरजेंसी आए एक निमोनिया रोगी की मौत हो गई। परिजन एंबुलेंस से उसे वापस ले गए। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने सोमवार को उनकी हाफ डे ओपीडी में दो सौ रोगी आए। सबसे अधिक रोगी वायरल संक्रमण के रहे हैं। रोगी के फेफड़ों की झिल्ली में सूजन आ जाती है। जो पहले से सांस रोगी हैं, उन्हें अधिक दिक्कत होती है। रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि अस्पताल का आईसीयू इस वक्त फुल है।
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