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नई सड़क हिंसा: मुकदमे की सुनवाई में फंसा शासन की अनुमति का पेंच
Thu, 25 Aug 2022 01:42 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 25 Aug 2022 01:42 PM IST
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Kanpur Violence
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में नई सड़क पर तीन जून को हुए बवाल के बाद पुलिस की ओर से तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं थी। इसमें से एक में चार्जशीट भेजी गई है। चार्जशीट में कुछ गंभीर धाराएं भी बढ़ाई गई हैं लेकिन इन धाराओं के बढ़ने के बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के पहले शासन की अनुमति का पेंच फंस गया है।
नई सड़क पर तीन जून को हुए बवाल के बाद बेकनगंज थाने में अपराध संख्या 42/22, 43/22 और 44/22 पर तीन एफआईआर दर्ज हुई थीं। तीनों मुकदमों में पुलिस ने बलवा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हत्या के प्रयास, सेवन सीएलए के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पिछले दिनों पुलिस ने 42/22 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
लेकिन इस चार्जशीट में धारा 153 ए की बढ़ोतरी की गई। इसके तहत आरोपियों पर धर्म के नाम पर लोगों में शत्रुता पैदा करने का आरोप लगाया गया है। आईपीसी की इस धारा के तहत कोर्ट में मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन को शासन से अनुमति की आवश्यकता होती है।
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उसकी अनुमति के बिना मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। ऐसे में अभियोजन अधिकारियों ने उक्त मामलों में अनुमति के लिए शासन को घटना के विवरण के साथ ही अभियोजन चलाने की स्वीकृति के लिए 2 सप्ताह पूर्व एक पत्र भेजा था जिस पर अब तक कोई जवाब अभियोजन को नहीं मिल पाया है। इसके कारण मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हो पा रही है।
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नई सड़क पर तीन जून को हुए बवाल के बाद बेकनगंज थाने में अपराध संख्या 42/22, 43/22 और 44/22 पर तीन एफआईआर दर्ज हुई थीं। तीनों मुकदमों में पुलिस ने बलवा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हत्या के प्रयास, सेवन सीएलए के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पिछले दिनों पुलिस ने 42/22 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
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लेकिन इस चार्जशीट में धारा 153 ए की बढ़ोतरी की गई। इसके तहत आरोपियों पर धर्म के नाम पर लोगों में शत्रुता पैदा करने का आरोप लगाया गया है। आईपीसी की इस धारा के तहत कोर्ट में मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन को शासन से अनुमति की आवश्यकता होती है।
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उसकी अनुमति के बिना मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। ऐसे में अभियोजन अधिकारियों ने उक्त मामलों में अनुमति के लिए शासन को घटना के विवरण के साथ ही अभियोजन चलाने की स्वीकृति के लिए 2 सप्ताह पूर्व एक पत्र भेजा था जिस पर अब तक कोई जवाब अभियोजन को नहीं मिल पाया है। इसके कारण मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हो पा रही है।