Kanpur Violence: पुलिस की नरमी से बेखौफ होता गया हयात, सीएए हिंसा में भी थी बड़ी भूमिका
कानपुर हिंसा मामले में पुलिस मुख्य आरोपी हयात जफर हाशमी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि सीएए हिंसा के दौरान तमाम भड़काऊ वीडियो जफर हाशमी ने पोस्ट किए थे। इस मामले में भी कर्नलगंज पुलिस ने उसे आरोपी भी बनाया था, लेकिन बाद में क्लीन चिट दे दी थी।
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उत्तर प्रदेश के कानुपर में शुक्रवार को नमाज के बाद हुई हिंसा के मास्टर मांइड मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन का अध्यक्ष हयात जफर हाशमी को गिरफ्तार कर लिया गया है। हाशमी के कहने पर ही शहर में तीन जून को बंद का आह्वान करते हुए पोस्टर लगाए गए थे। यह पहले भी शहर में सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाकर माहौल को खराब करने की कोशिश कर चुका है।
राशन कोटे का दुकान चलाने वाला हयात जफर हाशमी सांप्रदायिक नफरत फैलाने का उस्ताद माना जाता है। यह पहले भी कई मौकों पर शहर में नफरत के बीज बो चुका है। इतना ही नहीं, इस्लाम के नाम पर हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई को बढ़ाते हुए जफर हाशमी शहर में कई बार उपद्रव करा चुका है। बता दें कि बवाल का मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी सीएए हिंसा के वक्त भी घिरा था। तमाम भड़काऊ वीडियो उसने फेसबुक पर पोस्ट किए थे। भीड़ जुटाने में उसकी बड़ी भूमिका थी।
पुलिस ने केस भी दर्ज किया था, लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई थी। इसी तरह पिछले साल जबरन जुलूस निकालने में पुलिस ने केवल शांतिभंग की कार्रवाई कर मामला रफादफा कर दिया था। पुलिस की इस तरह की नरमी से हयात बेखौफ होता गया। एलान कर भीड़ जुटाना और फिर बवाल करवाना उसकी फितरत बन गई है।
दिसंबर 2019 में सीएए के विरोध में शहर में भारी हिंसा हुई थी। तीन लोगों की मौत हुई थी और पचास से अधिक लोग घायल हुए थे। घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल थे। उस दौरान हयात जफर हाशमी आएदिन लोगों को सीएए को लेकर भड़काता था। वीडियो बनाकर फेसबुक पर पोस्ट करता था। खासतौर पर भीड़ जुटाना उसका मकसद रहता था।
अमर उजाला ने इस संबंध में खबर भी प्रकाशित की थी। पुलिस ने उसको कर्नलगंज के केस में आरोपी भी बनाया था लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं की थी। इसी तरह पिछले साल प्रतिबंध के बावजूद उसने जुलूस निकाला था। पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया था लेकिन केवल शांतिभंग में कार्रवाई कर छोड़ दिया था। यही वजह है कि वह बेखौफ होता गया और इस बार भी उसने भीड़ जुटाने का एलान किया। तय तारीख पर भीड़ जुटी और बवाल हो गया।
ताकि खुद बच सके, बवाल भी हो जाए
सीएए हिंसा में वह प्रदर्शन में तो शामिल हुआ था, लेकिन हिंसा के दौरान वह सीधेतौर पर मौजूद नहीं था। इसी तरह जुलूस के लिए उसने भीड़ तो जुटाई थी लेकिन उसमें भी वह वहां शामिल नहीं हुआ था। यहां भी उसने तीन तारीख को बाजार बंद का एलान किया। वीडियो पोस्ट किया फिर बंद का कार्यक्रम स्थगित करने का दावा किया। मगर ऐसा हुआ नहीं। लोग जुटे और बवाल भी किया। पुलिस अफसरों का कहना है कि ये असल साजिशकर्ता है। इसका मकसद भी पूरा हो जाता है और वह पर्दे की पीछे रहता है, जिससे वह खुद बच सके, बवाल भी हो जाए।
संस्था की एक एक गतिविधि खंगाली जाएगी
हयात जफर हाशमी एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन का अध्यक्ष है। पुलिस अफसरों का कहना है कि एसोसिएशन का विस्तार कहां तक है। इससे कौन-कौन लोग जुड़े हैं। फंड कहां कहां से आता है। आदि बिंदुओं पर जांच शुरू की गई है। हयात व उससे संबंधित बैंक खातों का भी ब्योरा जुटाया जा रहा है।